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सुरक्षा परिषद ने कहा, तुरंत युद्ध रोकें आर्मेनिया और अजरबैजान
Thu, 01 Oct 2020 12:37 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 01 Oct 2020 12:37 AM IST
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आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच लड़ाई
- फोटो : PTI
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी हिंसक युद्ध को तत्काल प्रभाव से रोकने और बिना किसी पूर्व शर्त के दोबारा वार्ता शुरू करने को कहा है। संयुक्त राष्ट्र के इस सबसे शक्तिशाली निकाय ने बल प्रयोग की जोरदार निंदा की और महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने कहा कि दोनों देश बिना किसी देरी के तनाव दूर कर वार्ता की टेबल पर बैठें।
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दोनों पड़ोसियों ने नागोरनो और काराबाख क्षेत्र को लेकर जबरदस्त संघर्ष में झौंक दिया है। सुरक्षा परिषद ने यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन की केंद्रीय भूमिका के लिए पूरा समर्थन जताया। यह संगठन शांतिवार्ता में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र में नाइजर के राजदूत अबदोउ अबारी ने कहा कि दोनों देश तुरंत शांति प्रक्रिया में शामिल हों। इससे पहले नागोरनो-काराबख क्षेत्र में आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शुरू हुए हिंसक संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में बैठक भी हुई।
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यूएनएससी के सदस्यों ने नागोरनो-काराबाख क्षेत्र में दोनों देशों की तरफ से बड़े पैमाने पर कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने भी युद्धविराम लागू करने का समर्थन किया।
दोनों देशों में मॉर्शल लॉ
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशनयिन ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि अजरबैजान ने अर्तसख पर मिसाइल से हमला करके रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचाया है। आर्मेनिया ने जवाबी कारवाई करते हुए अजरबैजान के 2 हेलीकॉप्टर, 3 यूएवी और 2 टैंकों को मार गिराया है।
इसके बाद आर्मेनियाई प्रधानमंत्री ने देश में मॉर्शल लॉ लागू कर दिया है। अजरबैजान ने भी देश में आंशिक मॉर्शल लॉ लागू कर दिया है।
संघर्ष में हजारों की मौत-घायल होने का दावा
अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को दावा किया कि नागोरनो-काराबाख में जारी संघर्ष में 2,300 से अधिक आर्मेनियाई सैनिक मारे गए और घायल हो गए हैं।
दावे में कहा गया है कि 27 सितंबर से अब तक करीब 130 टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन, 200 से ज्यादा तोपखाने, मिसाइल और मोर्टार लांचर को कार्रवाई में लाए गए हैं।
विवाद का कारण
आर्मेनिया और अजरबैजान दोनों ही देश पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा थे। लेकिन सोवियत संघ के टूटने के बाद दोनों देश स्वतंत्र हो गए। अलग होने के बाद दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबख इलाके को लेकर विवाद हो गया। दोनों देश इस पर अपना अधिकार जताते हैं। वैश्विक कानूनों के तहत इस 4,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अजरबैजान का बताया जा चुका है, लेकिन यहां आर्मेनियाई मूल की आबादी अधिक है।