फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   UN Report India Population Maternal mortality Rate Govt aka public Health people less than 24 years of age

UN: भारत की आबादी 144 करोड़, 24 से कम उम्र के 67% लोग; सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से मातृ मृत्यु दर घटी

Thu, 18 Apr 2024 08:31 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 18 Apr 2024 08:31 AM IST
विज्ञापन
UN Report India Population Maternal mortality Rate Govt aka public Health people less than 24 years of age
भारत की आबादी और मातृत्व (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : आईस्टॉक / एएनआई
भारत की आबादी 144 करोड़ पार होने का अनुमान है। इस आबादी में 67 फीसदी लोग 0 से 24 वर्ष के हैं। देश में महज 7 फीसदी आबादी 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र की है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि (यूएनपीएफ) की तरफ से वार्षिक विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हुई हैं, जिसकी वजह से मातृ मृत्यु दर में कमी आई है और जीवन प्रत्याशा बढ़ी है।
विज्ञापन


पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर यूएनपीएफ ने बताया कि भारत की जनसंख्या 144.17 करोड़ हो चुकी है। भारत की आबादी में 24 फीसदी 0-14 वर्ष के लोग हैं। 17 फीसदी आबादी 10-19 वर्ष के अंदर है। 26 फीसदी 10-24 साल की उम्र के लोग हैं। 15-64 आयु वर्ग के 68 फीसदी लोग शामिल हैं। ब्यूरो
विज्ञापन


65 साल के ऊपर सिर्फ 7% लोग
देश की आबादी में महज 7 फीसदी 65 साल या इससे अधिक उम्र के लोग हैं। देश में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेंटेसी) बढ़कर 71 वर्ष और महिलाओं की 74 वर्ष हो गई है। 77 वर्ष बाद 2101 तक भारत की आबादी बढ़कर दोगुनी हो जाएगी। रिपोर्ट में भारत में जनसंख्या बढ़ने के पीछे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार व जीवन प्रत्याशा में वृद्धि है। रिपोर्ट में गर्भवती व प्रसूताओं को पौष्टिक आहार मुहैया कराने को लेकर चलाई जा रहीं योजनाओं की भी प्रशंसा की गई है। यह भी बताया गया है कि 2006-2023 तक भारत में बाल विवाह की दर 23 फीसदी रही, जो चिंताजनक है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


मातृ मुत्यु दर में असमानता
रिपोर्ट के मुताबिक देश के 640 जिलों में सतत विकास लक्ष्यों के मुताबिक मातृ मृत्यु दर का अनुपात 1,00,000 पर 70 या इससे कम है लेकिन 114 जिले ऐसे हैं, जहां यह अनुपात 1 लाख पर 210 या इससे ज्यादा है। अरुणाचल प्रदेश के तिराप जिले में यह सबसे ज्यादा एक लाख पर 1,671 है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लैंगिक भेदभाव कम हुआ है। हालांकि, दिव्यांग महिलाओं को सामान्य महिलाओं की तुलना में 10 गुना ज्यादा लैंगिक भेदभाव और हिंसा का शिकार होना पड़ता है।

धनी महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं का ज्यादा लाभ मिला  
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के धनी परिवारों की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार का ज्यादा लाभ मिला। इसके अलावा विकलांग महिलाएं, लड़कियां, प्रवासी, शरणार्थी, जातीय अल्पसंख्यकों, एलजीबीटीक्यू प्लस, एचआईवी पीड़ित व वंचित जातियों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य जोखिमों का अधिक सामना करना पड़ता है। कमजोर तबकों की स्थिति को जलवायु परिवर्तन, बड़े पैमाने पर प्रवासन जैसी परिस्थितियों ने और खराब किया है।


प्रसव के दौरान रोज 800 महिलाओं की मौत
रिपोर्ट में कहा गया है कि लाखों महिलाएं और लड़कियों को अब भी कई मायनों में आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है। मसलन, 2016 के बाद से हर दिन देश में 800 महिलाएं बच्चे को जन्म देते समय मर जाती हैं। एक चौथाई महिलाएं अपने साथी के साथ यौन संबंध बनाने से इन्कार नहीं कर सकती हैं। 10 में से एक महिला गर्भनिरोधक के बारे में कोई फैसला लेने की स्थिति में नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed