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UN : दुनियाभर में मातृ मृत्यु, जन्मजात मृत और नवजात मृत्यु का 60 प्रतिशत हिस्सा इन 10 देशों में, भारत भी शामिल

Wed, 10 May 2023 03:02 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, केप टाउन।
पीटीआई, केप टाउन। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 10 May 2023 03:02 PM IST
सार

डब्ल्यूएचओ (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और यूएनएफपीए (UNFPA) द्वारा प्रगति ट्रैकिंग रिपोर्ट में ताजा प्रकाशित अनुमान मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केप टाउन में चल रहे 'अंतरराष्ट्रीय मातृ नवजात स्वास्थ्य सम्मेलन' (IMNHC 2023) में लॉन्च किया गया।

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UN says India in 10 countries that make up 60 Percent of global maternal deaths, still births, new born deaths
IMNHC 2023 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु, जन्मजात मृत और नवजात मृत्यु को एक लेकर एक अध्ययन किया है। संयुक्त राष्ट्र की अध्ययन रिपोर्ट भारतीय चिकित्सा जगत के लिए निराशाजनक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक मातृ मृत्यु, जन्मजात मृत और नवजात मृत्यु के 60 प्रतिशत और  जीवित बच्चों के जन्म का 51 प्रतिशत हिस्सा दुनिया के सिर्फ इन 10 देश में हैं और भारत उन 10 देशों की सूची में सबसे ऊपर है।

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डब्ल्यूएचओ (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और यूएनएफपीए (UNFPA) द्वारा प्रगति ट्रैकिंग रिपोर्ट में ताजा प्रकाशित अनुमान मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केप टाउन में चल रहे 'अंतरराष्ट्रीय मातृ नवजात स्वास्थ्य सम्मेलन' (IMNHC 2023) में लॉन्च किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-2021 में विश्व स्तर पर संयुक्त रूप से करीब 45 लाख मौतें हुईं। जिनमें मातृ मृत्यु (2.9 लाख), जन्मजात मृत (19 लाख) और नवजात मृत्यु (23 लाख) शामिल है।
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उप-सहारा अफ्रीका एवं मध्य और दक्षिणी एशिया ऐसे क्षेत्र हैं जहां सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। हालांकि, सभी क्षेत्रों में इस संबंध में भिन्नता है जिस पर देश वैश्विक स्तर पर 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के अपने प्रयासों में प्रगति कर रहे हैं। 'अंतरराष्ट्रीय मातृ नवजात स्वास्थ्य सम्मेलन' आठ मई को शुरू हुआ था और चार दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका सरकार और AlignMNH द्वारा की जा रही है। यह यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) के सहयोग से बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित एक वैश्विक पहल है।
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पहली बार संयुक्त रूप से जारी एवरी न्यूबॉर्न एक्शन प्लान (ENAP) और एंडिंग प्रिवेंटेबल मैटरनल मॉर्टेलिटी (EPMM) प्रगति ट्रैकिंग रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती महिलाओं माताओं और शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने में वैश्विक प्रगति मातृ और नवजात स्वास्थ्य में घटते निवेश के कारण आठ वर्षों से स्थिर रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के निदेशक डॉ अंशु बनर्जी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की दुनिया भर में अस्वीकार्य रूप से उच्च दर पर मृत्यु हो रही है और कोरोनोवायरस महामारी ने उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने में और अधिक मुश्किलें पैदा की हैं। बनर्जी ने कहा, अगर हम अलग परिणाम देखना चाहते हैं, तो हमें चीजों को अलग तरह से करना चाहिए। प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में अधिक और बेहतर निवेश की आवश्यकता है ताकि हर महिला और बच्चे चाहे वे कहीं भी रहते हों उनके पास स्वास्थ्य और जीवित रहने का सबसे अच्छा मौका हो।


भारत में 2020 में वैश्विक स्तर पर कुल 45 लाख मौतों में से 7,88,000 मातृ मृत्यु, जन्मजात मृत और नवजात मृत्यु हुई। देश में वैश्विक स्तर पर जीवित बच्चों का जन्म का 17 प्रतिशत है, जो बड़ी संख्या में मातृ मृत्यु, जन्मजात मृत और नवजात मृत्यु का कारक हो सकता है। भारत के बाद मातृ मृत्यु, जन्मजात मृत और नवजात मृत्यु के मामले में नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, बांग्लादेश और चीन का स्थान है।

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