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क्या भ्रम की शिकार है बाइडन प्रशासन की रूस नीति? मास्को स्थित अमेरिकी राजदूत प्रकरण में उठे सवाल
Tue, 20 Apr 2021 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 20 Apr 2021 06:32 PM IST
सार
रूस ने पिछले शुक्रवार को दस अमेरिकी राजनयिकों को अपने देश से निकालने का एलान किया था। उन राजनयिकों में राजदूत सुलिवान का नाम शामिल नहीं था। लेकिन उन्हें रूसी विदेश मंत्रालय में बुलाया गया और वापस वाशिंगटन चले जाने की सलाह दी...
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व्लादिमीर पुतिन के साथ जो बाइडन
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
खबर है कि मास्को स्थित अमेरिकी राजदूत ने अनौपचारिक रूप से रूस के कहने के बावजूद रूस से वापस जाने से इनकार कर दिया है। ये बात अपने सूत्रों के आधार पर एक अमेरिकी वेबसाइट ने छापी है। इसके मुताबिक हाल में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूस ने अमेरिकी राजदूत जॉन सुलिवान को ‘सलाह’ दी थी कि वे अपने देश लौट जाएं। लेकिन वरिष्ठ राजनयिक सुलिवान ने इस ‘सलाह’ को मानने से इनकार कर दिया। सुलिवान की नियुक्ति पूर्व डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने की थी। वे अब अमेरिका के उन गिने-चुने राजदूतों में हैं, जिन्हें राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन के प्रशासन ने बदला नहीं है।
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राजनयिक हलकों में इस सवाल पर माथापच्ची की जा रही है कि रूसी इच्छा के खिलाफ सुलिवान को मास्को में बनाए रख कर अमेरिका क्या संदेश देने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि रूसी अधिकारियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाने के बाद रूस ने पिछले शुक्रवार को दस अमेरिकी राजनयिकों को अपने देश से निकालने का एलान किया था। उन राजनयिकों में राजदूत सुलिवान का नाम शामिल नहीं था। लेकिन उन्हें रूसी विदेश मंत्रालय में बुलाया गया। उसी दौरान रूसी विदेश मंत्रालय के अधिकारी यूरी उशाकोव ने ‘सलाह’ दी कि अमेरिकी राजदूत को बाइडन प्रशासन के अधिकारियों से राय-मशविरे के लिए वापस वाशिंगटन चले जाना चाहिए।
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वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने सुलिवान के करीबी लोगों से बातचीत के आधार पर खबर दी है कि सुलिवान का रुख यह है कि अगर रूस उन्हें निकालना चाहता है, तो फिर वह ऐसा औपचारिक फैसला करे। इस बारे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
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रूस के मामले जो बाइडन प्रशासन की नीति अस्पष्ट रही है। कुछ आलोचकों ने इसे भ्रामक कहा है। पिछले महीने एक इंटरव्यू के दौरान बाइडन इस राय से सहमत हो गए कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ‘हत्यारा’ हैं। लेकिन उसके बाद उन्होंने पुतिन से फोन पर बातचीत की। फिर अमेरिका पर साइबर हमलों और पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित हस्तक्षेप के आरोप में रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों का एलान किया। उसके तुरंत बाद उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही पुतिन के साथ उनकी शिखर वार्ता होगी।
सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाव पेत्रुशेव से फोन पर बातचीत की। इसमें दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच प्रस्तावित शिखर वार्ता की संभावना पर चर्चा की गई। साथ ही दोनों अधिकारियों ने संपर्क बनाए रखने का फैसला किया।
उधर पुतिन अमेरिका में अपने राजदूत अनातोली एंतोनोव को ‘राय-मशविरे’ के लिए वापस मास्को बुला चुके हैं। बताया जाता है कि ऐसा उन्होंने बाइडन प्रशासन की नीतियों पर अपनी नाखुशी जताने के लिए किया है। उन्होंने अमेरिकी राजदूत को सीधे नहीं निकालने का फैसला संभवतया इसलिए किया, क्योंकि इसको तनाव बढ़ाने वाला कदम माना जाता। गौरतलब है कि आखिरी बार अमेरिकी राजदूत का रूस से निष्कासन सोवियत संघ के जमाने में 1952 में हुआ था।
बताया जाता है कि बाइडन प्रशासन नहीं चाहता कि रूस से संवाद बिल्कुल टूट जाए। इसलिए उसने अपने राजदूत को मास्को में बने रहने की सलाह दी है। इस बीच यूक्रेन से लगी सीमा पर रूस ने हजारों की संख्या में अपनी फौजी तैनात की है। यह भी अमेरिका और पश्चिमी देशों से उसके तनाव का एक मुद्दा बना है। लेकिन इस मामले में भी बाइडन प्रशासन की नीति स्पष्ट नहीं है।