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अमेरिका: अवैध प्रवासी को अदालत से बाहर जाने देने के आरोप में जज पर कार्रवाई; आठ साल पुराने मामले में क्या हुआ?
Fri, 11 Sep 2026 01:23 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बोस्टन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बोस्टन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:23 AM IST
सार
अमेरिका में एक जज पर अवैध प्रवासी को हिरासत से बचाने में मदद करने का आरोप लगा था। मामला आठ साल तक चला और अब अदालत ने जज को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई है। आखिर उस दिन अदालत में ऐसा क्या हुआ था? पढ़िए रिपोर्ट
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जज शेली जोसेफ
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
अमेरिका के मैसाचुसेट्स की सबसे बड़ी अदालत ने गुरुवार को जिला अदालत की जज शेली जोसेफ को सार्वजनिक रूप से कड़ी फटकार लगाई। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक प्रवासी को अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन की हिरासत से भागने में मदद की थी।
मामला क्या है?
यह मामला 2018 का है। उस समय जज शेली जोसेफ पर आरोप लगा था कि उन्होंने अप्रवासी के वकील और अदालत के एक अधिकारी के साथ मिलकर उसे भागने दिया। आरोप था कि सुनवाई के बाद उसे अदालत की इमारत के पिछले दरवाजे से बाहर निकलने दिया गया। उस पर नशीली दवाएं रखने समेत कई आरोप थे।
अदालत ने फटकार क्यों लगाई?
सर्वोच्च न्यायिक अदालत ने यह फैसला न्यायिक आचरण आयोग के सुनवाई अधिकारी की सिफारिश के बाद दिया। आयोग ने माना था कि जोसेफ के काम से गलत आचरण का आभास हुआ। उन्होंने कानून का भी पालन नहीं किया।
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जज ने क्या किया था?
अदालत के फैसले के मुताबिक, जोसेफ ने प्रवासी को रातभर राज्य की हिरासत में रखने का सुझाव दिया था। उन्होंने अदालत के लिपिक को सुनवाई की आवाज रिकॉर्ड करने वाली व्यवस्था बंद करने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने कहा कि इन कामों से गलत आचरण का आभास हुआ और यह उनके न्यायिक कर्तव्यों के खिलाफ था।
जज के वकील ने क्या दलील दी?
जोसेफ की वकील एलिजाबेथ मुलवे ने पिछले साल आयोग की सुनवाई में कहा था कि समय के साथ इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। लोगों को लगने लगा कि उनकी मुवक्किल ने 'एक अवैध अप्रवासी को दरवाजे से बाहर जाने दिया'। उनके मुताबिक, कुछ लोग जोसेफ को जेल भेजने की बात कर रहे थे। वहीं कुछ लोग उन्हें 'जनता की नायिका' बता रहे थे।
मीडिया पर क्या आरोप लगाया?
मुलवे ने कहा कि जोसेफ को मीडिया में बदनाम किया गया। लोग ऐसा दिखा रहे थे, जैसे दर्जनों लोगों ने जोसेफ को जज की कुर्सी से उठकर जाते हुए देखा हो। इसके बाद वह आरोपी को दरवाजे तक ले गईं हो। उसे गले लगाया और सुरक्षित यात्रा की शुभकामना दी।
वकील ने अब क्या कहा?
गुरुवार को मुलवे ने कहा कि जज जोसेफ के लिए ये आठ साल बहुत लंबे और मुश्किल भरे रहे हैं। उन्होंने सुनवाई अधिकारी के काम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिशों से साफ हुआ कि यह मामला शुरू से ही बेबुनियाद संघीय मुकदमा था। मुलवे के मुताबिक, इसके पीछे उस मामले में शामिल बचाव पक्ष के वकील की ही भूमिका थी।
उन्होंने कहा कि जज जोसेफ उन सभी लोगों की शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनका साथ दिया। अब वह अपने साथियों के साथ फिर काम करने के लिए तैयार हैं।
ऐसा ही मामला पहले कहां सामने आया था?
यह विस्कॉन्सिन की एक पूर्व जज के मामले जैसा है। उन्हें दिसंबर में आव्रजन अधिकारियों से एक व्यक्ति को बचाने में मदद करने के लिए गंभीर अपराध में दोषी ठहराया गया था। इस मामले ने ट्रंप प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया। यह टकराव राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति को लेकर है।
जोसेफ पर मुकदमा कब खत्म हुआ?
मैसाचुसेट्स के मामले में जोसेफ के खिलाफ न्याय में बाधा डालने के संघीय आरोप 2022 में हटा दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने खुद को उस राज्य की एजेंसी के सामने पेश करने पर सहमति दी, जो जजों के गलत आचरण की शिकायतों की जांच करती है।
जांच एजेंसी ने क्या पाया?
न्यायिक आचरण आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि जोसेफ ने जानबूझकर न्यायिक कदाचार किया। आयोग के मुताबिक, उनके काम से न्यायिक पद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। आयोग ने यह भी कहा कि उनका आचरण न्याय दिलाने की प्रक्रिया के खिलाफ था और एक न्यायिक अधिकारी के लिए उचित नहीं था।
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मामला क्या है?
यह मामला 2018 का है। उस समय जज शेली जोसेफ पर आरोप लगा था कि उन्होंने अप्रवासी के वकील और अदालत के एक अधिकारी के साथ मिलकर उसे भागने दिया। आरोप था कि सुनवाई के बाद उसे अदालत की इमारत के पिछले दरवाजे से बाहर निकलने दिया गया। उस पर नशीली दवाएं रखने समेत कई आरोप थे।
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अदालत ने फटकार क्यों लगाई?
सर्वोच्च न्यायिक अदालत ने यह फैसला न्यायिक आचरण आयोग के सुनवाई अधिकारी की सिफारिश के बाद दिया। आयोग ने माना था कि जोसेफ के काम से गलत आचरण का आभास हुआ। उन्होंने कानून का भी पालन नहीं किया।
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जज ने क्या किया था?
अदालत के फैसले के मुताबिक, जोसेफ ने प्रवासी को रातभर राज्य की हिरासत में रखने का सुझाव दिया था। उन्होंने अदालत के लिपिक को सुनवाई की आवाज रिकॉर्ड करने वाली व्यवस्था बंद करने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने कहा कि इन कामों से गलत आचरण का आभास हुआ और यह उनके न्यायिक कर्तव्यों के खिलाफ था।
जज के वकील ने क्या दलील दी?
जोसेफ की वकील एलिजाबेथ मुलवे ने पिछले साल आयोग की सुनवाई में कहा था कि समय के साथ इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। लोगों को लगने लगा कि उनकी मुवक्किल ने 'एक अवैध अप्रवासी को दरवाजे से बाहर जाने दिया'। उनके मुताबिक, कुछ लोग जोसेफ को जेल भेजने की बात कर रहे थे। वहीं कुछ लोग उन्हें 'जनता की नायिका' बता रहे थे।
मीडिया पर क्या आरोप लगाया?
मुलवे ने कहा कि जोसेफ को मीडिया में बदनाम किया गया। लोग ऐसा दिखा रहे थे, जैसे दर्जनों लोगों ने जोसेफ को जज की कुर्सी से उठकर जाते हुए देखा हो। इसके बाद वह आरोपी को दरवाजे तक ले गईं हो। उसे गले लगाया और सुरक्षित यात्रा की शुभकामना दी।
वकील ने अब क्या कहा?
गुरुवार को मुलवे ने कहा कि जज जोसेफ के लिए ये आठ साल बहुत लंबे और मुश्किल भरे रहे हैं। उन्होंने सुनवाई अधिकारी के काम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिशों से साफ हुआ कि यह मामला शुरू से ही बेबुनियाद संघीय मुकदमा था। मुलवे के मुताबिक, इसके पीछे उस मामले में शामिल बचाव पक्ष के वकील की ही भूमिका थी।
उन्होंने कहा कि जज जोसेफ उन सभी लोगों की शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनका साथ दिया। अब वह अपने साथियों के साथ फिर काम करने के लिए तैयार हैं।
ऐसा ही मामला पहले कहां सामने आया था?
यह विस्कॉन्सिन की एक पूर्व जज के मामले जैसा है। उन्हें दिसंबर में आव्रजन अधिकारियों से एक व्यक्ति को बचाने में मदद करने के लिए गंभीर अपराध में दोषी ठहराया गया था। इस मामले ने ट्रंप प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया। यह टकराव राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति को लेकर है।
जोसेफ पर मुकदमा कब खत्म हुआ?
मैसाचुसेट्स के मामले में जोसेफ के खिलाफ न्याय में बाधा डालने के संघीय आरोप 2022 में हटा दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने खुद को उस राज्य की एजेंसी के सामने पेश करने पर सहमति दी, जो जजों के गलत आचरण की शिकायतों की जांच करती है।
जांच एजेंसी ने क्या पाया?
न्यायिक आचरण आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि जोसेफ ने जानबूझकर न्यायिक कदाचार किया। आयोग के मुताबिक, उनके काम से न्यायिक पद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। आयोग ने यह भी कहा कि उनका आचरण न्याय दिलाने की प्रक्रिया के खिलाफ था और एक न्यायिक अधिकारी के लिए उचित नहीं था।