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अमेरिका ऑनलाइन क्लास वाले छात्रों का वीजा लेगा वापस, दो लाख भारतीय होंगे प्रभावित
Tue, 07 Jul 2020 10:54 PM IST
अवधेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अवधेश कुमार
Updated Tue, 07 Jul 2020 10:54 PM IST
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अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को बड़ा झटका लगा है। कोरोना वायरस महामारी के बीच अमेरिका ने छात्र वीजा वापस लेने का फैसला किया है। अमेरिका ने सोमवार को ऐसे छात्रों से छात्र वीजा वापस लेने की घोषणा की जिनकी क्लास कोरोना के कारण केवल ऑनलाइन मॉडल पर हो रही हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (इमीग्रेशन ऐंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने कहा कि अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर इस तरह के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आईसीई ने कहा है कि छात्र वीजा पर अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्र जिनके स्कूल की पढ़ाई केवल ऑनलाइन कक्षाओं में हो रहे हैं, उन्हें देश में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया जाएगा। साथ में उन्हें अमेरिका छोड़कर लौटना होगा।
10 लाख छात्र होंगे प्रभावित
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से 10 लाख छात्र प्रभावित होंगे। इनमें दो लाख से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा छात्र चीन से आते हैं। इसके बाद भारतीयों का नंबर है। ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन वाले छात्रों के लिए एफ-1 और एम-1 वीजा जारी किए जाते हैं।
छात्रों को जबरदस्ती वापस भेजने की तैयारी
सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि अगर कोई विदेशी छात्र आदेश के बावजूद अमेरिका नहीं छोड़ता तो फिर उसे जबरन उसके देश भेज दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला महामारी का प्रभाव कम करने के लिए लिया है।
अमेरिका में दो लाख भारतीय छात्र
2018-19 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में चीन के तीन लाख 69 हजार 548, भारत के दो लाख 20 हजार 14 और साउथ कोरिया के 52 हजार 250 छात्र हैं।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले ये छात्र एफ-1 वीजा पर यहां आते हैं। वहीं अमेरिका में वोकेशनल या अन्य मान्यता प्राप्त गैर-शैक्षणिक संस्थानों में तकनीकी कार्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्र (भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम से इतर) एम -1 वीजा पर यहां आते हैं।
‘स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम’ (एसईवीआईपी) की 2018 ‘सेविस बाई नंबर रिपोर्ट’ के अनुसार अमेरिका में 2017 में चीन के सबसे अधिक 4,78,732 छात्रों के बाद 2,51,290 भारतीय छात्र थे। वहीं, वर्ष 2017 से 2018 के बीच अमेरिका पढ़ने आए भारतीय छात्रों की संख्या में 4157 की बढ़ोतरी हुई।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अमेरिका में रहने की अर्हता को बताते हुए आईसीई ने कहा कि छात्रों को संघीय कानून के अंतर्गत चल रही स्कूलों में पांरपरिक कक्षाओं में पढ़ाई करनी होगी।
आईसीई ने कहा, ‘योग्य एफ छात्र अधिकतम एक कक्षा या तीन क्रेडिट घंटे ऑनलाइन ले सकते हैं।’
गैर आव्रजक एफ-1 छात्र जो हाइब्रिड मॉडल- ऑनलाइन और पारंपरिक कक्षा समिश्रण- के तहत अध्ययन कर रहे हैं उन्हें एक से अधिक कक्षाएं या तीन क्रेडिट घंटे ऑनलाइन लेने की अनुमति होगी।
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United States to withdraw student visas for foreigners whose classes move online, reports AFP news agency quoting official
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 6, 2020
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (इमीग्रेशन ऐंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने कहा कि अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर इस तरह के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आईसीई ने कहा है कि छात्र वीजा पर अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्र जिनके स्कूल की पढ़ाई केवल ऑनलाइन कक्षाओं में हो रहे हैं, उन्हें देश में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया जाएगा। साथ में उन्हें अमेरिका छोड़कर लौटना होगा।
10 लाख छात्र होंगे प्रभावित
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से 10 लाख छात्र प्रभावित होंगे। इनमें दो लाख से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा छात्र चीन से आते हैं। इसके बाद भारतीयों का नंबर है। ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन वाले छात्रों के लिए एफ-1 और एम-1 वीजा जारी किए जाते हैं।
छात्रों को जबरदस्ती वापस भेजने की तैयारी
सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि अगर कोई विदेशी छात्र आदेश के बावजूद अमेरिका नहीं छोड़ता तो फिर उसे जबरन उसके देश भेज दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला महामारी का प्रभाव कम करने के लिए लिया है।
अमेरिका में दो लाख भारतीय छात्र
2018-19 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में चीन के तीन लाख 69 हजार 548, भारत के दो लाख 20 हजार 14 और साउथ कोरिया के 52 हजार 250 छात्र हैं।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले ये छात्र एफ-1 वीजा पर यहां आते हैं। वहीं अमेरिका में वोकेशनल या अन्य मान्यता प्राप्त गैर-शैक्षणिक संस्थानों में तकनीकी कार्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्र (भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम से इतर) एम -1 वीजा पर यहां आते हैं।
‘स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम’ (एसईवीआईपी) की 2018 ‘सेविस बाई नंबर रिपोर्ट’ के अनुसार अमेरिका में 2017 में चीन के सबसे अधिक 4,78,732 छात्रों के बाद 2,51,290 भारतीय छात्र थे। वहीं, वर्ष 2017 से 2018 के बीच अमेरिका पढ़ने आए भारतीय छात्रों की संख्या में 4157 की बढ़ोतरी हुई।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अमेरिका में रहने की अर्हता को बताते हुए आईसीई ने कहा कि छात्रों को संघीय कानून के अंतर्गत चल रही स्कूलों में पांरपरिक कक्षाओं में पढ़ाई करनी होगी।
आईसीई ने कहा, ‘योग्य एफ छात्र अधिकतम एक कक्षा या तीन क्रेडिट घंटे ऑनलाइन ले सकते हैं।’
गैर आव्रजक एफ-1 छात्र जो हाइब्रिड मॉडल- ऑनलाइन और पारंपरिक कक्षा समिश्रण- के तहत अध्ययन कर रहे हैं उन्हें एक से अधिक कक्षाएं या तीन क्रेडिट घंटे ऑनलाइन लेने की अनुमति होगी।