रूस से नाराजगी: क्राइमिया मसले पर आधा-अधूरा ही चला यूक्रेन का ताजा दांव
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीर जेलेन्स्की ने सोमवार को क्राइमिया प्लेटफॉर्म नाम से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उनमें यूरोपियन यूनियन के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल भी हैं...
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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर क्राइमिया मुद्दे को चर्चा के केंद्र में लाने का यूक्रेन सरकार का दांव ज्यादा कारगर नहीं रहा। ये सम्मेलन सोमवार को यहां हुआ। इसमें क्राइमिया पर से कब्जा हटाने के लिए रूस को मजबूर करने में पश्चिमी देशों की नाकामी की चर्चा हुई। रूस ने यूक्रेन के साथ तनाव बढ़ने पर 2014 में क्राइमिया पर कब्जा कर लिया था। इसके विरोध में पश्चिमी देशों ने रूस के कई तरह के प्रतिबंध लगाए। लेकिन उससे रूस के रुख पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीर जेलेन्स्की ने सोमवार को क्राइमिया प्लेटफॉर्म नाम से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उनमें यूरोपियन यूनियन के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल भी हैं। मिशेल ने दो टूक कहा कि ईयू (यूरोपियन यूनियन) क्राइमिया पर रूस के कब्जे को कभी मान्यता नहीं देगा। लेकिन इस सम्मेलन में जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भाग नहीं लिया। बताया जाता है कि ये दोनों नेता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नाराज नहीं करना चाहते थे। विश्लेषकों ने कहा कि यूरोप के इन दो सबसे मजबूत देशों के न आने से सम्मेलन के आयोजन का मकसद पूरा नहीं हो सका।
मैर्केल अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते मास्को की यात्रा की थी। उनके मुताबिक उनकी यात्रा का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अगले पांच साल तक रूस से जर्मनी तक गैस की सप्लाई यूक्रेन से जाने वाले मार्ग के जरिए ही होगी। रूस से जर्मनी तक नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन लगभग तैयार हो गई है। आशंका है कि इस पाइपलाइन से गैस की सप्लाई शुरू करने के बाद रूस यूक्रेन के मार्ग को बंद कर देगा। इससे यूक्रेन को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
क्राइमिया प्लेटफॉर्म में जर्मनी की नुमाइंदगी वहां के ऊर्जा मंत्री पीटर अल्तमियर ने की। अमेरिका की ऊर्जा मंत्री जेनिफर ग्रैनहोल्म ने भी इसे संबोधित किया। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि क्राइमिया पर रूस के कब्जे की अब पश्चिमी देशों में शायद ही चर्चा होती है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन यह स्पष्ट कर चुके हैं कि क्राइमिया के बारे में वे कोई बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। क्राइमिया के निवासियों को रूसी पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। क्राइमिया को रूस में मिलाने के पहले पुतिन ने वहां जनमत संग्रह करवाया था, जिसमें वहां निवासियों के भारी बहुमत ने रूस के साथ रहने की राय जताई थी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक सोमवार के सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधियों ने क्राइमिया पर कब्जा करने के लिए रूस की कड़ी निंदा की। लेकिन स्लोवेनिया जैसे देशों का रुख अस्पष्ट रहा। स्लोवेनिया के राष्ट्रपति बोरूट पाहोर ने सिर्फ इतना कहा कि उनके देश का रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अच्छा संबंध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस और यूक्रेन आपसी बातचीत से क्राइमिया समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि सोमवार को हुए सम्मेलन में सभी भाषण अंग्रेजी या यूक्रेनियन या तातार भाषा में दिए गए। एक भी भाषण रूसी भाषा में नहीं हुआ, जो क्राइमिया के लोगों की भाषा है। इसे इस बात संकेत माना गया कि जेलेन्स्की इस सम्मेलन के जरिए भले क्राइमिया मसले को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में लाने में एक हद तक सफल रहे हों, लेकिन क्राइमिया की जनता के बीच समर्थन पाने में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है।