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Hindi News ›   World ›   UK PM Sunak's mother-in-law said My daughter made her husband a Prime Minister

Sudha Murty: ‘मेरी बेटी ने बनाया प्रधानमंत्री’, दामाद सुनक के PM बनने को लेकर सुधा मूर्ति ने कही बड़ी बात

Fri, 28 Apr 2023 10:39 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 28 Apr 2023 10:39 AM IST
सार

सुधा मूर्ति ने कहा कि मेरे परिवार में लंबे समय से प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखने की परंपरा रही है। सुनक शुरुआत से ही इंग्लैंड में रह रहे हैं, लेकिन वे बहुत धार्मिक हैं। वह भी मूर्ति परिवार की परंपरा का ध्यान रख रहे हैं।

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UK PM Sunak's mother-in-law said My daughter made her husband a Prime Minister
सुधा मूर्ति ने पीएम सुनक पर दिया बड़ा बयान। - फोटो : social media

विस्तार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। अब एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बताया गया है कि उनके पीएम बनने के पीछे कौन हैं। असल में, वीडियो ब्रिटिश प्रधानमंत्री की सास और दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति का है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि उनकी बेटी की वजह से ऋषि सुनक ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने हैं।

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इंस्टाग्राम पर वायरल वीडियो में सुधा ने कहा कि मैंने अपने पति को बिजनेसमैन बनाया। वहीं मेरी बेटी अक्षता ने अपने पति को ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनाया। इसका कारण पत्नी की महिमा है। उन्होंने कहा कि देखिए कैसे एक पत्नी पति को बदल सकती है, लेकिन मैं अपने पति को नहीं बदल सकी। मैंने अपने पति को बिजनेसमैन बनाया और मेरी बेटी ने अपने पति को प्रधानमंत्री बनाया।

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एक दूसरे का रख रहे ध्यान

सुधा ने यह भी बताया कि अक्षता और सुनक किस तरह से एक दूसरे का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि अक्षता हमेशा सुनक के खाने को लेकर चितिंत रहती है। वहीं सुनक हमारी परंपराओं को लेकर खासा ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि मूर्ति परिवार में लंबे समय से प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखने की परंपरा रही है। सुनक शुरुआत से ही इंग्लैंड में रह रहे हैं, लेकिन वे बहुत धार्मिक हैं। उन्होंने मेरी बेटी से शादी की और वह भी मूर्ति परिवार की परंपरा का ध्यान रखते हैं। वह शादी के बाद से ही गुरुवार का व्रत रख रह हैं। जबकि उनकी मां हर सोमवार का व्रत रखती है।

कॉलेज में अक्षता से मिले और प्यार हो गया

ऋषि सुनक की शुरुआती पढ़ाई इंग्लैंड के 'विनचेस्टर कॉलेज' से हुई है। उन्होंने आगे की पढ़ाई ऑक्सफोर्ड से की है। 2006 में उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री भी प्राप्त की। ऋषि सुनक की अक्षता मूर्ति से मुलाकात एमबीए की पढ़ाई के दौरान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई थी। अक्षता इंफोसिस के संस्थापक एन. नारायणमूर्ति और इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा नारायणमूर्ति की बेटी हैं। पढ़ाई के दौरान ही दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे थे। 2009 में दोनों की शादी बेंगलुरु में भारतीय रीति-रिवाज से हुई। अक्षता इंग्लैंड में अपना फैशन ब्रैंड भी चलाती हैं। आज की तारीख में वह इंग्लैंड की सबसे अमीर महिलाओं में से एक हैं। सुनक दंपती की दो बेटियां- कृष्णा और अनुष्का हैं। 
 

2014 में रखा था राजनीति में कदम

ऋषि सुनक ने 2014 में पहली बार राजनीति में कदम रखा। 2015 में उन्होंने रिचमंड से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2017 में उन्होंने एक बार फिर जीत मिली। इसके बाद 13 फरवरी 2020 को उन्हें इंग्लैंड का वित्त मंत्री बनाया गया। इसी साल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर तमाम तरह के आरोप लगे तो ऋषि सुनक ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद लगातार जॉनसन कैबिनेट के कई मंत्रियों ने इस्तीफा दिया। इसके बाद नए प्रधानमंत्री के लिए चुनाव शुरू हुए। इसमें ऋषि सुनक मजबूत दावेदार बनकर उभरे। हालांकि, उन्हें लिज ट्रस से मात मिली। छह सितंबर को ट्रस प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद उनके फैसलों की वजह देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। लगातार बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री बनने के महज छह हफ्ते बाद ही ट्रस को इस्तीफा देना पड़ा। और सुनक नए नेता चुने गए।  


सम्राट चार्ल्स के राज्याभिषेक में ब्रिटिश झंडे के साथ चलेंगे ऋषि सुनक व पत्नी अक्षता
पीएम ऋषि सुनक व पत्नी अक्षता मूर्ति किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक के दौरान ब्रिटिश झंडे के साथ चलेंगे। कार्यक्रम में ब्रिटिश घ्वजवाहक शाही एयरफोर्स के कैडेट एलियट टायसन ली उनके ठीक आगे चलेंगे।

सुनक के सामने स्थानीय चुनाव में पार्टी की साख बचाने की चुनौती
ऋषि सुनक को अगले सप्ताह स्थानीय चुनावों में अपनी पार्टी की साख बचाने की चुनौती का सामना करना है। विपक्षी लेबर पार्टी ने सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी की अस्थिरता को मुद्दा बनाया है। सुनक ने ब्रेक्जिट पर यूरोपीय संघ के साथ समझौते की बड़ी कामयाबी हासिल की, लेकिन पूर्ववर्ती नेताओं ने पार्टी की साख को जो बट्टा लगाया है, उसकी भरपाई अभी नहीं हुई है।  इंग्लैंड के दक्षिण-पश्चिम में स्विंडन शहर चुनावी सरगर्मी का केंद्र बना हुआ है। 1983 के बाद, जो भी यहां जीता, उसे ही आम चुनावों में जीत हासिल हुई है।

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