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Poland: 'पोलैंड में भारत की छवि भीड़ वाली ट्रेनों की, पर..', भारत घूमने आए ट्रूकॉलर के अधिकारी ने बताया अनुभव

Tue, 12 Mar 2024 09:06 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वारसा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वारसा Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 12 Mar 2024 09:06 AM IST
सार

ग्लोबल कॉलर आईडी एप के उत्पाद निदेशक सिजमोन कोपेक ने एक्स पर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां के साथ एक सप्ताह के लिए भारत आए थे। उनकी यूरोप से बाहर पहली यात्रा थी और वह अंग्रेजी नहीं बोल पाती हैं। 

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Truecaller Executive On Trip To India, said Vande Bharat Debunked Some Stereotypes
सिजमोन कोपेक अपनी मां के साथ। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत के बारे में विदेश में कई तरह की अफवाहें फैली हुई हैं, लेकिन जब वहां के लोग खुद एक बार यहां घूम जाते हैं, तो खुद को यहां का गुणगान करने से नहीं रोक पाते हैं। दरअसल, हम यह बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हाल ही में पोलैंड से ट्रूकॉलर के एक वरिष्ठ अधिकारी भारत की यात्रा पर आए हुए थे। जब वह वापस अपने देश लौटे तो उन्होंने अपनी यात्रा का अनुभव साझा किया और भारत से जुड़ी कुछ रूढ़िवादी धारणाओं को सरे से नकार दिया। 

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मां के साथ घूमने आए कोपेक
ग्लोबल कॉलर आईडी एप के उत्पाद निदेशक सिजमोन कोपेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां के साथ एक सप्ताह के लिए भारत आए थे। उनकी यूरोप से बाहर पहली यात्रा थी और वह अंग्रेजी नहीं बोल पाती हैं। उन्होंने मुझसे भारत के बारे में बहुत कुछ सुना था, पोलिश मीडिया में भी काफी पढ़ा था। हालांकि फिर भी यहां आने पर सब कुछ काफी अलग चौंकाने वाला था। 
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टैक्सी की सवारी और किराने से खरीदारी करना
उन्होंने कहा, 'हमने भारत में जो भी सांसारिक चीजें देखीं वो काफी आकर्षित करने वाली थीं। खासकर, टैक्सी की सवारी और किराने से खरीदारी करना। वह मेरी बहन के लिए करी मसाले खरीदने की सोच रही थीं। इसलिए वह एक दुकान में गईं और उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि यहां एक से ज्यादा तरीके के मसाले थे।' कोपेक ने कहा कि मां ने कई जगहों पर पेड़-पौधों की हजारों तस्वीरें लीं। वह रिटायर होने से पहले वह काफी पेड़-पौधों से घिरी रहती थीं।
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यह थी अफवाहें
ट्रूकॉलर के अधिकारी ने कहा, दुर्भाग्य से पोलैंड में भारत की छवि झुग्गियों और भीड़भाड़ वाली ट्रेनों की बनी हुई है। हालांकि वंदे भारत ने इन रूढ़ियों को पूरी तरह से झुठला दिया है। यही बात दिल्ली और इसके हरे-भरे, खूबसूरती से बनाए गए पड़ोस पर भी लागू होती है।

टेक इकोसिस्टम ने उड़ाए होश
उन्होंने कहा, 'भारत के टेक इकोसिस्टम ने उनके होश उड़ा दिए। पोलैंड में इस संबंध में हम काफी पीछे हैं। जबकि यहां मैंने उन्हें दिखाया है कि वह जो कुछ भी कल्पना करती है उसके लिए सचमुच एक एप है।'

कोपेक ने कहा, 'हमने स्कूल में भारत के इतिहास के बारे में कुछ भी नहीं जाना है। यहां के पाठयक्रम में आधे से भी कम यहां के इतिहास के बारे में बताया गया है। आगरा का ताजमहल या जयपुर में किलों को देखना सदियों से देश के लिए एक आंख खोलने वाला है।'


उन्होंने कहा कि उन्हें जो सबसे ज्यादा अच्छा लगा वो थे यहां के लोग। हालांकि वह उनके साथ बातचीत नहीं कर पा रही थीं, लेकिन अपने चारों ओर खुशी महसूस करना और थोड़ी से बातचीत करना उनके लिए काफी कीमती था। क्योंकि हर कोई दयालु से परे था और हमारे पास सकारात्मक अनुभव थे।

उन्होंने आगे कहा, 'वह अब घर पर है और मैंने सुना है कि वह घर के बाकी लोगों से कह रही है कि भारत में ही छुट्टियां बिताना चाहिए।'

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