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UN: अरुणाचल में भारत-चीन के सैनिकों की झड़प पर संयुक्त राष्ट्र चिंतित, तनाव कम करने पर कही ये बात
Wed, 14 Dec 2022 07:48 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 14 Dec 2022 07:48 AM IST
सार
मीडिया में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की खबरों के आने के बाद भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी हो चुके हैं।
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यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
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विस्तार
भारत और चीन के सैनिकों के बीच अरुणाचल के तवांग स्थिति वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुई मुठभेड़ का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। अब संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने की बात कही है।
यूएन प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजैरिक से जब भारत और चीन के बीच टकराव की खबरों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "हमें मीडिया में कुछ रिपोर्ट्स मिली हैं। हम दोनों देशों से तनाव को कम करने के लिए कहेंगे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि क्षेत्र में तनाव न बढ़े।"
मीडिया में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की खबरों के आने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “भारतीय सेना ने बहादुरी से पीएलए को हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण करने से रोका और उसे अपनी चौकियों पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। झड़प में दोनों पक्षों के कुछ सैनिक घायल हो गए।” रक्षा मंत्री ने बताया कि भारतीय सेना ने नौ दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति को एकतरफा तरीके बदलने की चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कोशिश को विफल कर दिया। राजनाथ ने बताया था कि मुठभेड़ में किसी जवान की जान नहीं गई और कोई गंभीर रूप से घायल भी नहीं हुआ।
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दूसरी तरफ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बीजिंग में एक पत्रकार वार्ता में कहा था कि दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य जरियों से सीमा से जुड़े मुद्दों पर सुचारू सपंर्क बनाए रखा है। उन्होंने कहा था कि भारत से लगी सीमा पर फिलहाल हालात स्थिर हैं। गौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुए खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच यह पहली बड़ी झड़प रही।
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यूएन प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजैरिक से जब भारत और चीन के बीच टकराव की खबरों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "हमें मीडिया में कुछ रिपोर्ट्स मिली हैं। हम दोनों देशों से तनाव को कम करने के लिए कहेंगे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि क्षेत्र में तनाव न बढ़े।"
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मीडिया में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की खबरों के आने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “भारतीय सेना ने बहादुरी से पीएलए को हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण करने से रोका और उसे अपनी चौकियों पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। झड़प में दोनों पक्षों के कुछ सैनिक घायल हो गए।” रक्षा मंत्री ने बताया कि भारतीय सेना ने नौ दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति को एकतरफा तरीके बदलने की चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कोशिश को विफल कर दिया। राजनाथ ने बताया था कि मुठभेड़ में किसी जवान की जान नहीं गई और कोई गंभीर रूप से घायल भी नहीं हुआ।
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दूसरी तरफ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बीजिंग में एक पत्रकार वार्ता में कहा था कि दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य जरियों से सीमा से जुड़े मुद्दों पर सुचारू सपंर्क बनाए रखा है। उन्होंने कहा था कि भारत से लगी सीमा पर फिलहाल हालात स्थिर हैं। गौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुए खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच यह पहली बड़ी झड़प रही।