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हांगकांग में प्रदर्शन को धार देने वाले प्रोफेसर को हटाया, भड़क सकते हैं समर्थक छात्र
Thu, 30 Jul 2020 06:24 AM IST
अवधेश कुमार
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, हांगकांग
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, हांगकांग
Published by: अवधेश कुमार
Updated Thu, 30 Jul 2020 06:24 AM IST
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Protest in Hong kong
- फोटो : Twitter
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चीनी स्वायत्त क्षेत्र हांगकांग में चीन का नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पारित होने के बाद पहली बार किसी प्रमुख शख्स को नौकरी से निकाला गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग की गवर्निंग बॉडी ने चीन विरोधी प्रदर्शनों में एक एसोसिएट प्रोफेसर की भूमिका पाने पर उन्हें दोषी ठहराते हुए बाहर का रास्ता दिखाया है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से उनके समर्थक छात्रों का गुस्सा भड़क सकता है।
हांगकांग विश्वविद्यालय की परिषद ने लॉ के प्रोफेसर बेनी ताई को पद से हटाने के लिए बाकायदा मतदान किया और 18-2 के अंतर से जीत के बाद उन्हें पद से हटा दिया। वर्ष 2014 में चीन विरोधी अभियान में एक सार्वजनिक आंदोलन के दौरान वे उन नौ नेताओं में से एक थे जिन्होंने आंदोलन को बढ़ावा दिया था। हालांकि यह आंदोलन विफल साबित हो चुका है।
उन्हें पिछले साल सार्वजनिक उपद्रव के आरोपों में भी दोषी ठहराया गया। अप्रैल 2019 में ताई को 16 माह जेल की सजा सुनाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। माना जा रहा है कि प्रो. बेनी ताई को नौकरी से हटाने के चलते उनके समर्थक छात्रों में गुस्सा भड़क सकता है और वे आंदोलन शुरू कर सकते हैं। इसलिए हांगकांग में युवाओं पर सख्त निगाह रखी जा रही है ताकि सप्ताहांत में दोबारा कोई उग्र आंदोलन न छिड़ सके।
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हांगकांग विश्वविद्यालय की परिषद ने लॉ के प्रोफेसर बेनी ताई को पद से हटाने के लिए बाकायदा मतदान किया और 18-2 के अंतर से जीत के बाद उन्हें पद से हटा दिया। वर्ष 2014 में चीन विरोधी अभियान में एक सार्वजनिक आंदोलन के दौरान वे उन नौ नेताओं में से एक थे जिन्होंने आंदोलन को बढ़ावा दिया था। हालांकि यह आंदोलन विफल साबित हो चुका है।
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उन्हें पिछले साल सार्वजनिक उपद्रव के आरोपों में भी दोषी ठहराया गया। अप्रैल 2019 में ताई को 16 माह जेल की सजा सुनाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। माना जा रहा है कि प्रो. बेनी ताई को नौकरी से हटाने के चलते उनके समर्थक छात्रों में गुस्सा भड़क सकता है और वे आंदोलन शुरू कर सकते हैं। इसलिए हांगकांग में युवाओं पर सख्त निगाह रखी जा रही है ताकि सप्ताहांत में दोबारा कोई उग्र आंदोलन न छिड़ सके।
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