फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   UN News UNICEF claims use of explosive weapons in populated areas harming humans advocates for EWIPA

UNICEF: यूनिसेफ की रिपोर्ट- रिहायशी इलाकों में विस्फोटक हथियारों का हो रहा इस्तेमाल, हजारों बच्चे हताहत

Tue, 23 Apr 2024 01:41 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 23 Apr 2024 01:41 PM IST
सार

वर्ष 2018 से 2022 के दौरान, विश्व भर में 24 से अधिक हिंसक टकराव से ग्रस्त इलाक़ों में, कुल साढ़े 47 हजार बच्चे हताहत हुए, जिनमें 49.8 प्रतिशत मामलों के लिए विस्फोटक हथियारों का प्रयोग जिम्मेदार था।

विज्ञापन
UN News UNICEF claims use of explosive weapons in populated areas harming humans advocates for EWIPA
गाजा के खान यूनिस में एक विस्फोटक की जांच करती यूएन की टीम। - फोटो : UNOCHA/Themba Linden

विस्तार

यूनीसेफ ने आगाह किया है कि जैसे-जैसे शहरी इलाकों में लड़ाई के मामले बढ़ रहे हैं, खुले रणक्षेत्रों के लिए विकसित किए हथियारों का इस्तेमाल अब शहरों, नगरों व गांवों में बढ़ रहा है।  आबादी वाले इलाकों में भारी हथियारों व विस्फोटकों के इस्तेमाल का, आम नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों पर भयावह असर होता है। 
विज्ञापन


वर्ष 2018 से 2022 के दौरान, विश्व भर में 24 से अधिक हिंसक टकराव से ग्रस्त इलाक़ों में, कुल साढ़े 47 हजार बच्चे हताहत हुए, जिनमें 49.8 प्रतिशत मामलों के लिए विस्फोटक हथियारों का प्रयोग जिम्मेदार था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा सत्यापित इन मामलों में से अधिकांश मामले घनी आबादी वाले इलाकों में दर्ज किए गए।
विज्ञापन


यूनीसेफ के उप कार्यकारी निदेशक टैड चायबॉन ने स्पष्ट किया कि इन साक्ष्यों को नकारा नहीं जा सकता है। “जब रिहायशी इलाकों में विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है, तो बच्चों को गहरी पीड़ा का सामना करना पड़ता है, ना केवल शारीरिक रूप से बल्कि उनके जीवन के हर पहलू में।”
विज्ञापन
विज्ञापन


“हजारों युवा जिंदगियां या तो अचानक ख़त्म हो जाती हैं या फिर हर साल, हमेशा के लिए बदल जाती हैं।” यूनीसेफ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बच्चों को इससे शारीरिक चोट व अन्य ज़ख्म तो पहुंचते ही हैं, मगर उन्हें मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक व सामाजिक प्रभावों से भी जूझना पड़ता है, जो कि जीवन-पर्यंत, पीड़ादाई अनुभव के रूप में जारी रह सकते हैं।

विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल के सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरणीय असर भी हैं, जिससे बच्चों के लिए स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, स्वच्छ जल व अन्य अति आवश्यक सेवाओं की सुलभता प्रभावित होती है। बुनियादी ढांचे के विध्वंस से बच्चों के विकास और सामुदायिक स्वास्थ्य पर भी दीर्घकालिक दुष्परिणाम हो सकते हैं।

रोकथाम जरूरी है
यूनीसेफ, हिंसक टकरावों से जूझ रहे इलाकों में जमीनी स्तर पर प्रयासों में जुटा है, ताकि ऐसे हथियारों से होने वाले असर को कम किया जा सके, जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाना संभव हो और जोखिम का सामना कर रहे बच्चों को सहारा दिया जा सके। मगर, यूएन एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा कि रोकथाम की सख्त आवश्यकता है, जिसके लिए एक मजबूत, सतत अन्तरराष्ट्रीय कार्रवाई की दरकार है।


भावी पीढ़ियों की रक्षा
नवंबर 2022 में रिहायशी इलाकों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल पर एक राजनीतिक घोषणापत्र पारित किया गया, जिसके बाद पहली बार इस सप्ताह नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में इस विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है। 85 से अधिक देशों ने इस घोषणापत्र को अपना समर्थन दिया है, जो कि आबादी वाले इलाकों में सैन्य अभियान के दौरान नागरिकों को हताहत होने से से बचाने के लिए कदम उठाने पर केंद्रित है।

(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed