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अमेरिका: धोखाधड़ी की जानकारी देने पर मिलेगा इनाम, ट्रंप का बड़ा एलान; क्या है योजना और कितनी मिलेगी धनराशि?

Wed, 21 Oct 2026 08:15 AM IST
अमन मौर्या पीटीआई, वाशिंगटन
पीटीआई, वाशिंगटन Published by: अमन मौर्या Updated Wed, 21 Oct 2026 08:15 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सरकारी धोखाधड़ी की जानकारी देने वालों के लिए 'व्हिसलब्लोअर' कार्यक्रम की घोषणा की है। इसके जरिए वे संघीय कार्यक्रमों और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के अपने प्रयासों को तेज कर रहे हैं।

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trump vance announce whistleblower programme against fraud
जेडी वेंस और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को 25 मिलियन डॉलर (लगभग 236.91 करोड़ भारतीय रुपये) के एक कार्यक्रम की घोषणा की। इसका उद्देश्य अमेरिकी सरकार में होने वाली संभावित धोखाधड़ी के बारे में आम लोगों को जानकारी देने (व्हिसलब्लोइंग) के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके जरिए वे संघीय कार्यक्रमों और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के अपने प्रयासों को तेज कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने बताया कि 'फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव प्रोग्राम' (डब्ल्यूएचआईपी) के तहत, यदि कोई व्यक्ति 'fraud.gov' पर ऐसी जानकारी देता है जिससे धोखाधड़ी के मामले में दोषसिद्धि होती है या कोई बड़ी संघीय कार्रवाई की जाती है, तो वह व्यक्ति 30,000 डॉलर ((28 लाख भारतीय रुपए से ज्यादा) तक की राशि पाने का हकदार होगा। इस कार्यक्रम का संचालन न्याय विभाग करेगा।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?
इस घोषणा के दौरान, ट्रंप ने कहा कि दी जाने वाली राशि, पकड़ी गई धोखाधड़ी की कुल रकम का 1 प्रतिशत कमीशन होगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में एक से अधिक लोग जानकारी देने का दावा करते हैं, तो किसे इनाम की राशि मिलेगी, इसका फैसला वे खुद करेंगे। मंगलवार को ओवल ऑफिस में वेंस और प्रशासन के अन्य अधिकारियों के साथ मौजूद ट्रम्प ने कहा, 'इन सभी फैसलों में अंतिम निर्णय मेरा होगा। यह एक बाध्यकारी फैसला (बाइंडिंग आर्बिट्रेशन) होगा।' ट्रंप ने कहा कि पत्रकार भी इस कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने सरकार में हो रही धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए एक आक्रामक अभियान शुरू किया है। इसके लिए मार्च में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था, जिसकी जिम्मेदारी वेंस को सौंपी गई है।
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आलोचकों ने क्या आरोप लगाया?
वहीं, आलोचकों ने ट्रंप और उनके परिवार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल अपने कई व्यावसायिक उपक्रमों से मुनाफा कमाने के लिए किया है। इसके जवाब में व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप जो कुछ भी करते हैं, वह केवल अमेरिकी जनता के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखकर करते हैं। वेंस (जिन्होंने टास्क फोर्स का नेतृत्व करने के अपने काम को मजेदार बताया) ने कहा कि करदाताओं का पैसा (टैक्स डॉलर) चुराया जा रहा है।


उपराष्ट्रपति ने कहा, 'राष्ट्रपति ने कहा है कि इसे रुकना चाहिए और यह रुक भी रहा है। अगर आप इसे रोकने में हमारी मदद करना चाहते हैं, तो आपको भी इनाम का हिस्सा मिलेगा।' इस कार्यक्रम के दौरान, ट्रम्प द्वारा निक शर्ली को 10,000 अमेरिकी डॉलर (नौ लाख भारतीय रुपए से ज्यादा) का चेक दिए जाने की उम्मीद थी। शर्ली एक दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर हैं, जिन्होंने पिछले साल एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें दावा किया गया था कि मिनेसोटा के सोमाली समुदाय के कुछ लोग संघीय सब्सिडी (सरकारी मदद) हासिल करने के लिए फर्जी चाइल्डकेयर सेंटर चला रहे हैं। 24 वर्षीय शर्ली के इस वीडियो ने ट्रम्प प्रशासन और रूढ़िवादी कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचा। हालांकि, निरीक्षकों का कहना था कि ये सेंटर उम्मीद के मुताबिक ही काम कर रहे थे। इसके बाद जांच-पड़ताल, तलाशी और गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। शर्ली ने कहा, 'जब आप धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हैं तो आप अमेरिका को बचाने में मदद करते हैं।' उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी से गरीब और जरूरतमंद लोगों का हक मारा जाता है।

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न्याय विभाग के अनुसार, जुलाई में फहिमा महामुद नाम की एक महिला ने 'वायर फ्रॉड' (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी) और अमेरिका के साथ धोखाधड़ी करने की साजिश रचने का अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने अपने चाइल्डकेयर सेंटर में बच्चों को खाना परोसने के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर रिइम्बर्समेंट (खर्च की भरपाई) के दावे पेश किए थे। व्हाइट हाउस का कहना है कि शर्ली के वीडियो में महामुद भी दिखाई दी थीं।
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