युद्ध क्षेत्रों में महिलाओं पर बढ़ा कहर: UN रिपोर्ट में 25% यौन हिंसा की वृद्धि, 63 संगठनों को किया ब्लैकलिस्ट
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2024 में दुनियाभर के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में यौन हिंसा के मामलों में 25% की चिंताजनक बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, कांगो, सोमालिया, हैती और दक्षिण सूडान जैसे देशों में महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया। इस गंभीर अपराध में लिप्त पाए गए 12 देशों के 63 संगठनों को यूएन ने ब्लैकलिस्ट कर सख्त चेतावनी जारी की है।
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दुनियाभर के कई हिस्सों में चल रहे संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में संघर्ष के दौरान महिलाओं के साथ बढ़ते यौन हिंसा के मामले पर जोर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2024 में युद्ध और संघर्ष वाले इलाकों में यौन हिंसा के मामले 25% बढ़े हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के सबसे ज्यादा मामले मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो, हैती, सोमालिया और दक्षिण सूडान में सामने आए।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में 4,600 से अधिक लोगों ने यौन हिंसा से बचने की जानकारी दी। इनमें से ज्यादातर घटनाएं हथियारबंद समूहों द्वारा की गईं, हालांकि कुछ मामलों में सरकारी बल भी शामिल पाए गए। गुटेरेस ने कहा कि ये सिर्फ वे आंकड़े हैं जिन्हें यूएन ने सत्यापित किया है। इसको लेकर जो असल संख्या है वो इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
12 देशों के इतने संगठनों को किया गया ब्लैकलिस्ट
रिपोर्ट में 12 देशों के 63 सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जिन पर दुष्कर्म और अन्य यौन हिंसा के आरोप हैं। इनमें हमास भी शामिल है, जिसके सात अक्तूबर 2023 को किए गए हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ था। साथ ही इस सूची में 70% से अधिक संगठनों के नाम पिछले पांच वर्षों से इस सूची में बने हुए हैं, लेकिन उन्होंने हिंसा रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
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यूएन ने पहली बार इस्राइल-रूस को चेताया
रिपोर्ट जारी करते हुए पहली बार संयुक्त राष्ट्र ने इस्राइल और रूस को चेताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्राइल और रूस के खिलाफ विश्वसनीय यौन हिंसा की जानकारी मिली है और यदि वे इसे रोकने के लिए कदम नहीं उठाते, तो 2025 की ब्लैकलिस्ट में डाले जा सकते हैं। इसके तहत इस्राइल पर आरोप है कि उसने फलस्तीनियों के साथ, खासकर जेलों में, यौन शोषण किया। वहीं रूस पर आरोप है कि उसके सैनिकों ने यूक्रेनी कैदियों के साथ दुर्व्यवहार किया। हालांकि इस्राइल ने आरोपों को पक्षपाती बताया, जबकि रूस ने कोई टिप्पणी नहीं की।
सबसे अधिक पीड़ित महिलाएं और लड़कियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि यौन हिंसा में सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं और लड़कियां होती हैं। पीड़ितों की उम्र 1 साल से लेकर 75 साल तक की थी। कई मामलों में रेप के बाद पीड़ितों की हत्या भी कर दी गई, खासकर कांगो और म्यांमार में। कुछ जगहों पर हथियारबंद समूहों ने महिलाओं के साथ बलात्कार को इलाके और संसाधनों पर कब्जा करने की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया।
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देशों के अनुसार समझिए क्या है स्थिति?
अब बात अगर देशों के अनुसार हिंसा की स्थिति की करें तो रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य अफ्रीकी गणराज्य में 215 महिलाएं, 191 लड़कियां और 7 पुरुष यौन हिंसा का शिकार हुए। कांगो में लगभग 800 मामले दर्ज हुए। एम23 विद्रोही समूह से जुड़े मामले 2022 के 43 से बढ़कर 2024 में 152 हो गए। वहीं सूडान में 221 दुष्कर्म के मामले दर्ज, जिनमें 147 लड़कियां और 74 लड़के शामिल थे। हालांकि इनसब में चौंकाने वाली बात यह है कि 16% पीड़ित पांच साल से कम उम्र के थे इनमें चार एक साल के बच्चे भी थे।