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राहत : बच्चों में संक्रमण से गंभीर तकलीफ और मौत का खतरा कम, पर सतर्कता जरूरी
Sat, 10 Jul 2021 08:56 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 10 Jul 2021 08:56 AM IST
सार
- यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि संक्रमण के कारण पहले से किसी रोग से ग्रसित युवाओं को गंभीर तरह की तकलीफ का खतरा ज्यादा है। एक अध्ययन में पता चला है कि 18 वर्ष से कम के 251 बच्चों को महामारी के पहले साल से लेकर फरवरी तक आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना महामारी की तीसरी लहर में बच्चों को खतरा अधिक होने का अंदेशा लगाया जा रहा है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के बाद कहा है कि बच्चों को कोरोना संक्रमण से गंभीर तकलीफ और मौत का खतरा कम है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क और यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि संक्रमण के कारण पहले से किसी रोग से ग्रसित युवाओं को गंभीर तरह की तकलीफ का खतरा ज्यादा है।
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47,903 में से एक को पड़ सकती है आईसीयू की जरूरत
अध्ययन में पता चला है कि 18 वर्ष से कम के 251 बच्चों को महामारी के पहले साल से लेकर फरवरी तक आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था। इस अनुसार अनुमान लगाया है कि इस उम्र के 47,903 युवाओं में से एक को आईसीयू में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।
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टीके के लिए प्राथमिकता तय हो
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर जोसेफ वार्ड का कहना है कि इस नतीजे का आधार पर टीकाकरण की नीति और प्राथमिकता तय की जा सकती है। गंभीर रोग से ग्रसित बच्चों को प्राथमिकता से टीका लगाना होगा।
क्योंकि वायरस उनके लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है। हालांकि कोरोना से जान का जोखिम जितना वयस्कों को है उतना ही किशोरों को है, लेकिन बच्चों में संक्रमण की दर अभी कम है।