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यूक्रेन संकट: रूस ने डिफॉल्ट किया है या नहीं? इसको लेकर तेज हुआ विवाद, जानें पूरा मामला

Fri, 15 Apr 2022 04:14 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मॉस्को
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मॉस्को Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 15 Apr 2022 04:14 PM IST
सार

रूस पहले से कह रहा है कि पश्चिमी देशों ने अपने बैंकों में मौजूद उसके धन को जब्त कर विदेशी कर्जदाताओं के हितों के खिलाफ कदम उठाया है। पश्चिमी देशों के कदम के कारण ऐसी कृत्रिम परिस्थिति बनाई गई है, जिससे रूस विदेशी मुद्रा में कर्ज ना चुका पाए।

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Ukraine Crisis Has Russia defaulted or not Controversy intensified about this know the whole matter Latest Update
व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

रूस ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है कि यूरोबॉन्ड चुकाने में रूस डिफॉल्टर हो गया है। यानी बॉन्ड मैच्योर होने पर उसकी राशि बॉन्डधारकों को नहीं चुकाई गई। रूस के वित्त मंत्रालय का दावा है कि उसने अपनी देनदारी को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया। लेकिन सीएनएन ने इसी हफ्ते अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रूस ने रकम अपनी मुद्रा रुबल में चुकाई, जबकि उसकी देनदारी डॉलर में थी। सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एसएंडपी का हवाला दिया।

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रूसी वित्त मंत्रालय ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सीएनएन ने जो खबर दी है, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है। रूस ने यूरोबॉन्ड संबंधी अपनी देनदारी पर डिफॉल्ट की कभी घोषणा नहीं की है। डिफॉल्ट का मतलब होता है कि कर्जदार के पास कर्ज या उस पर ब्याज चुकाने के लिए या तो पैसा नहीं है या पास में धन होने के बावजूद उसकी ऐसा करने की मंशा नहीं है। रूस के मामले में इन दोनों में कोई बात सच नहीं है। रूस के पास समय पर कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त धन है।
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रूस पहले से कह रहा है कि पश्चिमी देशों ने अपने बैंकों में मौजूद उसके धन को जब्त कर विदेशी कर्जदाताओं के हितों के खिलाफ कदम उठाया है। पश्चिमी देशों के कदम के कारण ऐसी कृत्रिम परिस्थिति बनाई गई है, जिससे रूस विदेशी मुद्रा में कर्ज ना चुका पाए। रूस के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि विदेशी कर्जदाताओं के दावों को लेकर जो स्थिति पैदा हुई है, उसका समाधान उन देशों को निकालना चाहिए, जिन्होंने गैर कानूनी ढंग से रूस के कर्ज चुकाने की राह में रुकावटें खड़ी कर दी हैं।
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रूसी अखबार इजवेस्तिया में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्जदाताओं को उनकी कर्ज राशि का समय पर भुगतान हो, इसके लिए रूस हर जरूरी प्रयास कर रहा है। उधर पश्चिमी पर्यवेक्षकों का कहना है कि रूस के इस जवाब से यह साफ हो जाता है कि वह रुबल में भुगतान को वैध ठहरा रहा है। उसकी दलीलों का मतलब है कि कर्जदाताओं को होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी वह पश्चिमी देशों के माथे पर डाल रहा है।

इस बीच रूसी मीडिया में छपी एक दूसरी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल के पहले तीन महीनों में चीन के साथ रूस का कारोबार काफी बढ़ा है। इस साल जनवरी से मार्च तक दोनों देशों का आपसी कारोबार 38.2 डॉलर का रहा। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में यह 27.8 प्रतिशत ज्यादा है। इस वर्ष की पहली तिमाही में चीन से रूस को हुए निर्यात में 25.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि चीन के लिए रूसी निर्यात में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।


विश्लेषकों के मुताबिक ये आंकड़े साफ कर देते हैं कि जब पश्चिमी देश यूक्रेन संकट के कारण रूस को अलग-थलग करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, उस समय चीन उसका सबसे बड़ा सहारा बन कर उभरा है।

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