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यूक्रेनी गणराज्यों को मान्यता: चीन के लिए भी असहज स्थिति बना दी है पुतिन ने

Wed, 23 Feb 2022 05:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 23 Feb 2022 05:06 PM IST
सार

न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में रिसर्च फेलॉ डेविड सैक्स ने कहा है कि रूस के ताजा कदम से चीन के लिए ‘कठिन स्थिति’ पैदा हुई है। उन्होंने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘अंतिम पल तक चीन जोर देता रहा कि सभी पक्षों को मिंस्क समझौते का पालन करना चाहिए। जबकि व्लादिमीर पुतिन ने खुलेआम इस समझौते को फाड़ कर फेंक दिया है...

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Ukraine crisis: China blamed many complex aspects for the latest situation in Ukraine also named efforts to expand NATO
व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूक्रेन विवाद पर चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग सुर अपनाया है। उसने यूक्रेन को दो अलगाववादी गणराज्यों को अलग देश के रूप में मान्यता देने के रूस के फैसले की निंदा करने से इनकार कर दिया है। चीन ने अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया में सिर्फ इतना कहा कि सभी पक्षों को संयम का परिचय देना चाहिए, ताकि यूक्रेन में तनाव और ना बढ़े। चीन ने यूक्रेन में बने ताजा हालात के लिए ‘कई जटिल पहुलओं’ को जिम्मेदार ठहराया है। इसमें उसने नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार की कोशिशों को भी एक बताया है।

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विश्लेषकों का कहना है कि चीन ने ये रुख इसके बावजूद तय किया है कि रूस के कदम से उसके लिए भी असहज स्थिति पैदा हुई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीते शनिवार को म्युनिख कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ‘सभी देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता, और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान और उनकी सुरक्षा की जानी चाहिए।’ उनके इस बयान के दो दिन बाद ही रूस ने यूक्रेन की प्रादेशिक अखंडता के खिलाफ कदम उठा दिया।

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मिंस्क समझौते पर चीन का जोर

न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में रिसर्च फेलॉ डेविड सैक्स ने कहा है कि रूस के ताजा कदम से चीन के लिए ‘कठिन स्थिति’ पैदा हुई है। उन्होंने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘अंतिम पल तक चीन जोर देता रहा कि सभी पक्षों को मिंस्क समझौते का पालन करना चाहिए। जबकि व्लादिमीर पुतिन ने खुलेआम इस समझौते को फाड़ कर फेंक दिया है। इस तरह उन्होंने संकट का हल करने के चीनी प्रस्ताव की पूरी अनदेखी की है।’

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डेविड सैक्स ने कहा कि भले चीन ने रूस की सार्वजनिक निंदा नहीं की है, लेकिन ज्यादा संभावना इस बात की है कि वहां अंदरूनी तौर पर रूस से दीर्घकालिक संबंध बनाने को लेकर तीखी बहस चल रही हो। उन्होंने कहा- ‘चीन रूस को जितना अधिक गले लगाएगा, अमेरिका और यूरोप का उसे उतना ही अधिक दबाव झेलना पड़ेगा। जबकि उसकी कोशिश ऐसे दबाव से बचने की है।’

नाटो को लेकर चीन का रूस को समर्थऩ

चीन और रूस दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल देने के पश्चिमी देशों के रवैये का मिल कर विरोध करते रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उन्होंने साझा रुख अपनाया है। यही बात चार फरवरी को पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में हुई वार्ता के बाद जारी साझा बयान में भी देखने को मिली। उसमें चीन ने नाटो का और विस्तार ना करने की रूस का मांग का समर्थन किया।

शंघाई स्थित ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी के रशियन स्टडीज सेंटर में सीनियर फेलॉ यू बिन के मुताबिक नाटो की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को लेकर चीन चिंतित है। उन्होंने कहा- ‘इसलिए रूस और चीन के बीच अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की यूरोप और एशिया में बढ़ रही सक्रियता को लेकर एकराय बन गई है।’



लेकिन विश्लेषकों ने इसे अहम माना है कि ऐसी सहमति के बावजूद चीन ने दोनेत्स और लुहांस्क गणराज्यों को मान्यता देने के सवाल रूस का समर्थन नहीं किया है। बल्कि उसने तटस्थ रुख अपनाया है। यह बीजिंग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कदम से पैदा हुई असहज स्थिति का संकेत है।

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