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UK: ब्रिटेन पीएम और फ्रांस के राष्ट्रपति ने अवैध प्रवासी समझौते पर जताई सहमति, यूएन जता चुका है विरोध
Fri, 10 Mar 2023 10:59 PM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 10 Mar 2023 10:59 PM IST
सार
पीएम सुनक ने कहा कि हमें इस समस्या का प्रबंधन करने की जरूरत नहीं है, हमें इसे तोड़ने की जरूरत है। इस समझौते से समुद्र तटों पर गश्त में सहायता होगी।
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Rishi Sunak
- फोटो : ANI
विस्तार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा अवैध प्रवासी बिल को लेकर की गई घोषणा के बाद इस बिल का विरोध शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी भी इस बिल का विरोध किया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया था। वहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को असुरक्षित अवैध यात्रा करने वाले प्रवासियों पर संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के लिए एक नए समझौते पर सहमति जताई। बिल में में इंग्लिश चैनल के द्वारा ब्रिटेन में छोटी नौकाओं पर आने वाले अवैध प्रवासियों पर रोक लगाई जाएगी।
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एंग्लो-फ्रेंच शिखर सम्मेलन के लिए पेरिस की यात्रा के दौरान, यूके के पीएम सनक ने घोषणा की कि नए उपायों में फ्रांसीसी सीमा पर स्थित एक नया केंद्र शामिल होगा, जो तीन वर्षों में यूके के वित्त पोषण में 480 मिलियन पाउंड और फ्रांसीसी सीमा अधिकारियों के लिए अतिरिक्त ड्रोन और निगरानी तकनीक से समर्थित होगा।
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पीएम सुनक ने कहा कि हमें इस समस्या का प्रबंधन करने की जरूरत नहीं है, हमें इसे तोड़ने की जरूरत है। इस समझौते से समुद्र तटों पर गश्त में सहायता होगी, इससे आपराधिक गिरोहों की तस्करी करने वाले लोगों को रोकने में मदद होगी। वहीं सुनक के पूर्ववर्ती, लिज ट्रस और बोरिस जॉनसन के तहत ब्रेक्सिट के बाद के तनावपूर्ण संबंधों के बाद ब्रिटेन और फ्रांस के बीच सबसे सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई।
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संयुक्त राष्ट्र ने किया विरोध
ब्रिटेन के इस प्रस्तावित बिल का संयुक्त राष्ट्र ने विरोध किया है। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों से संबंधित एजेंसी यूएनएचसीआर ने कहा है कि 'यह बिल 1951 के शरणार्थी सम्मेलन का साफ उल्लंघन है। जिसमें कहा गया है कि शरणार्थी वो हैं, जो प्रताड़ना से बचने के लिए शरण मांग रहे हैं और इसके तहत उन्हें बेहद कठिन हालात के अलावा किसी शर्त पर वापस नहीं भेजा जा सकता। एजेंसी ने कहा कि अधिकतर लोग युद्ध और प्रताड़ना के कारण अपना देश छोड़कर भागते हैं और उन्हें पासपोर्ट और वीजा नहीं मिल पाता। ऐसे में उनके लिए कोई कानूनी रास्ता नहीं बचता। अब इस आधार पर उन्हें भविष्य में भी शरण नहीं देना गलत है और यह शरणार्थी सम्मेलन में तय की गईं बातों का उल्लंघन है।'