{"_id":"5dc10f158ebc3e013662d6ff","slug":"the-trump-administration-made-a-formal-announcement-to-separate-itself-from-the-paris-agreement","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेरिस समझौते से खुद को अलग करने की ट्रंप प्रशासन ने औपचारिक घोषणा की","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पेरिस समझौते से खुद को अलग करने की ट्रंप प्रशासन ने औपचारिक घोषणा की
Tue, 05 Nov 2019 01:02 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 05 Nov 2019 01:02 PM IST
विज्ञापन
ट्रंप
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक तरफ जहां पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन से होने वाली ताबाही से परेशान दिख रही है वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने पेरिस जलवायु समझौते से खुद को अलग करके दुनिया को एक आघात सा मारा है। जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाएगी। अमेरिका ने ऐतिहासिक पेरिस समझौते से अलग होने की घोषणा औपचारिक रुप से संयुक्त राष्ट्र को दे दी है। इस समझौते से अलग होने की प्रक्रिया सोमवार से शुरु हो गई है। अब अमेरिका चार नवंबर 2020 को इस समझौते से अलग हो जाएगा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि यह समझौता 12 दिसंबर 2015 को हुआ था। इस वैश्विक समझौते में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका ने 22 अप्रैल 2016 को पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और तीन सितंबर 2016 को इस समझौते का पालन करने की स्वीकृति दी थी।
विज्ञापन
इस समझौते से खुद को अलग करने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘‘आज अमेरिका ने पेरिस समझौते से अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस समझौते की शर्तों के मुताबिक अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र को समझौते से अलग होने की औपचारिक सूचना भेज दी है। अधिसूचना देने के एक वर्ष बाद यह प्रभाव में आ जाएगा।
विज्ञापन
हालांकि अमेरिका के इस समझौते से खुद को अलग करने बाद विपक्षी डेमेाक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसका अफसोस है। अमेरिका इस समझौते से खुद को अलग कर रहा है। उनके इस समझौते से अलग हो जाने के बाद जलवायु तथा जैव विविधता के संबंध में फ्रांस तथा चीन के बीच साझेदारी और भी आवश्यक हो गई है।