Ukraine Crisis: रूस पर लगाने के लिए कौन-से प्रतिबंध बाकी? यूरोपीय देश अब तक आठ किश्तों कर चुके सख्ती
ईयू के अंदर यूक्रेन के सबसे मुखर समर्थकों की मांग है कि प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाया जाए। लिथुआनिया के राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते कहा था- 'हमारे प्रतिबंधों का असर हो रहा है। लेकिन इनकी वजह से हमारी उम्मीद के अनुरूप नतीजे सामने नहीं आए हैं।'
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यूक्रेन में विशेष सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद से यूरोपीय देश रूस पर कुल आठ किस्तों में प्रतिबंध लगा चुके हैं। इन्हें अब तक दुनिया में किसी देश पर लगाए गए सबसे सख्त प्रतिबंध माना गया है। रूस से यूरोपियन यूनियन (ईयू) में कोयले का आयात पूरी तरह ठहर चुका है, जबकि जल्द ही वहां होने वाला कच्चे तेल का 90 प्रतिशत आयात भी रुक जाएगा। उधर, ईयू ने हजारों वस्तुओं का रूस को निर्यात रोक दिया है। इनमें हाईटेक सैनिक उपकरण और सेमीकंडक्टर से लेकर हैंड बैग और वस्त्र तक शामिल हैं। रूस के 1,239 व्यक्तियों और 116 कंपनियों पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाते हुए ईयू ने अपने यहां मौजूद उनकी संपत्तियां जब्त कर ली हैं।
इसके बावजूद अब ईयू से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। जबकि ईयू के अधिकारी मानते हैं कि अब नए प्रतिबंधों की गुंजाइश बहुत कम रह गई है। ईयू के एक अधिकारी ने सोमवार को लंदन के अखबार द गार्जियन से कहा- 'ईयू के सदस्य देश नए प्रतिबंधों की तैयारी में हैं, लेकिन हमें इसके दायरे की तलाश करनी होगी। इतने अधिक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, अब आगे इसकी गुंजाइश सीमित ही है।'
ईयू के अंदर यूक्रेन के सबसे मुखर समर्थकों की मांग है कि प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाया जाए। लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितनास नौसेडा ने पिछले हफ्ते कहा था- 'हमारे प्रतिबंधों का असर हो रहा है। लेकिन इनकी वजह से हमारी उम्मीद के अनुरूप नतीजे सामने नहीं आए हैं। मेरी राय में प्रतिबंधों को और सख्त बनाने की अभी काफी संभावना है।'
बाल्टिक देश और पोलैंड ने अतिरिक्त प्रतिबंधों की लंबी सूची बनाई है। इनमें लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलएनजी) के आयात पर रोक से लेकर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रूस से सहयोग रोकने की तक की बात शामिल है। असैनिक उपयोग वाले ड्रोन और स्मार्ट फोन के निर्यात पर रोक लगाने की मांग भी उन्होंने की है। वाइन रेफ्रीजरेटर और कुछ धातुओं का आयात-निर्यात रोकने का सुझाव भी दिया गया है। डेनमार्क, स्वीडन और फिनलैंड भी मोटे तौर पर इन सुझावों का समर्थन कर रहे हैं।
लेकिन जर्मनी अब प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर उत्सुक नहीं है। एक जर्मन राजनयिक ने द गार्जियन से कहा- 'जिन प्रतिबंधों का सुझाव दिया गया है, उनमें से कुछ ऐसे हैं, जिनसे हमारी अर्थव्यवस्था को अधिक नुकसान होगा।' इस बीच, ईयू ने अपना ध्यान रूस के साथ सहयोग कर रहे देशों पर केंद्रित कर रखा है। बीते हफ्ते उसने ईरान के तीन कमांडरों और एक कंपनी पर पाबंदी लगा दी। यही कंपनी कमिकाजे ड्रोन बनाती है, जिनका इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन पर हमलों में किया है।
ईयू में सबसे ज्यादा मतभेद एलएनजी गैस का आयात रोकने के मुद्दे पर उठा है। यूरोपीय देश पहले से ही ऊर्जा संकट झेल रहे हैं। आम समझ है कि अगर एलएनजी आयात रोका गया, तो यह संकट और बढ़ेगा। ईयू के एक राजनयिक ने कहा है कि यूरोप में उपभोक्ताओं पर ऊर्जा बिल का बोझ लगातार बढ़ रहा है, इसलिए अब प्रतिबंधों के कई कट्टर समर्थक भी इस संकट को और बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसीलिए इस मुद्दे पर प्रतिबंध समर्थकों और विरोधियों के बीच सहमति बनाना कठिन बना हुआ है।