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सावधान: 3.1 डिग्री अधिक गर्म हो जाएगी धरती, 2023 में 6.1% बढ़ा भारत का उत्सर्जन, जी-20 देशों ने नहीं की प्रगति

Fri, 25 Oct 2024 06:20 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला, ब्यूरो/एजेंसी
अमर उजाला, ब्यूरो/एजेंसी Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 25 Oct 2024 06:20 AM IST
सार

UN:  गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र ने जलवायु परिवर्तन को लेकर एक रिपोर्ट जारी की। जिसमें दावा किया गया कि अगर सरकारें कार्रवाई नहीं करती हैं तो 2100 तक धरती 3.1 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो जाएगी।

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the earth will heat up to 3.1 degrees Celsius, UN report warns
जलवायु परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर सरकारें कार्रवाई नहीं करती हैं तो 2100 तक धरती 3.1 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो जाएगी। यह आंकड़ा लगभग एक दशक पहले वृद्धि के सहमत आंकड़े से दोगुने से अधिक है। ये जानकारी गरुवार को संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकारों के किए वादों और इसके लिए वास्तव में जरूरी उपायों के बीच अंतर का विश्लेषण करती है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 में सरकारों ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस दौरान जलवायु परिवर्तन के खतरनाक प्रभावों को रोकने के लिए 1.5 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग की सीमा निर्धारित की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बृहस्पतिवार को एक भाषण में कहा, हम लड़खड़ाते हुए एक रस्सी पर चल रहे हैं। या तो हमारे नेता इस उत्सर्जन अंतर को पाट देंगे, या हम जलवायु आपदा में फंस जाएंगे।
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इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2022 और 2023 के बीच वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 1.3% बढ़कर 57.1 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए सरकारों ने अब तक जो वादे किए गए, अगर उन्हें पूरी तरह से लागू भी कर दिया जाए तो भी 2100 तक तापमान में 2.6 सेल्सियस और 2.8 सेल्सियस के बीच वृद्धि हो जाएगी।
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2023 में 6.1% बढ़ा भारत का उत्सर्जन
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 6.1 प्रतिशत बढ़ गया, जो कुल वैश्विक उत्सर्जन का 8 प्रतिशत है। लेकिन वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में देश का योगदान केवल 3 प्रतिशत है। भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 2.9 टन सीओ-2 है, जोकि वैश्विक औसत 6.6 सीओ2 से काफी कम है।

रिपोर्ट के अनुसार, सामूहिक रूप से वैश्विक ग्रीन हाउस उत्सर्जन में जी20 देशों (अफ्रीकी संघ को छोड़कर) का कुल योगदान 77 प्रतिशत है।  ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारत का स्थान तीसरा है। कुल वैश्विक उत्सर्जन में 30 प्रतिशत के योगदान के साथ चीन पहले नंबर पर, 11 प्रतिशत के साथ अमेरिका दूसरे, 6 प्रतिशत के साथ यूरोपीय संघ चौथे और 5 प्रतिशत के साथ रूसी संघ पांचवें स्थान पर है। ब्यूरो


जी-20 सदस्य देशों ने नहीं की बहुत प्रगति
रिपोर्ट के मुख्य विज्ञान संपादक ऐनी ओल्हॉफ ने कहा, जी-20 सदस्य देशों ने 2030 के लिए अपने वर्तमान जलवायु लक्ष्यों की दिशा में बहुत अधिक प्रगति नहीं की है। वर्तमान में हमारी धरती लगभग 1.3 सेल्सियस गर्म हो चुकी है। अगले महीने तमाम देश अजरबैजान में वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन (कॉप-29) में एकत्रित होंगे, जहां वे जीवाश्म ईंधन से दूर जाने के लिए पिछले साल किए गए समझौते पर चर्चा करेंगे। बाकू में प्रत्येक देश को उसकी उत्सर्जन-कटौती लक्ष्यों के बारे में सूचित किया जाएगा। इसे राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के रूप में जाना जाता है।
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