US: 'गोल्डन डोम' अंतरिक्ष मिसाइल रक्षा कार्यक्रम की घोषणा कर सकते हैं ट्रंप, खर्च होंगे जनता के अरबों डॉलर
US: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा कार्यक्रम की घोषणा कर सकते हैं। इसकी शुरुआती लागत 30 से 100 अरब डॉलर तक हो सकती है, और इसे लागू होने में कई साल लगेंगे। सरकार ने तीन लागत विकल्पों में से दूसरा सबसे महंगा विकल्प चुना है।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को अपने 'गोल्डन डोम' मिसाइल रक्षा कार्यक्रम की रूपरेखा पेश कर सकते हैं। यह रक्षा मंत्रालय की ओर से सुझाए गए सबसे महंगे विकल्पों में से एक नहीं है। फिर भी इसमें जनता के अरबों डॉलर खर्च होंगे और इसे हकीकत बनने में कई साल लगेंगे।
अगर यह योजना पूरी होती है, तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका अंतरिक्ष में ऐसे हथियार तैनात करेगा, जो उड़ान के दौरान दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर सकेंगे। यह भी उम्मीद है कि ट्रंप यह घोषणा करेंगे कि जनरल माइकल गुएटलिन गोल्डन डोम कार्यक्रम की प्रगति की निगरानी के जिम्मेदार होंगे। माइकल गुएटलिन अभी अंतरिक्ष संचालन (स्पेस ऑपरेशंस) के उप प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।
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गोल्डन डोम के कार्यक्रम में जमीन और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों को शामिल किया जाएगा, जो किसी संभावित हमले के इन चारों मुख्य चरणों में मिसाइलों को पहचानने और रोकने में सक्षम होंगी-
- लॉन्च से पहले उन्हें पहचानना और नष्ट करना,
- उड़ान की शुरुआत में उन्हें रोकना,
- हवा में उनके बीच के रास्ते में उन्हें रोकना,
- या अंतिम क्षणों में, जब वे लक्ष्य की ओर नीचे गिर रही हों, तब उन्हें रोकना।
पिछले कुछ महीनों से पेंटागन के अधिकारी ऐसे विकल्प तैयार कर रहे हैं, जिनमें अंतरिक्ष से मिसाइलों को रोकने वाली तकनीकें शामिल होंगी। इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है- मंहगा, ज्यादा मंहगा और सबसे ज्यादा मंहगा और ये विकल्प उनकी लागत के आधार पर तय किए गए हैं।
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सरकार ने इन विकल्पों में से ज्यादा महंगे वाले विकल्प को चुना है, जिसकी शुरुआती लागत करीब 30 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर के बीच होगी। यह जानकारी एक अधिकारी ने गोपनीय तरीके से दी, क्योंकि यह योजना अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। तीनों विकल्पों में फर्क इस बात पर है कि अंतरिक्ष में कितने उपग्रह (सैटेलाइट) और सेंसर लगाए जाएंगे और पहली बार अंतरिक्ष में ऐसी मिसाइलें भी रखी जाएंगी जो दुश्मन की मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकें। जितना ज्यादा सैटेलाइट और इंटरसेप्टर लगाए जाएंगे, योजना उतनी महंगी होगी। इसीलिए अलग-अलग लागत के विकल्प बनाए गए हैं।
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