आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन आयोजित करे संयुक्त राष्ट्र : भारत
- - सीआरएस द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है
- - अफगानिस्तान में चरमपंथ के लंबे समय तक बने रहने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया
- अफगानिस्तान के साथ अधिक मजबूत रक्षा संबंध आगे बढ़ाने के लिए रूचि नहीं दिखाई भारत ने : यूएस रिपोर्ट
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पाकिस्तानी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के बाद अब भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन आयोजित करने की मांग की है। हाल में श्रीलंका के अलावा दुनियाभर में प्रार्थना स्थलों पर हो रहे हमले को देखते हुए इस सम्मेलन की मांग की गई है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) आयोजित करने को लेकर एक मसौदा दस्तावेज संयुक्त राष्ट्र में 1986 में पेश किया था। हालांकि, यह लागू नहीं हो सका, क्योंकि सदस्य देशों के बीच आतंकवाद की परिभाषा को लेकर एक राय नहीं बन पाई थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने श्रीलंका में ईस्टर पर हुए धमाकों में मारे गए लोगों की याद में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक खाका का जल्द तैयार होना मृतकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा, ‘प्रार्थना स्थलों और मनोरंजन स्थलों पर नृशंस और कायराना हमलों ने विभिन्न देशों में निर्दोष लोगों की जान ले ली। यह इस बात की याद दिलाता है कि आतंकवाद सिर्फ आजीविका के साधन और लोगों की जिंदगियां ही नहीं बर्बाद करता है, बल्कि समाज को छिन्न भिन्न और देश को अस्थिर करता है।’
यूएस संसद की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अफगानिस्तान के साथ अधिक मजबूत रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी रूचि नहीं दिखाई है, जबकि भारत, युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में सबसे बड़ा क्षेत्रीय योगदानकर्ता रहा है। स्वतंत्र कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) द्वारा अफगानिस्तान पर ताजा रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने वर्ष 2017 में अपने दक्षिण एशिया संबोधन में भारत को अफगानिस्तान के आर्थिक विकास में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया था।
एक मई की रिपोर्ट के अनुसार अफगान पुनर्निर्माण में भारत सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा है, लेकिन नयी दिल्ली ने काबुल के साथ और अधिक मजबूत रक्षा संबंध के प्रति रूचि नहीं दिखाई है। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के द्विदलीय शोध विंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसने और अन्य चीजों ने अफगानिस्तान में भारत की गतिविधियों को लेकर पाकिस्तान की चिताएं बढ़ा दी हैं। यह रिपोर्ट अमेरिकी सांसदों के लिए तैयार की जाती है, हालांकि ये अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में पड़ोसी राष्ट्र पाकिस्तान व्यापक रूप से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसने एक सक्रिय भूमिका निभाई है, और उसका दशकों तक अफगान के कई मामलों में नकारात्मक भूमिका निभाने का रिकार्ड रहा है।
ट्रंप ने पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का लगाया आरोप
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञ इस बात पर बहस करते हैं कि पाकिस्तान, अफगान स्थिरता के लिए किस हद तक प्रतिबद्ध है अथवा आतंकवादी समूहों से संबंधों के द्वारा अफगानिस्तान में नियंत्रण कायम रखने का प्रयत्न कर रहा है। विशेष रूप से हक्कानी नेटवर्क, जिसे अमेरिका ने विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) का नाम दिया है, जो कि तालिबान का एक आधिकारिक, अर्ध-स्वायत्त घटक बन गया है।