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UNSC: भारत ने 1971 का जिक्र कर PAK को किया बेनकाब, कहा- 'संघर्ष में यौन हिंसा' के अपराधियों की कड़ी निंदा करें

Wed, 20 Aug 2025 04:52 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 20 Aug 2025 04:52 AM IST
सार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली बहस में कहा कि पाकिस्तान का इतिहास और वर्तमान, दोनों ही यौन हिंसा और अल्पसंख्यक महिलाओं पर अत्याचार से भरे हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न्याय और मानवाधिकारों की बात करता है, जो पूरी तरह से झूठ और पाखंड है।
 

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UNSC Debate Indian Diplomat Eldos Mathew Punnoose Pakistan Army perpetrated heinous crimes in 1971 Hindi news
भारतीय राजनयिक एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान के भीतर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार और उनके जबरन धर्मांतरण पर इस्लामाबाद को लताड़ लगाई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रभारी राजदूत एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में 1971 में पाकिस्तानी सेना के हाथों की गई बर्बर यौन हिंसा की याद दिलाई और कहा अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के साथ यौन अपराधों का यह निंदनीय सिलसिला आज भी बेखौफ जारी है।

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पुन्नूस ने सुरक्षा परिषद में संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा पर खुली बहस में कहा, पाकिस्तान में 1971 में वहां की सेना द्वारा शुरू लाखों महिलाओं के खिलाफ शर्मनाक यौन हिंसा के जघन्य अपराध किए, जो आज भी रुके नहीं हैं। सिर्फ इनका रूप बदलकर धर्मांतरण और दुष्कर्म हो गया है। वह बोले-धार्मिक व जातीय अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति उत्पीड़न के हथियार के रूप में हजारों कमजोर महिलाओं-लड़कियों का बड़े पैमाने पर अपहरण, तस्करी, बाल विवाह और जबरन घरेलू दासता, यौन हिंसा व धर्मांतरण का विवरण हाल ही में जारी ओएचसीएचआर रिपोर्टों में भी दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि रूढ़िवादी देश की न्यायपालिका भी महिलाओं के विरुद्ध इन निंदनीय अपराधों को मान्यता देती है।
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अपराधी अब न्याय के रक्षक का ढोंग रच रहे
पुन्नूस ने हाल में पाकिस्तानी महिला उत्पीड़न पर छपी रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा, यह विडंबना ही है कि जो लोग इन अपराधों को अंजाम देते हैं, वे अब न्याय के रक्षक होने का ढोंग रच रहे हैं। उन्होंने कहा, यह कपट-पाखंड स्वयंसिद्ध है। इस तरह के जघन्य दुर्व्यवहार के दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे अपराध पूरे समुदाय पर गहरे दाग छोड़ जाते हैं। उन्होंने कहा, ऐसे दोषियों की सख्त निंदा कर उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।

कामयाब रहे शांति अभियानों में भारत के महिला दल
भारत ने कहा, पीएम मोदी ने विभिन्न अभियानों में यौन शोषण और दुर्व्यवहार की रोकथाम पर काफी जोर दिया। शांति अभियानों में भारत द्वारा तैनात महिला सहभागिता दल स्थानीय समुदायों से जुड़ने, संवेदनशील लैंगिक मुद्दे संबोधित करने, पीड़ितों से जुड़ने और शांति अभियानों को बढ़ाने में काफी सफल रहे हैं।


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हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्मांतरण बढ़े : मानवाधिकार आयोग
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के प्रति हिंसा व अत्याचार मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक वर्ष में हिंदू, ईसाई व अहमदिया समुदाय के लोगों पर हमले, जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह के मामले तेजी से बढ़े हैं। यह खुलासा पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में किया है। ‘स्ट्रीट्स ऑफ फियर : फ्रीडम ऑफ रिलीजन ऑर बिलीफ 2024/25’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदिया समुदाय के पूजा स्थलों को तोड़ा गया और उन पर लक्षित हमले बढ़े हैं। वहीं पंजाब और सिंध में नाबालिग हिंदू व ईसाई लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और शादी कराए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ईशनिंदा के आरोप में अल्पसंख्यकों को भीड़ हिंसा में मार डालने के मामले भी बढ़े हैं।

पाकिस्तान में 2021 से 2025 तक 567 यौन शोषण केस
पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने सीनेट को सूचित किया है कि 2021 से जून 2025 के बीच अकेले राजधानी इस्लामाबाद में यौन शोषण के 567 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 201 मामले बच्चों से जुड़े थे। सीनेट सत्र के दौरान सीनेटर शाहदत अवान को एक लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की गई। बाल यौन शोषण के दर्ज किए गए 201 मामलों में से 93 पीड़ित लड़के और 108 लड़कियां थीं। इस संबंध में  222 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 

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