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चीन के खिलाफ भारत-ताइवान के एक होने का वक्त : ताइवानी मीडिया
Sun, 07 Feb 2021 03:21 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, ताइपे।
एजेंसी, ताइपे।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 07 Feb 2021 03:21 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social media
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ताइवानी मीडिया ने भारत को चीन के खिलाफ अपने जैसी सोच वाले ताइवान जैसे देशों की टीम तैयार करने की सलाह दी है। ताइवानी मीडिया में शनिवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालांकि भारत ने चीन के घुसपैठ के प्रयास का ‘उचित जवाब’ दिया है, लेकिन यह समय बीजिंग के खिलाफ क्वाड (भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का समूह) को मजबूत करने और अपने जैसी सोच वाले ताइवान जैसे देशों के साथ हाथ मिलाने का है।
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ताइपे टाइम्स में प्रकाशित ‘टाइम फॉर ताइवान, इंडिया टू टीम अप’ लेख के मुताबिक, पिछले 10 साल में भारत और ताइवान के प्रति चीन के आक्रामक रुख में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इस लेख के लेखक राहुल मिश्रा मलेशिया की क्वालालंपुर में मलाया यूनिवर्सिटी के एशिया-यूरोप इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ शिक्षक हैं।
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राहुल का कहना है कि गलवां घाटी झड़प को 10 महीने हो चुके हैं और शांति वार्ता के कई दौर भी हो चुक हैं। लेकिन चीन असल में तनाव घटाने में दिलचस्पी लेता नहीं दिख रहा है।
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राहुल के मुताबिक, पिछले महीने अप्रैल-मई से अब तक, चीन की तरफ से सीमावर्ती क्षेत्रों और पश्चिमी सेक्टर में एलएसी पर भारी मात्रा में हथियार और सैनिक तैनात किए गए हैं। मई के मध्य से चीनी सेना ने भारत-चीन सीमा क्षेत्र के पश्चिमी सेक्टर में कई जगह एलएसी में घुसपैठ करने का प्रयास किया है। इन प्रयासों का हमारी (भारत की) तरफ से उचित जवाब भी मिला है।
रिपोर्ट के लेखक के तौर पर राहुल ने कहा, हालांकि चीन ने हाल ही में विश्वास निर्माण के उन उपायों का उल्लंघन किया है, जिन पर दोनों पक्षों ने पिछले साल 21 सितंबर को सहमति जताई थी। दोनों पक्षों ने तय किया था कि कोई भी अब आगे की पंक्ति में सैनिक नहीं बढ़ाएगा।
इसके बावजूद चीन ज्यादा सैनिक, आर्टिलरी और हथियार भेजकर पूर्वी लद्दाख में अपनी मौजूदगी को मजबूत कर रहा है। समझौते के इस उल्लंघन ने पूरी वार्ता की ईमानदारी पर संदेह खड़े कर दिए हैं और चीन की भौगोलिक महत्वाकांक्षाओं व भारत के प्रति सामरिक मुद्रा ने कई तरह के सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ही नहीं पिछले साल ताइवान, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया, नेपाल, दक्षिण कोरिया, भूटान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया समेत कई अन्य देश चीन की हवाई, समुद्री और भू सीमा घुसपैठ के शिकार हुए हैं। इसी कारण भारत को इन सभी देशों के साथ चीन के खिलाफ गुट तैयार करना चाहिए।
दोकलम और गलवां गतिरोध में है अंतर
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गलवां गतिरोध साल 2017 में दोकलम और साल 2013 में दौलत ओल्डी बेग में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुए गतिरोध से पूरी तरह अलग है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि मौजूदा चीन सात साल पहले के चीन से बेहद अलग है।
इन सात सालों के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के अंदर बेरोकटोक और संतुलन वाला शक्ति केंद्र बना लिया है। जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ज्यादा मुखर और टकराववादी बन चुका है।
चीन एशिया में भारत को मानता है चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, चीन एशिया में भारत को अपने लिए चुनौती मानता है। इसी कारण चीन की तरफ से दलाई लामा व निर्वासित तिब्बत सरकार का मुद्दा उठाना, भूटान के साथ विवाद खड़ा करना और रणनीतिक टूल की तरह नेपाल को भारत के खिलाफ खड़ा करना आदि बीजिंग की दीर्घकालिक रणनीतिक योजना का हिस्सा है।
राहुल मिश्रा के मुताबिक, चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की सबसे पहले भारत ने ही खिलाफत की थी। पहले चीन ने उसे मनाने का प्रयास किया, लेकिन भारत की तरफ से बीआरआई के एक हिस्से चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पर सवाल खड़े करने के बाद बीजिंग ने टकराव का रुख अख्तियार कर लिया। इसी दौरान ताइवान ने भी बीआरआई प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।