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US: ट्रंप ने विवादित विधेयक पर हस्ताक्षर किए, निगरानी कार्यक्रम का 30 अप्रैल तक विस्तार; अब संसद में होगी बहस

Sun, 19 Apr 2026 01:41 AM IST
Nirmal Kant वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन। Published by: Nirmal Kant Updated Sun, 19 Apr 2026 01:41 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादित निगरानी कार्यक्रम को 30 अप्रैल तक बढ़ाने वाले विधेयक पर हस्ताक्षर किए, जिससे इस पर आगे कांग्रेस में फिर बहस की संभावना है। आलोचक इसे सुरक्षा के साथ-साथ निजता के लिए खतरा मान रहे हैं। क्यों है विवाद, पढ़िए रिपोर्ट-

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Trump signs bill extending controversial surveillance powers until Apr 30
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक विधेयक पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद एक विवादित निगरानी कार्यक्रम को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। यह कम अवधि का विस्तार है। इसके बाद अब इस मुद्दे पर कांग्रेस (संसद) में बहस होने की संभावना है। 
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सीनेट में अंतिम क्षण में पारित हुआ विधेयक
यह विधेयक शुक्रवार को सीनेट में अंतिम क्षण में पारित किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निगरानी का अधिकार कुछ ही दिनों में समाप्त न हो जाए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया और इसके नवीनीकरण का समर्थन किया। हालांकि, आलोचक इसे नागरिकों की आजादी के लिए खतरा मान रहे हैं। 
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विदेशी खुफिया निगराई कानून की धारा 702 पर विवाद क्यों है?
इस विवाद के केंद्र में 'धारा 702' है। यह विदेशी खुफिया निगरानी कानून का हिस्सा है। यह धारा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी (सीआईए), राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए), संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) और अन्य एजेंसियों को बिना वारंट के विदेशी संचार को बड़ी मात्रा में एकत्र करने और उसका विश्लेषण करने की अनुमति देती है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी अमेरिकी नागरिकों के संदेश भी शामिल हो जाते हैं, अगर वे विदेशी लक्ष्यों से संपर्क में हों। 
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निगरानी कार्यक्रम के विस्तार पर टकराव
इस कार्यक्रम के विस्तार को लेकर लंबे समय से सियासी टकराव चलता आ रहा है। ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के नेता बिना शर्त 18 महीने के लिए इस कार्यक्रम के नवीनीकरण के पक्ष में थे। जबकि, प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने गुरुवार को इसमें कुछ बदलाव करके इसे पांच साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, ताकि विरोध करने वालों को सहमत किया जा सके। लेकिन दोनों ही प्रस्ताव पारित नहीं हो सके, जिसके बाद एक अस्थायी समाधान किया गया। 

आलोचकों का क्या कहना है?
आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी नागरिकों के ईमेल, फोन कॉल या संदेशों तक पहुंचने से पहले वारंट लेना अनिवार्य किया जाए। ट्रंप ने शनिवार को इस विधेयक पर बिना किसी तत्काल टिप्पणी के हस्ताक्षर किए। यह निगरानी अधिकारी सोमवार को समाप्त होने वाला था। 

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