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UK Warm Banks: आर्थिक बदहाली में ब्रिटेन के हजारों लोग निर्भर हो गए हैं ‘वॉर्म बैंक’ पर

Mon, 26 Dec 2022 06:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 26 Dec 2022 06:26 PM IST
सार

UK Warm Banks: वॉर्म बैंक धनी लोगों या कारोबारियों से मिले चंदे के जरिए चलाए जा रहे हैं। कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट्स ने भी इसके लिए अनुदान दिए हैं। महंगाई के इस संकट को कॉस्ट ऑफ लिविंग क्राइसिस के नाम से जाना गया है। ब्रिटिश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इस संकट की शुरुआत 2021 में ही हो गई थी...

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UK Warm Banks: Thousands of Britishers become dependent on Warm Banks in economic crisis
britain warm bank - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ब्रिटेन (UK Warm Banks) में ऊर्जा संकट और आर्थिक बदहाली का आलम ऐसा है कि देश में ‘वॉर्म बैंक’ का कॉन्सेप्ट लोकप्रिय हो गया है। इन सर्दियों में हजारों लोग ऐसे वॉर्म बैंकों पर निर्भर हैं। बहुत से वॉर्म बैंक स्वयंसेवी संस्थाएं चला रही हैं, जहां लोग कंपकंपाती सर्दी से राहत पाने के लिए जा रहे हैं।

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अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे ब्रिटेन में हजारों वॉर्म बैंक खोले गए हैं। ये वैसे घर हैं, जिन्हें गर्म रखने का इंतजाम है। यहां वे लोग आ रहे हैं, जिन्हें प्राकृतिक गैस की बढ़ी महंगाई के कारण अपने घरों को गर्म रखने के सिस्टम को बंद करना पड़ा है। देश में महंगाई की दर 40 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। इस कारण लोगों के लिए अपनी रोजमर्रा की चीजों को खरीदना भी मुश्किल हो गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों को राहत देने के लिए तीन हजार से ज्यादा संस्थाओं ने वॉर्म वेलकम कैंपेन शुरू किया है, जिसके तहत हजारों की संख्या में वॉर्म बैंक खोले गए हैं।

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एक वॉर्म बैंक के पास सामाजिक कार्यकर्ता शेरलॉट ने सीएनएन से कहा- ‘अनगिनत लोग जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जबकि अभी मौजूदा संकट और बढ़ने वाला है। हमने वॉर्म बैंक उन लोगों के लिए शुरू किए हैं, जिनके पास सिर्फ इतना पैसा है कि वे या तो उसे खाने पर खर्च कर सकते हैं या फिर घर को गर्म रखने पर।’

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वॉर्म बैंक धनी लोगों या कारोबारियों से मिले चंदे के जरिए चलाए जा रहे हैं। कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट्स ने भी इसके लिए अनुदान दिए हैं। महंगाई के इस संकट को कॉस्ट ऑफ लिविंग क्राइसिस के नाम से जाना गया है। ब्रिटिश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इस संकट की शुरुआत 2021 में ही हो गई थी। अक्तूबर 2021 से अक्तूबर 2022 तक ब्रिटेन में घरेलू गैस और बिजली की कीमत में क्रमशः 129 फीसदी और 66 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। औसत ऊर्जा बिल 96 फीसदी बढ़ा है।

पूर्वी इंग्लैंड में स्थित नॉर्विच में वॉर्म बैंक चला रही संस्था फ्यूचर प्रोजेक्ट्स में एडल्ट सर्विट मैनेजर ग्रेस रिचर्डसन ने बताया कि उनकी संस्था ने गर्मियों में ही इस पहल की तैयारी शुरू कर दी थी। वह ऐसे इलाकों में ऐसे केंद्र चला रही है, जो पहले से गरीबी का शिकार रहे है। उन्होंने कहा- ‘इस सर्दी में है लोगों को ऐसी जगह उपलब्ध करवा रहे हैं, जिहां आकर वे रह सकें और अपना पैसा बचा सकें। हमारे यहां ऐसे लोग भी आए हैं, जो चौबीसों घंटे यहीं रहते हैं। ये लोग अपना गुजारा चलाने में अक्षम हो गए हैं।’

इस समय पूरे यूरोप को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इसकी शुरुआत 2021 में ही हो गई थी, लेकिन इस वर्ष यूक्रेन युद्ध के बाद यह तेजी से गहराया। ब्रिटेन में राजनीतिक अस्थिरता और सरकारों की अस्थिर नीतियों के कारण यह संकट अत्यधिक गंभीर रूप ले चुका है। ब्रिटिश सरकार ने गरीब परिवारों के लिए 400 पाउंड की ऊर्जा सहायता योजना का एलान किया है। लेकिन चौतरफा महंगाई के कारण इससे ज्यादा राहत नहीं मिली है। इसीलिए हजारों की संख्या में लोग वॉर्म बैंकों पर निर्भर हो गए हैं।

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