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यूक्रेन संकट: क्या माहौल का फायदा उठा कर ताइवान पर हमला बोल देगा चीन?

Thu, 24 Feb 2022 06:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 24 Feb 2022 06:28 PM IST
सार

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पिछले हफ्ते कहा था कि यूक्रेन में जो होगा, उसकी गूंज ताइवान में भी सुनाई देगी। लेकिन अमेरिकी टीकाकारों ने कहा है कि फिलहाल चीन यूक्रेन में उभरी स्थिति पर सावधानी से नजर रखे हुए है। वह इस बात का आकलन करेगा कि यूक्रेन के मामले में पश्चिमी देश कैसी प्रतिक्रिया दिखाते हैं...

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Ukraine Crisis: Will China take advantage of the situation created by the Ukraine crisis and invade Taiwan
व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग - फोटो : Agency

विस्तार

जिस समय यूक्रेन विवाद को लेकर अमेरिका और रूस के टकराव पर सारी दुनिया की निगाहें हैं, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान ताइवान पर भी अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के सूत्रों ने मीडिया ब्रीफिंग में इस बात की तरफ ध्यान खींचा है कि चीन ने ताइवान को खुद मिलाने का लक्ष्य घोषित कर रखा है। ऐसा करने में ताकत का इस्तेमाल करने की संभावना से उसने कभी इनकार नहीं किया है।

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इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयानों से लगता है कि उन्होंने भी यूक्रेन को रूस में मिला लेने का लक्ष्य तय कर लिया है। इस हफ्ते दिए एक महत्त्वपूर्ण भाषण में उन्होंने रूस और यूक्रेन के लोगों को ‘समान जन समुदाय’ का हिस्सा बताया। हालांकि विश्लेषकों की राय है कि पुतिन के लिए यूक्रेन को रूस का हिस्सा बना लेना आसान नहीं है। चीन ताइवान के मामले में ऐसा कदम उठाने की स्थिति में है। फिर भी ज्यादातर अमेरिकी विशेषज्ञों की राय है कि चीन ऐसा जोखिम नहीं उठाएगा।

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पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया का इंतजार

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पिछले हफ्ते कहा था कि यूक्रेन में जो होगा, उसकी गूंज ताइवान में भी सुनाई देगी। लेकिन अमेरिकी टीकाकारों ने कहा है कि फिलहाल चीन यूक्रेन में उभरी स्थिति पर सावधानी से नजर रखे हुए है। वह इस बात का आकलन करेगा कि यूक्रेन के मामले में पश्चिमी देश कैसी प्रतिक्रिया दिखाते हैं। फिलहाल, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

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हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के फेयरबैंक सेंटर फॉर चाइनीज स्टडीज में रिसर्च फेलॉ लेव नैचमान ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘यूक्रेन के मामले में अमेरिका चाहे जैसी प्रतिक्रिया दिखाए, ताइवान के मामले में वह वैसी नहीं होगी। ताइवान के साथ अमेरिका ने दशकों से अलग ढंग से संबंध विकसित किया है। उसके मामले में अमेरिकी जिम्मेदारी यूक्रेन के प्रति दायित्व से अलग है।’

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महाधिवेशन पर नजर

कुछ अन्य विशेषज्ञों ने भी इस संभावना का खंडन किया है कि यूक्रेन पर हमले के बाद चीन भी ताइवान को खुद में मिला लेने के लिए प्रोत्साहित होगा। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में स्थित एसओएएस चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक स्टीव त्सांग ने कहा- ‘मुझे नहीं लगता कि चीन इस साल ताइवान के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल करेगा। शी जिनपिंग असल में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते।’ त्सांग ने कहा कि इस समय शी की नजर इस साल अक्तूबर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के होने वाले महाधिवेशन पर है, जिसमें वे अपने लिए तीसरा कार्यकाल पाने की कोशिश करेंगे। अगर ताइवान अभियान नाकाम रहा, तो उनका ये मकसद पूरा नहीं होगा। इसलिए वे इस वर्ष ऐसा कोई जोखिम नहीं उठाएंगे।



न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक काउंसिल फॉर फॉरेन अफेयर्स में रिसर्च फेलॉ डेविड सैक्स ने सीएनएन से कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्तों का गतिशास्त्र अलग है। इसलिए यूक्रेन और ताइवान की तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा- ‘अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया, तो उससे उस क्षेत्र में उसका वर्चस्व कायम हो जाएगा। इसलिए वहां अमेरिका का दांव अलग प्रकार का है। चीनी नेता समझते हैं कि ताइवान के मामले में अमेरिका की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग प्रकार की होगी।’

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