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चीन से होड़: डिजिटल युवान के उदय से अमेरिका में गहरा गई है चिंता

Mon, 26 Jul 2021 05:45 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 26 Jul 2021 05:45 PM IST
सार

ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में युवान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा का रूप लेने की गति तेज हो गई। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना के एक अध्ययन का हवाला देते हुए अखबार ने कहा है कि आने वाले वर्षों में युवान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं...

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united states deeply concerned with the rise of chinese digital currency yuan
युआन चीन डिजिटल मुद्रा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ऑनलाइन मुद्रा के आविष्कार के क्षेत्र में चीन अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार की मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की हैसियत के लिए चुनौतियां पैदा हो रही हैं। यह बात मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के डिजिटल मुद्रा विभाग और अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अध्ययनों में कही गई है। उनकी रिपोर्टं में उल्लेख किया गया है कि तकरीबन 80 देश सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) विकसित करने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं, जिनमें चीन और अमेरिका भी शामिल हैं। लेकिन चीन जहां मुद्रा को अपने घरेलू बाजार में प्रयोग के लिए जारी कर चुका है, वहीं अमेरिका अभी अनुसंधान के दौर में ही है।

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एमआईटी और फेडरल रिजर्व के अनुसंधानकर्ताओं की ये राय बनी है कि डिजिटल करेंसी के मामले में प्राइवेसी (निजता) सबसे बड़ा मुद्दा है। एमआईटी की डिजिटल करेंसी इनिशिएटिव की निदेशक नेहा नरूला ने टीवी चैनल सीएनबीसी से कहा- ‘मेरी राय में अगर डिजिटल डॉलर शुरू किया गया, तो प्राइवेसी का मुद्दा बेहद अहम होकर सामने आएगा। इस मामले में अमेरिका और चीन में भारी फर्क है।’
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एक दूसरी चिंता यह है कि अमेरिका में हर व्यक्ति इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करता। पिउ रिचर्स सेंटर के एक हालिया सर्वे में बताया गया है कि अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या कुल आबादी के सात फीसदी के बराबर है। अगर सिर्फ ब्लैक अमेरिकियों की बात करें, तो ये संख्या नौ फीसदी है। 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में तो 25 फीसदी ऐसे हैं, जो इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते। विकलांग लोगों में भी ये संख्या सामान्य से अधिक है।

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नेहा नरूला ने कहा- ‘एमआईटी में जो रिसर्च हो रहा है, उसमें यह मान कर चला जा रहा है कि डिजिटल मुद्रा के साथ साथ नकदी मुद्रा का अस्तित्व भी बना रहेगा। जो लोग नकदी का इस्तेमाल करना चाहेंगे, वे ऐसा कर पाएंगे।’ अमेरिका में डिजिटल डॉलर लॉन्च करने की कोशिश इस समझ के साथ शुरू की गई है कि विश्व अर्थव्यवस्था में डॉलर का वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी में ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर डैरेल डुफी ने सीएनबीसी से कहा- ‘अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी मौजूदा अग्रणी भूमिका को लेकर आश्वस्त नहीं रहना चाहिए। उसे इस बारे में एक स्पष्ट रणनीति बनानी चाहिए कि डॉलर की शक्ति का लाभ उठाते हुए मुद्रा के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति कैसे कायम रखी जाए।’ उधर वित्तीय एजेंसी हिमैन कैपिटल मैनेजमेंट के विशेषज्ञ काइल बास ने कहा है कि पश्चिमी देशों ने पिछले 30-40 वर्षों में जिन चुनौतियों का सामना किया है, उनमें डिजिटल युवान सबसे बड़ी चुनौती है।

इस बीच चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में युवान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा का रूप लेने की गति तेज हो गई। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना के एक अध्ययन का हवाला देते हुए अखबार ने कहा है कि आने वाले वर्षों में युवान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। 2020 में युवान अंतरराष्ट्रीयकरण सूचकांक 5.02 पर पहुंच गया। यह 2019 की तुलना में 54.2 फीसदी की बड़ी उछाल है। उछाल की ये दर जापानी येन या ब्रिटिश पाउंड की तुलना में ज्यादा है।

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