अमेरिका: ओबामा केयर तो बचा, लेकिन हेल्थ केयर पर और तेज हुई बहस
ओबामा केयर के तहत देश के उन गरीब लोगों को बीमा की सुविधा सरकार प्रदान करती है, जो खुद प्रीमियम देने की स्थिति में नहीं हैं। अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या तीन करोड़ 10 लाख है। रिपब्लिकन पार्टी इस योजना की विरोधी रही है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ओबामा केयर योजना के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज होने हो जाने से जो बाइडन प्रशासन ने राहत की सांस ली है। लेकिन इसके साथ ही अब देश की हेल्थ केयर नीति पर फिर से बड़ी बहस खड़ी हो गई है। इससे देश के प्रोग्रेसिव और कंजरवेटिव खेमों में फिर से वैचारिक जंग छिड़ सकती है। अफॉर्डेबल केयर एक्ट पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासन काल में बना था। इसीलिए बीमा आधारित स्वास्थ्य देखभाल की इस योजना को ओबामा केयर कहा जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी इसे जन कल्याण के दिशा में अपनी एक खास उपलब्धि मानती है। इस कानून की वैधता को चुनौती रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े समूहों ने दी थी। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में सुप्रीम कोर्ट में कई कंजरवेटिव जजों की नियुक्ति की गई थी। उस वजह से अंदेशा था कि कोर्ट इस कानून को रद्द कर सकता है। लेकिन गुरुवार को आए फैसले में कोर्ट ने इस अधिनियम को संविधान सम्मत माना।
डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही इस योजना को अपर्याप्त बताया है। इस गुट के नेता बर्नी सैंडर्स ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा- ‘सुप्रीम कोर्ट ने तीन करोड़ दस लाख लोगों को हेल्थ केयर से वंचित ना करने के पक्ष में फैसला दिया। लेकिन यह काफी नहीं है। हेल्थ केयर एक मानवाधिकार है, कोई विशेषाधिकार नहीं। हमें अवश्य दूसरे धनी देशों की तरह सबके लिए हेल्थ केयर की गारंटी करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। हमें मेडिकेयर फॉर ऑल कानून पारित करना चाहिए।’
प्रोग्रेसिव धड़ा एक ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिसमें पूरा इलाज सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था के तहत हो। बीमा आधारित व्यवस्था का लाभ सिर्फ तब मिलता है, जब बीमार व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होता है। उसके पहले इलाज पर हुआ खर्च उसे अपने पॉकेट से करना पड़ता है। प्रोग्रेसिव धड़ा ये मांग भी करता रहा है कि दांत (डेंचर) और आंख (चश्मे) की चिकित्सा को भी हेल्थ केयर योजना के तहत शामिल किया जाए। राष्ट्रपति जो बाइडन ऐसी व्यवस्था के समर्थक नहीं रहे हैं।
ओबामा केयर के तहत देश के उन गरीब लोगों को बीमा की सुविधा सरकार प्रदान करती है, जो खुद प्रीमियम देने की स्थिति में नहीं हैं। अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या तीन करोड़ 10 लाख है। रिपब्लिकन पार्टी इस योजना की विरोधी रही है। हालांकि मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के ताजा से फैसले से ज्यादातर रिपब्लिकन नेताओं ने भी राहत महसूस की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अगर सुप्रीम कोर्ट इस कानून को रद्द कर देता, तो उन्हें नए सिरे से हेल्थ केयर के मसले से निपटना पड़ता।
फैसले से खुश रिपब्लिकन नेताओं ने मीडिया से कहा है कि अब ये मसला डेमोक्रेटिक पार्टी के गले पड़ गया है। इस योजना में कैसे सुधार किया जाए, पार्टी की इस अंदरूनी बहस से अब उसे निपटना होगा। इस पर पार्टी में मतभेद और गहरा सकते हैं।
कोरोना महामारी ने हेल्थ केयर को अमेरिका में एक गर्म मुद्दा बना दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समय में रिपब्लिकन पार्टी हेल्थ केयर सिस्टम से बहस दूर हटाना चाहती थी। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि पार्टी ओबामा केयर की विरोधी रही है, लेकिन अब तक उसने अपनी तरफ से स्वास्थ्य देखभाल की कोई योजना जनता के सामने पेश नहीं की है। ऐसे में ओबामा केयर का संरक्षण हटने से ये मामला गरमाता, जो रिपब्लिकन पार्टी के लिए सियासी नुकसान का सौदा हो सकता था। अब बेशक ये बहस डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर सिमट गई है।