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विकल्प खोज रहा ड्रैगन: अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए तो क्या होगा, विशाल डॉलर रिजर्व बन गया चीन का सिरदर्द

Fri, 04 Mar 2022 01:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 04 Mar 2022 01:31 PM IST
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सार
विशेषज्ञों के मुताबिक अब तक निवेशक तभी सोने में निवेश करते थे, जब मुद्रास्फीति की दर एक सीमा से ऊंची हो जाती थी। लेकिन हाल में अमेरिका और यूरोप ने जिस तरह दूसरे देशों की संपत्तियों को जब्त करने का तरीका अपनाया है, उससे अनेक देशों को डॉलर में पैसा लगाना जोखिम भरा नजर आने लगा है...
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The option of buying gold in China with dollars as much as possible is being seriously considered after impact of Sanctions on Russia
चीन खरीद रहा सोना - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जिस तरह पश्चिमी देशों ने रूस की संपत्तियों को जब्त किया है, उसे देखते हुए चीन अब निवेश के लिए डॉलर के विकल्प की तलाश में जुट गया है। अमेरिका ने रूस के पहले अफगानिस्तान की लगभग 3.5 बिलियन डॉलर की संपत्ति को भी स्थायी रूप से जब्त कर लिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पश्चिमी देशों में संपत्ति रखने और डॉलर में अपना धन लगाए रखने को लेकर दुनिया के बहुत से देशों में आशंका गहरा गई है।

चीन को सताया ये डर

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री केनेथ रॉगोफ ने कहा है कि रूस सरकार की संपत्तियों को जब्त करना अभूतपूर्व कदम है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसी कोई मिसाल नहीं रही है। इससे चीन के मन में यह डर समा गया है कि ताइवान के मुद्दे पर उसकी संपत्तियों के साथ भी ऐसा किया जा सकता है। रॉगोफ ने कहा- ‘किसी बड़े सेंट्रल बैंक में जमा धन को जब्त कर लेना चरमपंथी कदम है। यह युग को बदल देने वाला मौका है। कहने का मतलब यह है कि अगर आप विश्व अर्थव्यवस्था पर डॉलर के वर्चस्व की दीर्घकालिक सूरत देखना चाहें, तो आप मुझ पर विश्वास कीजिए, चीन यूं नहीं बैठा हुआ है। आखिर उनके पास लगभग तीन ट्रिलियन का डॉलर रिजर्व है।’



लेकिन जानकारों का कहना है कि चीन की समस्या है कि उसके पास विकल्प का अभाव है। उसके पास एक विकल्प स्वर्ण में निवेश करने का है। लेकिन चीन के पास जितना डॉलर है, उतना सोना पूरी दुनिया के बाजार में नहीं है। वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास 3.2 ट्रिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा है। जबकि दुनिया भर के तमाम सेंट्रल बैंकों के भंडार में जितना सोना है, उसकी कीमत 2.3 ट्रिलियन डॉलर के बराबर ही है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 1,944 डॉलर प्रति औंस  था। इस भाव के हिसाब अब तक दुनिया में जितना सोना खदानों से निकाला गया है, उसकी कीमत 17 ट्रिलियन डॉलर ठहरेगी। दुनिया में सोन के कुल भंडार का पांच फीसदी हिस्सा चीन के पास है।

डॉलर से सोना खरीदेगा चीन

विशेषज्ञों के मुताबिक अब तक निवेशक तभी सोने में निवेश करते थे, जब मुद्रास्फीति की दर एक सीमा से ऊंची हो जाती थी। लेकिन हाल में अमेरिका और यूरोप ने जिस तरह दूसरे देशों की संपत्तियों को जब्त करने का तरीका अपनाया है, उससे अनेक देशों को डॉलर में पैसा लगाना जोखिम भरा नजर आने लगा है। चीन के अमेरिका में दो ट्रिलियन डॉलर के ट्रेजरी बॉन्ड हैं। विवाद की स्थिति में अमेरिका कभी भी इस रकम को जब्त कर सकता है। इसलिए अब चीन में डॉलर से यथासंभव सोना खरीद लेने के विकल्प पर गंभीरता से सोचा जा रहा है।

चीनी अर्थशास्त्री गाओ देशेंग ने चीन की वेबसाइट गुआनचा.सीएन पर मंगलवार को प्रकाशित एक टिप्पणी में कहा- ‘अमेरिका और यूरोप यह समझना चाहिए कि प्रतिबंध एक दोधारी तलवार है। प्रतिबंधों से रूस को नुकसान होगा, लेकिन उससे यूरोप के हितों को भी क्षति पहुंचेगी। अमेरिका के लिए समझने की बात यह है कि बार-बार प्रतिबंधों का इस्तेमाल करने से दुनिया में डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। यह डॉलर की कब्र खोदने जैसा है।’

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