US-Iran War: ट्रंप प्रशासन का दावा- ईरान में जंग 60 दिन की डेडलाइन से पहले खत्म; अब कांग्रेस की मंजूरी पर रार
ट्रंप प्रशासन का यह दावा कि ईरान युद्ध समाप्त हो चुका है, अमेरिकी राजनीति और कानून दोनों में नई बहस छेड़ रहा है। जहां एक ओर प्रशासन कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश कर रहा है, वहीं विपक्ष और विशेषज्ञ इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी कांग्रेस में और गरमा सकता है।
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा दावा किया है। प्रशासन का कहना है कि अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए युद्धविराम (सीजफायर) के बाद यह युद्ध समाप्त हो चुका है। इस दावे के साथ ही व्हाइट हाउस ने कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेने की आवश्यकता से बचने की कोशिश की है।
सीजफायर को बताया युद्ध का अंत
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट में गवाही देते हुए कहा कि सीजफायर के बाद युद्ध प्रभावी रूप से रुक गया है। प्रशासन का तर्क है कि 28 फरवरी से शुरू हुई सैन्य झड़पें अब समाप्त हो चुकी हैं क्योंकि 7 अप्रैल से दोनों देशों के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है।
कानून क्या कहता है?
अमेरिका का वॉर पावर्स रेजोल्यूशन कहता है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों से ज्यादा जारी रखने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है। ट्रंप प्रशासन के पास शुक्रवार तक की समयसीमा थी, लेकिन अब उनका दावा है कि युद्ध पहले ही खत्म हो चुका है, इसलिए मंजूरी की जरूरत नहीं है। हालांकि, इस कानून में 30 दिन का अतिरिक्त विस्तार भी संभव है, लेकिन इस पर भी बहस जारी है।
डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन में मतभेद
डेमोक्रेट नेताओं ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के सैन्य कार्रवाई जारी रखना गलत है। वहीं, कुछ रिपब्लिकन सांसद भी अब स्पष्ट रणनीति और लक्ष्य की मांग कर रहे हैं। सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने कहा 'यह समयसीमा कोई सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त है। ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई स्पष्ट रणनीति के साथ होनी चाहिए।'
क्या वास्तव में खत्म हुआ युद्ध?
भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हालात अलग कहानी बताते हैं। ईरान अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि अमेरिकी नौसेना वहां नाकेबंदी कर रही है। ऐसे में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन का यह तर्क कानूनी रूप से कमजोर है। विशेषज्ञ कैथरीन योन एब्राइट ने कहा कि 'कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि 60 दिन की समयसीमा को रोका या खत्म किया जा सकता है।'
पूर्व अधिकारी रिचर्ड गोल्डबर्ग ने सुझाव दिया है कि अमेरिका एक नई सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है, जिसका नाम एपिक पैसेज रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा।
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