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म्यांमार हिंसा: 114 प्रदर्शनकारियों की हत्या से भी नहीं टूटा विरोध, सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी
Mon, 29 Mar 2021 02:54 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, यांगून।
एजेंसी, यांगून।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 29 Mar 2021 02:54 AM IST
सार
- सुरक्षा बलों के हाथों कम से कम 114 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, जिनमें बहुत सारे 16 साल के कम उम्र के बच्चे थे।
- म्यांमार के दो सबसे बड़े शहरों यांगून और मांडले में रविवार को सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया।
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म्यामांर में विरोध करते लोग
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
म्यांमार में रविवार को भी हजारों प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र वापसी की मांग करते हुए सड़कों पर उतरकर सैन्य तानाशाही का विरोध जताया, जबकि महज एक दिन पहले सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया था। पिछले महीने सैन्य तख्तापलट के बाद इस सबसे बड़े नरसंहार के बावजूद प्रदर्शनकारियों का विरोध नहीं थमना बेहद अहम माना जा रहा है।
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प्रदर्शनकारियों ने देश के दो सबसे बड़े शहरों यांगून और मांडले में रविवार को सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। एक दिन पुरानी हिंसा के बावजूद रविवार को भी कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस से उलझते और उनका विरोध करते दिखाई दिए।
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ऑनलाइन न्यूज सर्विस म्यांमार नाऊ के मुताबिक, शनिवार को सुरक्षा बलों के हाथों कम से कम 114 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, जिनमें बहुत सारे 16 साल के कम उम्र के बच्चे थे।
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म्यांमार के कई अन्य मीडिया संगठनों और शोधकर्ताओं ने भी लगभग इतने ही प्रदर्शनकारियों की मौत की सूची जारी की है, जो 14 मार्च को सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए प्रदर्शनकारियों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या से कहीं ज्यादा है। फरवरी के पहले सप्ताह में आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटाकर सेना के सत्ता कब्जाने के बाद से अब तक सुरक्षा बल 420 से ज्यादा लोगों की हत्या कर चुके हैं।
ये भी पढ़ें- म्यांमार में क्रूरता: सेना ने शनिवार को 91 प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भूना, अब तक की सबसे बड़ी हिंसा
म्यांमार में पहले भी करीब पांच दशक तक सैनिक शासन रह चुका है। इसके बाद पिछले कुछ सालों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की प्रगति के बाद अब दोबारा सैन्य तख्तापलट ने पूरे विश्व का ध्यान दोबारा इस दक्षिणपूर्वी देश की तरफ खींच लिया है। शनिवार को सुरक्षा बलों के हाथों प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर हत्या की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद निंदा की गई है।
म्यांमार में मौजूद राजनयिक मिशनों और विदेशों में, सभी जगह इस नरसंहार की कड़ी निंदा की गई। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने ट्वीट किया कि उनका देश बर्मा के सुरक्षा बलों के साजिशन नरसंहार से भयातुर हैद्घ यह दिखाता है कि जुंटा कुछ लोगों के लिए सैकड़ों लोगों की बलि लेने को आतुर है।
यूएन चीफ ने कहा, बच्चों की हत्या से स्तब्ध हूं
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा, मैं म्यांमार में बच्चों समेत बड़ी संख्या में नागरिकों की हत्या से स्तब्ध हूं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, सेना की लगातार कड़ी कार्रवाई अवांछनीय है और यह एक मजबूत, एकजुट व कठोर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की मांग कर रही है।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद खुद इस सैन्य हिंसा के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाने को लेकर आलोचकों के निशाने पर है। सुरक्षा परिषद ने हिंसा की निंदा की, लेकिन सैन्य जुंटा को हथियार बेचने वालों पर प्रतिबंध लगाने को ठोस कदम नहीं उठाया। म्यांमार की सेना के मुख्य हथियार सप्लायर चीन और रूस हैं, जो सुरक्षा परिषद के ऐसे किसी भी कदम को वीटो करने का संकेत दे चुके हैं।
12 देशों के सेना प्रमुखों ने की संयुक्त आलोचना
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कुल 12 देशों की सेनाओं के सेना प्रमुखों ने संयुक्त बयान जारी कर निहत्थे लोगों के खिलाफ सेना के उपयोग की निंदा की है।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद खुद इस सैन्य हिंसा के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाने को लेकर आलोचकों के निशाने पर है। सुरक्षा परिषद ने हिंसा की निंदा की, लेकिन सैन्य जुंटा को हथियार बेचने वालों पर प्रतिबंध लगाने को ठोस कदम नहीं उठाया। म्यांमार की सेना के मुख्य हथियार सप्लायर चीन और रूस हैं, जो सुरक्षा परिषद के ऐसे किसी भी कदम को वीटो करने का संकेत दे चुके हैं।
12 देशों के सेना प्रमुखों ने की संयुक्त आलोचना
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कुल 12 देशों की सेनाओं के सेना प्रमुखों ने संयुक्त बयान जारी कर निहत्थे लोगों के खिलाफ सेना के उपयोग की निंदा की है।