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तियेन आन मेन नरसंहार: हांगकांग में चीन की कारगुजारी, ‘पिलर ऑफ शेम’ को रातोंरात किया गायब
Thu, 23 Dec 2021 10:35 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 23 Dec 2021 10:35 PM IST
सार
इसे तोड़ने के दौरान हॉन्ग-कॉन्ग विश्वविद्यालय के कामगारों ने ऊंचे-ऊंचे अवरोधक लगाए ताकि उस पर्दे के पीछे क्या हो रहा है किसी को इसकी खबर तक न हो।
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चीन का कारनामा
- फोटो : Social media
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विस्तार
चीन में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान 1989 में तियेन आन मेन चौराहे पर हुए नरसंहार की याद में हांगकांग विश्वविद्यालय में बने एक स्मारक को बृहस्पतिवार तड़के विश्वविद्यालय के आदेश पर हटा दिया गया। ये काम रात के अंधेरे में चुपचाप किया गया।
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इस आठ मीटर ऊंचे स्तंभ ‘पिलर ऑफ शेम’ में 50 लोगों के क्षत-विक्षत शवों को एक-दूसरे के ऊपर पड़ा हुआ प्रदर्शित किया गया था। इसे डेनमार्क के मूर्तिकार जेन्स गाल्सियोट ने बीजिंग में चार जून, 1989 को तियेन आन मेन चौराहे पर लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान हिंसक सैन्य कार्रवाई में मारे गए लोगों की याद में बनाया था। लेकिन अक्टूबर में यह स्मारक विवाद का विषय बन गया क्योंकि विश्वविद्यालय इसे हटाने की मांग करने लगा जबकि मानवाधिकार समूहों ने इस फैसले की निंदा की।
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पर्दे के पीछे हुआ तोड़फोड़ का काम
इसे तोड़ने के दौरान हॉन्ग-कॉन्ग विश्वविद्यालय के कामगारों ने ऊंचे-ऊंचे अवरोधक लगाए ताकि उस पर्दे के पीछे क्या हो रहा है किसी को इसकी खबर तक ना हो। फिर अगले कुछ घंटों में वहां दशकों से खड़े 'पिलर ऑफ शेम' को उन्होंने तोड़ा और गुरुवार तड़के उसके मलबे को ट्रक में डालकर वहां से निकल गए।
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करीब आठ मीटर (26 फुट) ऊंचा यह शिल्प 1989 में बीजिंग के थियानमेन चौराहे पर लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ चीन के बल प्रयोग के पीड़ितों की याद में बनाया गया था। इस शिल्प को इस तरह हटाया जाना थियानमेन चौराहे पर हुई हिंसा की घटना की यादों को जनता के दिलों-दिमाग से निकाल फेंकने की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।