एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने पर विवाद: बीएपीएस ने जताया खेद, कहा- किसी को अंदर जाने से नहीं रोका
पेरिस के मशहूर एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को लेकर उठे विवाद के बीच बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था बीएपीएस से जुड़े हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल ने आज अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि दौरे के दौरान किसी भी व्यक्ति को एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया था।
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एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाए जाने के विवाद के बीच बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) ने आज सफाई देते हुए कहा है कि उसके प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान किसी को भी स्मारक में प्रवेश से नहीं रोका गया था। बीएपीएस ने कहा कि बड़े प्रतिनिधिमंडल को देखते हुए दौरा एफिल टावर की टीम के साथ समन्वय कर सुबह के शुरुआती समय में रखा गया था, ताकि दूसरे पर्यटकों को कम परेशानी हो। हालांकि, संगठन ने स्थिति से किसी को हुई तकलीफ के लिए दिल से माफी मांगी और आपसी सम्मान व सेवा के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने के आरोपों के बाद एफिल टावर के कर्मचारियों ने विरोध किया, प्रबंधन से माफी और जांच की मांग की तथा पेरिस के मेयर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
बड़े प्रतिनिधिमंडल की वजह से खास व्यवस्था
बीएपीएस के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल की संख्या काफी ज्यादा थी। इसी वजह से एफिल टावर की टीम के साथ समन्वय करके यह दौरा आम लोगों के लिए स्मारक खुलने के समय के शुरुआती हिस्से में रखा गया था, ताकि दूसरे पर्यटकों को कम से कम परेशानी हो और उनकी आवाजाही प्रभावित न हो। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार, दौरे के दौरान किसी भी समय किसी को एफिल टावर में जाने से नहीं रोका गया। हालांकि, उसने यह भी कहा कि अगर इस पूरी स्थिति से किसी को किसी तरह की परेशानी या तकलीफ हुई है तो वह उसके लिए दिल से माफी मांगता है।
महिला कर्मचारियों को हटाने के आरोप से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, सोमवार को पेरिस का एफिल टावर कुछ समय के लिए बंद रहा। कर्मचारियों ने एक बैठक और विरोध प्रदर्शन किया था। यह विरोध शनिवार को हुए एक दौरे से जुड़ा था, जिसमें करीब 100 लोगों का हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर पहुंचा था। आरोप लगाया गया कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को उनकी काम की जगह से हटने के लिए कहा गया और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया। इस घटना ने कर्मचारियों के बीच नाराजगी पैदा कर दी।
बीएपीएस से जुड़ा था प्रतिनिधिमंडल
शनिवार को एफिल टावर पहुंचा यह प्रतिनिधिमंडल बीएपीएस से जुड़ा हुआ था। यह समूह पेरिस के पास बने एक बड़े हिंदू मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए फ्रांस आया था। यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल के गुजरने के दौरान महिला कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी की जगह छोड़ने के लिए कहा गया। उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने पर यूनियन ने सवाल उठाए और इसे लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती गई। यूनियन प्रतिनिधि डायने डावोइन ने कहा कि इस घटना को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा धीरे-धीरे बढ़ा और ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए, जिसमें महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाए।
कर्मचारियों की बैठक के बाद एफिल टावर खुलने में हुई देरी
सोमवार सुबह कर्मचारियों ने बैठक की। इसका उद्देश्य प्रबंधन के साथ इस मामले पर चर्चा करना और आगे ऐसी स्थिति न बनने की गारंटी हासिल करना था। कर्मचारियों की मांग थी कि भविष्य में किसी महिला कर्मचारी को केवल उसके जेंडर के आधार पर उसकी जिम्मेदारी या काम की जगह से पीछे न किया जाए। बैठक के चलते एफिल टावर को आम लोगों के लिए खोलने में देरी हुई। स्मारक पर एक नोटिस भी लगाया गया, जिसमें बताया गया कि संचालन संबंधी कारणों से एफिल टावर निर्धारित समय पर नहीं खुल पाएगा। यूनियन के मुताबिक, प्रबंधन ने इस घटना को लेकर कर्मचारियों से माफी मांगी है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की विस्तृत जांच होनी चाहिए।
सेटे ने माना, ऐसी शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी सेटे ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी ने माना कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिला कर्मचारियों के साथ संपर्क कम रखने की मांग की गई थी। सेटे ने कहा कि इस तरह की शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।
पेरिस के मेयर ने दिए जांच के आदेश
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को जल्द से जल्द सामने लाया जाना जरूरी है।
इस घटना को लेकर कर्मचारियों के बीच काफी नाराजगी है और इसी वजह से मामले की जांच को अहम माना जा रहा है।
बीएपीएस मंदिर के उद्घाटन के बाद सामने आया विवाद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पेरिस के पास बीएपीएस के एक बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ है। रविवार को आयोजित उद्घाटन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारत के प्राचीन विचारों और मानवीय मूल्यों को फ्रांस तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
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'सम्मान और सेवा के मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध'
अपने आज के बयान में बीएपीएस ने कहा कि वह उठाई गई सभी चिंताओं का सम्मान करता है और उन्हें गंभीरता से लेता है। संगठन ने दोहराया कि प्रतिनिधिमंडल का दौरा एफिल टावर की टीम के साथ मिलकर तय किया गया था और इसका उद्देश्य अन्य पर्यटकों को कम से कम परेशानी पहुंचाना था। बीएपीएस ने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार, किसी भी समय किसी को भी एफिल टॉवर में जाने से नहीं रोका गया। फिर भी, हम उन सभी लोगों से दिल से माफी मांगना चाहते हैं जिन्हें इस स्थिति से कोई दुख या परेशानी हुई हो। संगठन ने कहा कि वह आपसी सम्मान और दूसरों की सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।