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G20 Presidency: पारंपरिक चिकित्सा पर WHO के साथ दुनिया का नेतृत्व करेगा भारत, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

Tue, 23 May 2023 11:51 PM IST
वीरेंद्र शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, जिनेवा Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 23 May 2023 11:51 PM IST
सार

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को अपनाने में भारत के जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ का वैश्विक केंद्र उनकी सहायता करेगा। सभा में केंद्रीय आयुष मंत्रालय के विशेष सचिव ने भारत में आयुर्वेद, यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा के जरिये आने वाले बदलावों पर चर्चा की। 

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Union Health Minister Dr Mandaviya addressed the 76th World Health Assembly in Geneva
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मांडविया - फोटो : ANI

विस्तार

पारंपरिक चिकित्सा को लेकर डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा। जिनेवा में आयोजित 10 दिवसीय 76वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में इसकी शुरुआत भी हुई है। भारत ने यहां पारंपरिक चिकित्सा को लेकर सभी सदस्यीय देशों के आगे दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।
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पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को अपनाने में भारत के जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ का वैश्विक केंद्र उनकी सहायता करेगा। सभा में केंद्रीय आयुष मंत्रालय के विशेष सचिव प्रमोद कुमार पाठक ने भारत में आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्धा, यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा के जरिये आने वाले बदलावों पर चर्चा की। दरअसल, डब्ल्यूएचओ समय-समय पर पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ी नीतियों में बदलाव करता है। अभी 2014-2023 नीति के तहत काम किया जा रहा था, लेकिन अब डब्ल्यूएचओ 2025-2034 तक के लिए नई वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति का मसौदा तैयार कर रहा है।
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साल भर में आईं 53 स्वास्थ्य आपात स्थितियां, डब्ल्यूएचओ का बजट पड़ा कम
बीते साल दुनिया में 53 स्वास्थ्य आपात स्थितियां आईं हैं, जिनमें कोरोना महामारी से लेकर हैजा तक शामिल हैं। इनसे निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ का सालाना बजट भी कम पड़ गया। डब्ल्यूएचओ के एक वरिष्ठ सलाहकार का मानना है कि दुनियाभर में स्वास्थ्य आपात स्थितियों की बढ़ती संख्या ने संगठन का खर्चा बढ़ाया है। जिनेवा में आयोजित 10 दिवसीय 76वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में सभी देशों ने मिलकर डब्ल्यूएचओ के सालाना बजट 2024-25 में करीब 20 फीसदी बढ़ोतरी का समर्थन किया है।
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केंद्रीय रेल मंत्री ने बांग्लादेश को सौंपे 20 डीजल इंजन 
रेल भवन नई दिल्ली में आयोजित एक हैंड ओवर समारोह में भारत ने बांग्लादेश को 20 आधुनिक डीजल इंजन दिए हैं। इस मौके पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध सभ्यतागत, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक हैं। दोनों देशों के प्रधानमंत्री सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए एक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

भारतीय रेलवे सीमा पार रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और मजबूत करने और दोनों देशों के बीच व्यापार में सुधार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब तक, पांच बीजी कनेक्टिविटी चालू हैं, जिनमें गेडा-दरसाना, बेनापोल-पेट्रापोल, सिंघाबाद-रोहनपुर, राधिकापुर- बिरोल और हल्दीबाड़ी-चिल्हाटी शामिल हैं। दो और सीमा पार रेल संपर्क, अखौरा-अगरतला और महिषासन-शाहबाजपुर पर काम अच्छी तरह से प्रगति कर रहा है और जल्द ही पूरा होने और चालू होने की संभावना है। लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए, वर्तमान में भारत और बांग्लादेश के बीच तीन पैसेंजर ट्रेनें, कोलकाता-ढाका मैत्री एक्सप्रेस, कोलकाता-खुलना बंधन एक्सप्रेस और न्यू जलपाईगुड़ी-ढाका मिताली एक्सप्रेस चल रही हैं। 

भारत सरकार के समर्थन के लिए किया आभार व्यक्त 
बांग्लादेश की ओर से रेल मंत्री मोहम्मद नुरुल इस्लाम सुजान भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। सभा को वर्चुअली संबोधित करते हुए, रेल मंत्री सुजान ने कहा, मैं भारत सरकार के समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। इससे पहले जून 2020 में भारत सरकार ने अनुदान के रूप में बांग्लादेश को 10 लोकोमोटिव प्रदान किए थे। ब्रॉड गेज प्रदान करने के लिए हम भारत का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।

दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणाली का घर भारत : मांडविया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सभी देशों को हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया का संदेश दिया। उन्होंने कहा, भारत दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणाली और आयुर्वेद का घर है। इसकी अनूठी ताकत सामने आने के साथ, दुनिया भर में आयुष उपचारों की मांग बढ़ी है।


मांडविया ने कहा, भारत ने कोरोना टीकाकरण की एक अकल्पनीय गति हासिल की है और भारत में अब तक 220 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है। वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से लाखों टीके दुनिया से साझा किए। हील बाय इंडिया पहल को 'वसुधैव कुटंबकम' के आधार पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य कार्यबल की गतिशीलता बढ़ाने के इरादे से बनाया है। हील इन इंडिया पहल भारत में दुनिया को एकीकृत और समग्र उपचार प्रदान करने का प्रयास करती है। सस्ती और गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के लिए रोगी की गतिशीलता बढ़ाने का प्रयास करती है। मांडविया ने बताया, जी-20 हेल्थ ट्रैक के तहत भारत ने एक स्वास्थ्य और एंटी-माइक्रोबियल पर ध्यान देने के साथ स्वास्थ्य आपात स्थिति, रोकथाम, और तैयारी को प्राथमिकता दी है।
 
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