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Hindi News ›   World ›   The History of Ukraine and Russia what are the common inheritence role of Soviet Union in Cultural Difference and important events explained news and updates

रूस और यूक्रेन: 1136 साल का इतिहास इन दोनों देशों को जोड़ता और बांटता है; जानें इनसे जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में

Thu, 24 Feb 2022 05:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव/मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव/मॉस्को Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 24 Feb 2022 05:02 PM IST
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सार
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में इन दोनों ही देशों की विरासत साझी है। यूक्रेन की आज की राजधानी कीव उस समय यूक्रेन और रूस की जन्मस्थली बने पहले स्लेविक राज्य कीवन रस के बीचोंबीच था। दोनों देशों के रिश्तों में दो अहम घटनाक्रम हैं।
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The History of Ukraine and Russia what are the common inheritence role of Soviet Union in Cultural Difference and important events explained news and updates
रूस और यूक्रेन के बीच साझा विरासत का पुराना है इतिहास। - फोटो : Social Media

विस्तार

रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया है। यह एक तरह से युद्ध की शुरुआत है। कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या इससे बचा जा सकता था? दोनों के बीच संघर्ष की वजह क्या है? इस युद्ध की नौबत क्यों बनी? हर सवाल का जवाब इतिहास में दफन है। सोवियत संघ के इतिहास में और फिर यूक्रेन के इतिहास में। यह इतिहास ही है जो इन दोनों देशों को जोड़ता है और बांटता भी है। 


कितना पुराना है इन दोनों देशों का रिश्ता? 
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में इन दोनों ही देशों की विरासत साझी है। यूक्रेन की राजधानी कीव उसी जगह है, जहां किसी जमाने में पहला स्लेविक राज्य कीवन रस हुआ करता था। यह राज्य ही यूक्रेन और रूस की जन्मस्थली बना है। दोनों देशों के रिश्तों में दो अहम घटनाक्रम हैं। ईसवी सन 988 में कीव के प्रिंस व्लादिमीर प्रथम ने ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन धर्म अपनाया था और इसके दस शताब्दियों बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह बयान कि यूक्रेन और रूस के नागरिक एक ही हैं। यूक्रेन को रूस से अलग नहीं रखा जा सकता। इन दोनों घटनाओं के बीच के इतिहास ने ही दोनों देशों को बांटने और जोड़ने का भी काम किया है। 


बात सही भी है। दोनों देशों की साझा विरासत इन्हें करीब लाती है। यह अलग बात है कि दस सदियों तक यूक्रेन पर कब्जे के लिए संघर्ष चला है। 13वीं सदी में मंगोलों ने पूर्वी कीवन रस पर कब्जा जमाया। 16वीं सदी में पोलिश और लिथुआनिया की सेनाओं ने पश्चिम से घुसपैठ की। 17वीं सदी में पोलिश-लिथुआनियन कॉमनवेल्थ और सॉर्डम ऑफ रशिया में युद्ध हुआ। 

इसके बाद ही डेनिपर नदी के पूर्वी इलाके पर रूसी साम्राज्य का शासन आया, जिसे लेफ्ट बैंक यूक्रेन कहा गया। डेनिपर नदी के पश्चिमी हिस्से को राइट बैंक कहा गया, जिस पर पोलैंड का शासन था। एक सदी बाद 1793 में राइट बैंक (पश्चिमी) यूक्रेन पर रूसी साम्राज्य ने कब्जा जमा लिया था। कई वर्षों तक रूसीफिकेशन की नीति लागू रही। यूक्रेन की भाषा में पढ़ाई पर प्रतिबंध लगे। लोगों पर दबाव बना कि वे रूसी ऑर्थोडॉक्स धर्म को स्वीकार करें। यहीं मतभेदों की एक बड़ी वजह भी है। 

मौजूदा समस्या में सोवियत संघ की क्या भूमिका है? 
सोवियत संघ ने ही यूक्रेन के लोगों में भावनात्मक तौर पर विभाजन के बीज भी बोए हैं। 1917 की कम्युनिस्ट क्रांति के बाद यूक्रेन उन देशों में शामिल था, जिसे गृह युद्ध का सामना करना पड़ा। 1922 में यह सोवियत संघ में शामिल हुआ और उसके बाद सामाजिक स्तर पर बहुत बदलाव देश ने देखे हैं। 1930 के दशक में सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने यूक्रेन के किसानों को सामूहिक खेती के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर यूक्रेन के लाखों नागरिक भूख से मारे गए। स्टालिन ने यूक्रेन की भाषा बोलने वाले रूसी और सोवियत संघ के अन्य हिस्सों में रहने वाले नागरिकों यूक्रेन में भेजा। इससे आबादी का अनुपात ही बदल गया। 

पूर्वी यूक्रेन, पश्चिमी हिस्से से पहले रूसी साम्राज्य के अधीन आ गया था। इससे पूर्वी इलाके के लोगों के रिश्ते रूस से अच्छे रहे हैं। रूस की ओर झुकाव रखने वाले नेता भी इस इलाके में पनपे। पश्चिमी हिस्से में यूरोपीय ताकतों का शासन रहा, जैसे- पोलैंड और ऑस्ट्रो-हंगरी साम्राज्य। यही वजह है कि पश्चिमी यूक्रेन के लोग पश्चिमी देशों से जुड़ाव महसूस करते  हैं। पूर्वी आबादी रूसी बोलने वाली और ऑर्थोडॉक्स है। पश्चिमी हिस्से में बड़ी आबादी यूक्रेन की भाषा बोलने वाली और कैथोलिक है। 

यूक्रेन यूएसएसआर से कब आजाद हुआ?
यूक्रेन 1918 से 1920 के बीच भी आजाद रहा, पर उस समय पश्चिमी यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर दोनों विश्व युद्धों से पहले पोलैंड, रोमानिया और चेकोस्लोवाकिया का कब्जा था। फिर यूक्रेन यूक्रेनियन सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (SSR) का हिस्सा बना। जब सोवियत संघ 1990-91 में टूटने लगा तो यूक्रेनियन एस.एस.आर. ने 16 जुलाई 1990 को संप्रभुता घोषित की। 24 अगस्त 1991 को स्वतंत्रता घोषित की, जिसे 1 दिसंबर 1991 को मान्यता मिली। दिसंबर 1991 में यू.एस.एस.आर. के टूटने पर इस देश को पूरी आजादी मिली। देश का नाम यूक्रेन रखा गया। इसने सोवियत संघ से आजाद हुए देशों का कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS) बनाने में भी अहम भूमिका निभाई।  

सोवियत संघ से आजाद होने के बाद यूक्रेन की एकजुटता को किसने प्रभावित किया? 
दरअसल, यह एक लंबी कहानी है। 1991 में सोवियत संघ के टूटने से यूक्रेन आजाद मुल्क तो बन गया, पर देश को एकजुट करना बड़ी चुनौती थी। पूर्वी हिस्सों में यूक्रेन के प्रति राष्ट्रीय भावना पश्चिमी हिस्से के मुकाबले कमजोर है। ऐसे में लोकतंत्र और पूंजीवाद की ओर शिफ्ट आसान नहीं था। अराजकता का माहौल भी बना। पूर्वी यूक्रेन में ज्यादातर लोग अब भी रूसी कायदे-कानूनों से जुड़ाव महसूस करते हैं। 

यह विभाजन 2004 के ऑरेंज रिवॉल्युशन में भी साफ दिखा था। उस समय यूक्रेन के हजारों लोगों ने यूरोप से जुड़ने के लिए मार्च निकाले थे। इकोलॉजी देखें तो दक्षिणी व पूर्वी हिस्सों की जमीन पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा उपजाऊ है। लोगों में मतभिन्नता आपको यूक्रेन के 2004 और 2010 के राष्ट्रपति चुनावों में भी दिखाई दी थी।
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