क्या है मुस्लिम देशों के समूह ओआईसी का इतिहास, पाकिस्तान के मुकाबले कैसे भारी पड़ा भारत?
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त अरब अमीरात में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधित किया। स्वराज ने बैठक को संबोधित करते हुए आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। आतंकवाद लोगों का जीवन बर्बाद कर रहा है और क्षेत्रों को अस्थिर कर रहा है। आतंकवाद दुनिया को जोखिम में डाल रहा है और इसकी पहुंच बढ़ रही है। यह पहली बार है जब भारत इस अहम बैठक में हिस्सा ले रहा है। वहीं पाकिस्तान इसमें शामिल नहीं है।
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त अरब अमीरात में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधित किया। स्वराज ने बैठक को संबोधित करते हुए आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। आतंकवाद लोगों का जीवन बर्बाद कर रहा है और क्षेत्रों को अस्थिर कर रहा है। आतंकवाद दुनिया को जोखिम में डाल रहा है और इसकी पहुंच बढ़ रही है। यह पहली बार है जब भारत इस अहम बैठक में हिस्सा ले रहा है। वहीं पाकिस्तान इसमें शामिल नहीं है।
सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को अबू धाबी में दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के शुरुआती पूर्ण बैठक में शामिल हुईं। यह ओआईसी की 46वीं बैठक है। बैठक को संबोधित करने के लिए स्वराज को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने आमंत्रित किया।
अधिकारियों ने इस बैठक में भारत को आमंत्रित किए जाने को अरब और मुस्लिम-बहुल देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों में विदेश नीति की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
क्या है ओआईसी
इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) 57 देशों का प्रभावशाली समूह है। संयुक्त राष्ट्र के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है। ओआईसी सदस्य देशों में रहनेवाले लोगों की कुल आबादी साल 2018 मे 1.9 खरब थी।
बैठक में पहली बार क्या हुआ
यह पहली बार है जब भारत को ओआईसी बैठक में आमंत्रित किया गया है। भारत न तो इस समूह का सदस्य है और न ही पर्यवेक्षक देश। जबकि मुस्लमानों की आबादी के मामले में दुनिया में इसका तीसरी स्थान है। रूस और थाइलैंड जैसे देश जहां अल्पसंख्यक मुस्लमानों की अच्छी खासी आबादी है, ओआईसी के पर्यवेक्षक हैं।
पचास साल पहले 1969 में इंदिरा गांधी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री फखरुद्दीन अली अहमद को सऊदी अरब की सलाह पर समूह की पहली बैठक में आमंत्रित किया गया था। लेकिन पाकिस्तान की आपत्ति के बाद उनका आमंत्रण वापस ले लिया गया और प्रतिनिधिमंडल को बीच रास्ते से लौटना पड़ा था।
भारत को आमंत्रित करने का समय महत्वपूर्ण
भारत ने इस आमंत्रण का स्वागत किया और कहा कि यह भारत में रह रहे 18.5 करोड़ मुसलमानों और इस्लामिक दुनिया को भारत के योगदान का अभिनंदन है।
ओआईसी के बैठक में भारत को आमंत्रित किया जाना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका और भारत के लिए कूटनीतिक जीत है। पाकिस्तान इस मंच का इस्तेमाल कर भारत को भला बुरा कहता है और कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंधन का मुद्दा उठाता है। पाकिस्तान हमेशा से इस समूह में भारत की सदस्यता का विरोध करता रहा है। ओआईसी सामान्य तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता है और कश्मीर के मुद्दे पर इस्लामाबाद का पक्ष लेता है।
ओआईसी ने मंगलवार को हवाई हमले को "घुसपैठ और हवाई सीमा का उल्लंघन" करार देते हुए इसकी निंदा की और दोनों देशों को बातचीत के जरिए संकट का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने की अपील की, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और शांति बरकरार रहे।
पाकिस्तान ने आखिर इसी समय आपत्ति क्यों की?
सुषमा की मौजूदगी पर पाकिस्तान की आपत्ति
पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बुधवार को धमकी दी कि यदि भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शामिल हुईं तो वह ओआईसी की बैठक का बहिष्कार करेगा।
कुरैशी ने एक न्यूज चैनल से कहा कि उनकी आपत्ति आईओसी या किसी अन्य इस्लामिक देश को लेकर नहीं है। उनकी आपत्ति भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर है। यदि सुषमा बैठक में शामिल होती हें तो वह इसमें शामिल नहीं होंगे।
इसमें कामयाब नहीं हो पाने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया।
14 फरवरी को पुलवामा में हुए एक आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके 12 दिनों बाद 26 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हमला कर 325 आतंकवादी और आतंकियों के ट्रेनर का सफाया कर दिया था। जिसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना भारतीय सीमा में घुस आई।
आखिर इसी समय आपत्ति क्यों?
भारत के ओआईसी के ज्यादातर सदस्य देशों के साथ मधुर संबंध हैं। आमंत्रण देने वाले देश यूएई की आबादी का एक तिहाई हिस्सा भारतीयों का है। इसने भारत में संरचनात्मक विकास के लिए काफी निवेश किया है। इसने अगस्तावेस्टलैंड मामले में आरोपियों राजीव सक्सेना और क्रिश्चेन मिशेल को भारत के अनुरोध पर प्रत्यर्पण कर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भी भारत मदद की है।