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यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग: नाइट शिफ्ट में काम करने से डीएनए को खतरा
Tue, 29 Jan 2019 02:59 AM IST
गौरव द्विवेदी
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Tue, 29 Jan 2019 02:59 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
नाइट शिफ्ट में काम करने से कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, श्वास संबंधी एवं तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां होने के साथ-साथ इससे आपके डीएनए को भी नुकसान पहुंच सकता है। एनस्थेशिया एकेडमिक जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, रात्रि में काम करने वालों में डीएनए मरम्मत करने वाला जीन अपनी गति से काम नहीं कर पाता और नींद की ज्यादा कमी होने पर यह स्थिति और बिगड़ती जाती है। शोध में पाया गया है कि जो व्यक्ति रात भर काम करते हैं, उनमें डीएनए क्षय का खतरा रात में काम नहीं करने वालों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक होता है।
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वैसे लोग जो रात में काम करते हैं और पयार्प्त नींद नहीं ले पाते हैं, उनमें डीएनए क्षय का खतरा और 25 फीसदी बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के रिसर्च एसोसिएट एस. डब्ल्यू. चोई ने कहा, ‘डीएनए खतरा का मतलब डीएनए की मूलभूत संरचना में बदलाव है। यानी डीएनए जब दोबारा बनता है, उसमें मरम्मत नहीं हो पाता है और यह क्षतिग्रस्त डीएनए होता है।’ चोई ने कहा कि जब डीएनए में मरम्मत नहीं हो पाता तो यह खतरनाक स्थिति है और इससे कोशिका की क्षति हो जाती है।
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