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कनाडा से अलग नहीं होगा अल्बर्टा?: 76 प्रतिशत लोगों ने एकजुटता पर लगाई मुहर, अलगाव का प्रस्ताव ठुकराया
Tue, 20 Oct 2026 12:23 PM IST
अमन मौर्या
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:23 PM IST
सार
कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा के मतदाताओं ने जनमत संग्रह में कनाडा से अलग होने के प्रस्ताव को भारी बहुमत से खारिज कर दिया है। करीब 76 प्रतिशत लोगों ने देश के साथ ही बने रहने का समर्थन किया है।
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अल्बर्टा में जनमत संग्रह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा के मतदाताओं ने स्वतंत्रता की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्यापार युद्ध और क्षेत्रों पर लगातार कब्जा करने की धमकियां दी जा रही हैं। यह मतदान सीधे तौर पर स्वतंत्रता के लिए कोई जनमत संग्रह नहीं था, लेकिन अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो तेल-समृद्ध अल्बर्टा कनाडा से अलग होने के लिए भविष्य में होने वाले मतदान की राह पर आगे बढ़ सकता था।
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पीएम मार्क कार्नी ने क्या कहा?
जनमत संग्रह के नतीजे के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का बयान सामने आया है। कार्नी ने कहा कि अल्बर्टा के लोगों ने राष्ट्रीय एकता और कनाडा के साथ एक साझा भविष्य को चुना है। जनमत संग्रह के शुरुआती नतीजों से पता चला है कि प्रांत ने अलग होने के लिए एक बाध्यकारी मतदान कराने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। एक्स पोस्ट में कार्नी ने कहा, '19 अक्तूबर को, अल्बर्टा के लोगों ने एक स्पष्ट फैसला लिया। उन्होंने एकता को चुना, एक साथ मिलकर निर्माण करने और एक-दूसरे का ख्याल रखने का विकल्प चुना। सबसे बढ़कर, अल्बर्टा के लोगों ने कनाडा को चुना।'
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अल्बर्टा में जनमत संग्रह
पूर्व डिप्टी प्रीमियर बयान आया सामने
अल्बर्टा के पूर्व डिप्टी प्रीमियर थॉमस लुकासजुक, जिन्होंने अलगाव के खिलाफ 'फॉरएवर कैनेडियन' अभियान का नेतृत्व किया था, ने समर्थकों से कहा, 'हम एक मजबूत देश हैं जो एक छोर से दूसरे छोर तक एकजुट है।' 10 लाख से अधिक वोटों की गिनती के बाद, लगभग 76 प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ बने रहने का समर्थन किया, जबकि 23 प्रतिशत लोगों ने ऐसी प्रक्रिया शुरू करने का समर्थन किया जो अंततः कनाडा से अलग होने की ओर ले जा सकती थी।
अल्बर्टा में दुनिया के चौथे सबसे बड़े तेल भंडार मौजूद हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसे 'काउबॉय कंट्री' कहा जाता है। यह एक रूढ़िवादी गढ़ है, जिसकी राजनीतिक संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा कनाडा के बाकी हिस्सों की तुलना में अमेरिकी पश्चिमी संस्कृति से अधिक मेल खाता है। ओटावा (कनाडा की संघीय सरकार) के प्रति यहां के लोगों में काफी नाराजगी है, लेकिन पारंपरिक रूप से यह नाराजगी कभी भी स्वतंत्रता के लिए व्यापक समर्थन में नहीं बदली।
मतपत्र में क्या सवाल किया गया?
बता दें कि अल्बर्टा प्रांत में 10 सवालों वाले एक जनमत संग्रह में मतदाताओं से कई मुद्दों पर अपनी राय देने को कहा गया था, जिसमें यह भी शामिल था कि क्या अल्बर्टा को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या अलग होने पर बाध्यकारी मतदान की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। मतपत्र पर दसवां प्रश्न पूछा गया था, 'क्या अल्बर्टा को कनाडा का एक प्रांत बने रहना चाहिए या क्या अल्बर्टा सरकार को कनाडा के संविधान के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए ताकि इस बात पर बाध्यकारी प्रांतीय जनमत संग्रह कराया जा सके कि अल्बर्टा को कनाडा से अलग होना चाहिए या नहीं ?'
अन्य नौ प्रश्न आव्रजन और संवैधानिक परिवर्तनों पर केंद्रित थे। पहले प्रश्न में पूछा गया था, 'क्या आप अल्बर्टा सरकार द्वारा आव्रजन को अधिक टिकाऊ स्तर तक कम करने, आर्थिक प्रवासन को प्राथमिकता देने और अल्बर्टावासियों को नए रोजगार के अवसरों में पहली प्राथमिकता देने के उद्देश्य से आव्रजन पर अधिक नियंत्रण रखने का समर्थन करते हैं?'
ये भी पढ़ें: मस्क का बड़ा तोहफा: अमेरिकी बच्चों को देंगे स्पेसएक्स के शेयर, ट्रंप ने जताया आभार; क्या है ट्रंप अकाउंट्स?
प्रांतीय सरकार पर परिणाम का क्या असर पड़ेगा?
सीबीसी के अनुसार , सभी 10 प्रश्न गैर-बाध्यकारी हैं, जिसका अर्थ है कि प्रांतीय सरकार कानूनी रूप से परिणामों पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य नहीं है। परिणामों को वैध माने जाने के लिए न्यूनतम मतदाता भागीदारी की कोई आवश्यकता भी नहीं है। मतदान से पहले, सीबीसी ने अल्बर्टा निवासियों और प्रांत से व्यक्तिगत रूप से जुड़े कनाडाई लोगों के बीच भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों पर रिपोर्ट दी, जो इस बात को दर्शाते हैं कि अल्बर्टा को कनाडा में रहना चाहिए या स्वतंत्रता प्राप्त करनी चाहिए।
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पीएम मार्क कार्नी ने क्या कहा?
जनमत संग्रह के नतीजे के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का बयान सामने आया है। कार्नी ने कहा कि अल्बर्टा के लोगों ने राष्ट्रीय एकता और कनाडा के साथ एक साझा भविष्य को चुना है। जनमत संग्रह के शुरुआती नतीजों से पता चला है कि प्रांत ने अलग होने के लिए एक बाध्यकारी मतदान कराने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। एक्स पोस्ट में कार्नी ने कहा, '19 अक्तूबर को, अल्बर्टा के लोगों ने एक स्पष्ट फैसला लिया। उन्होंने एकता को चुना, एक साथ मिलकर निर्माण करने और एक-दूसरे का ख्याल रखने का विकल्प चुना। सबसे बढ़कर, अल्बर्टा के लोगों ने कनाडा को चुना।'
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अल्बर्टा में जनमत संग्रह
पूर्व डिप्टी प्रीमियर बयान आया सामने
अल्बर्टा के पूर्व डिप्टी प्रीमियर थॉमस लुकासजुक, जिन्होंने अलगाव के खिलाफ 'फॉरएवर कैनेडियन' अभियान का नेतृत्व किया था, ने समर्थकों से कहा, 'हम एक मजबूत देश हैं जो एक छोर से दूसरे छोर तक एकजुट है।' 10 लाख से अधिक वोटों की गिनती के बाद, लगभग 76 प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ बने रहने का समर्थन किया, जबकि 23 प्रतिशत लोगों ने ऐसी प्रक्रिया शुरू करने का समर्थन किया जो अंततः कनाडा से अलग होने की ओर ले जा सकती थी।
अल्बर्टा में दुनिया के चौथे सबसे बड़े तेल भंडार मौजूद हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसे 'काउबॉय कंट्री' कहा जाता है। यह एक रूढ़िवादी गढ़ है, जिसकी राजनीतिक संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा कनाडा के बाकी हिस्सों की तुलना में अमेरिकी पश्चिमी संस्कृति से अधिक मेल खाता है। ओटावा (कनाडा की संघीय सरकार) के प्रति यहां के लोगों में काफी नाराजगी है, लेकिन पारंपरिक रूप से यह नाराजगी कभी भी स्वतंत्रता के लिए व्यापक समर्थन में नहीं बदली।
मतपत्र में क्या सवाल किया गया?
बता दें कि अल्बर्टा प्रांत में 10 सवालों वाले एक जनमत संग्रह में मतदाताओं से कई मुद्दों पर अपनी राय देने को कहा गया था, जिसमें यह भी शामिल था कि क्या अल्बर्टा को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या अलग होने पर बाध्यकारी मतदान की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। मतपत्र पर दसवां प्रश्न पूछा गया था, 'क्या अल्बर्टा को कनाडा का एक प्रांत बने रहना चाहिए या क्या अल्बर्टा सरकार को कनाडा के संविधान के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए ताकि इस बात पर बाध्यकारी प्रांतीय जनमत संग्रह कराया जा सके कि अल्बर्टा को कनाडा से अलग होना चाहिए या नहीं ?'
अन्य नौ प्रश्न आव्रजन और संवैधानिक परिवर्तनों पर केंद्रित थे। पहले प्रश्न में पूछा गया था, 'क्या आप अल्बर्टा सरकार द्वारा आव्रजन को अधिक टिकाऊ स्तर तक कम करने, आर्थिक प्रवासन को प्राथमिकता देने और अल्बर्टावासियों को नए रोजगार के अवसरों में पहली प्राथमिकता देने के उद्देश्य से आव्रजन पर अधिक नियंत्रण रखने का समर्थन करते हैं?'
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प्रांतीय सरकार पर परिणाम का क्या असर पड़ेगा?
सीबीसी के अनुसार , सभी 10 प्रश्न गैर-बाध्यकारी हैं, जिसका अर्थ है कि प्रांतीय सरकार कानूनी रूप से परिणामों पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य नहीं है। परिणामों को वैध माने जाने के लिए न्यूनतम मतदाता भागीदारी की कोई आवश्यकता भी नहीं है। मतदान से पहले, सीबीसी ने अल्बर्टा निवासियों और प्रांत से व्यक्तिगत रूप से जुड़े कनाडाई लोगों के बीच भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों पर रिपोर्ट दी, जो इस बात को दर्शाते हैं कि अल्बर्टा को कनाडा में रहना चाहिए या स्वतंत्रता प्राप्त करनी चाहिए।