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यूक्रेन संकट: इस तरह रूसी खेमे में आए डोनेत्स्क और लुहांस्क, पुतिन ने किया स्वतंत्र गणराज्य घोषित, बढ़ा जंग का खतरा
Tue, 22 Feb 2022 07:58 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 22 Feb 2022 07:58 AM IST
सार
ये दोनों शहर रूस से लगे पूर्वी यूक्रेन के डोनबास प्रांत का हिस्सा हैं। पिछले आठ सालों से इन शहरों के रूस समर्थित अलगाववादियों का यूक्रेन सरकार से टकराव चल रहा था। माना जा रहा है कि यदि पश्चिमी देशों ने सैन्य कार्रवाई की तो इलाके में बड़ी जंग छिड़ सकती है।
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रूस ने डोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र देश घोषित किया
- फोटो : amar ujala
विस्तार
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के दो शहरों- डोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र रिपब्लिक घोषित कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों व नाटो को खुली चुनौती दे दी है। रूस-यूक्रेन सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका व नाटो के कदम पर सब की नजरें हैं। जंग का खतरा और बढ़ गया है। ऐसे में जानते हैं कि आखिर यूक्रेन के ये दोनों शहर रूसी खेमे में कैसे आए?
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ये दोनों शहर रूस से लगे पूर्वी यूक्रेन के डोनबास प्रांत का हिस्सा हैं। पिछले आठ सालों से इन शहरों के रूस समर्थित अलगाववादियों का यूक्रेन सरकार से टकराव चल रहा था। रूस इस टकराव में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार करता रहा है। रूस ने अपनी चाल चल दी है और माना जा रहा है कि यदि पश्चिमी देशों ने सैन्य कार्रवाई की तो इलाके में बड़ी जंग छिड़ सकती है। रूस ने पहले ही इलाके में 1.50 लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं। बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान व हथियार भी मैदान में आ चुके हैं। रूस ने जंग की आशंका से साफ इनकार किया है, लेकिन कहा है कि यदि इन शहरों में सुरक्षा की जरूरत पड़ी तो वह अपनी सेना भेजेगा।
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रूसी संसद के निचले सदन डयूमा ने राष्ट्रपति पुतिन को इन दोनों क्षेत्रों को आजाद क्षेत्र के रूप में मान्यता देने का अधिकार पहले ही दे दिया है। यूक्रेन के इन दोनों शहरों में रशियन भाषा बोलने वालों की तादाद भी बहुत ज्यादा है। यूक्रेन के साथ ही ये पूर्व में सोवियत संघ का हिस्सा रहे हैं। नए रूसी संघ में भी इनका झुकाव रूस की तरह ज्यादा रहा है।
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70 हजार लोगों को निकाला
उधर, रूसी सुरक्षा एजेंसी फेडरल सिक्युरिटी सर्विस (FSB) ने कहा है कि डोनबास क्षेत्र में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। करीब 70 हजार लोगों को वहां से निकाल कर रूस लाया गया है। ये दोनों शहर 2014 युद्ध के बाद से रूस के और नजदीक आ गए हैं। डोनेत्स्क स्वयंभू पीपुल्स रिपब्लिक के एक पूर्व अधिकारी ने 2016 में कहा था कि रूस इन दोनों शहरों में 2016 से सरकारी कर्मचारियों को वेतन व पेंशन वितरण का काम कर रहा है। 2014 की जंग के बाद यूक्रेन ने अलगाववादियों के कब्जे वाले इलाकों की सरकारी इकाइयों के कर्मचारियों को वेतन देना बंद कर दिया था। इस कारण कई भारी उद्योगों में काम बंद हो गया था। ये उद्योग डोनबास प्रांत की आय का प्रमुख जरिया थे।
आठ लाख लोगों के पास रूसी पासपोर्ट
डोनबास प्रांत के 8 लाख से ज्यादा लोगों के पास रूसी पासपोर्ट हैं। अप्रैल 2019 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के इस प्रांत के लोगों को रूसी पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया था। इसके बाद राज्य के लोगों ने तेजी से रूसी पासपोर्ट बनवा लिए। उस वक्त योरपीय संघ ने कहा था कि यह यूक्रेन की संप्रभुता पर खतरा है। तभी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर और पाबंदियों की मांग की थी। मई 2021 में जेलेंस्की ने इस कदम को रूस के विस्तार की कोशिश बताया था।
यूक्रेन की मुद्रा रिव्निया छोड़ रूसी रूबल अपनाई
इन इलाकों की रूस से निकटता इससे भी साबित होती है कि इन दोनों अलगाववादी क्षेत्रों ने यूक्रेन की मुद्रा रिव्निया को छोड़कर रूसी रूबल को अपना लिया था। इन दोनों शहरों के स्कूलों में विद्यार्थियों को यूक्रेन का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम नहीं बल्कि रूसी पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। इतना ही नहीं 12 जून को रूस दिवस मनाया जाता है। यह दिन रूस में सोवियत संघ से स्वतंत्रता दिवस के रूप में रूप में मनाया जाता है।