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जापान: सुगा की प्रतिष्ठा को धक्का, लेकिन आगे की संभावनाएं अभी धूमिल नहीं
Tue, 27 Apr 2021 07:25 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 27 Apr 2021 07:25 PM IST
सार
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ताजा सफलता से उत्साहित होकर अब डेमोक्रेटिक पार्टी फॉर पीपुल (डीपीपी), कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (सीडीपी) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी बड़ा गठबंधन बनाने पर विचार कर सकती हैं...
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योशिहिदे सुगा (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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विस्तार
जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की तीन उपचुनावों में हार से प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा की प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा है। सुगा पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से उनकी लोकप्रियता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ताजा उपचुनाव नतीजों को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सुगा के नेतृत्व में एलडीपी की चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
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रविवार को होकाइदो, नगानो और हिरोशिमा चुनाव क्षेत्रों में मतदान हुआ था। उन तीनों सीटों पर विपक्ष समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे। इससे सुगा सरकार के लिए तुरंत कोई खतरा तो पैदा नहीं हुआ है, लेकिन इससे अगले आम चुनाव में एलडीपी की संभावनाओं को लेकर नए कयास जरूर लगाए जाने लगे हैं। आम चुनाव अगले 21 अक्टूबर से पहले होना तय है। चुनाव नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री सुगा ने कहा- ‘मैं विनम्रता से मतदाताओं के फैसले को स्वीकार करता हूं।’
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तीनों सीटों पर तीन विपक्षी पार्टियों ने आपसी सहयोग से उम्मीदवार खड़े किए थे। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ताजा सफलता से उत्साहित होकर अब डेमोक्रेटिक पार्टी फॉर पीपुल (डीपीपी), कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (सीडीपी) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी बड़ा गठबंधन बनाने पर विचार कर सकती हैं। जापान की कम्युनिस्ट पार्टी ने भी विपक्षी उम्मीदवारों का समर्थन किया था।
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जानकारों का कहना है कि हार के इस झटके के बावजूद सुगा इस्तीफा देंगे, इसकी संभावना नहीं है। रिस्तुमिकन यूनिवर्सिटी में जापानी राजनीति के प्रोफेसर मसातो कमिकुबो ने यहां के अखबार जापान टाइम्स से कहा- ‘फिलहाल इसका असर कम ही रहेगा। राष्ट्रीय स्तर पर अभी लोगों की मुख्य चिंता राजनीति नहीं, बल्कि कोरोना महामारी से पैदा हुई स्थितियां हैं।’ लेकिन जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि में विपक्षी पार्टियां सरकार को ज्यादा घेरने के लिए अधिक उत्साहित हो सकती हैं। साथ ही मीडिया में सरकार पर अब अधिक सवाल उठाए जाएंगे। उधर दीर्घकाल में सुगा की राजनीतिक संभावनाओं पर इन नतीजों का असर हो सकता है।
जानकारों के मुताबिक एलडीपी को सबसे तगड़ा झटका हिरोशिमा में लगा। वहां से पार्टी ने पूर्व विदेश मंत्री फुमियो किशिदा को खड़ा किया था। किशिदा ने पिछले साल पार्टी के नेता पद के लिए सुगा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वे एक बड़ा नाम हैं। लेकिन उपचुनाव में उन्हें विपक्षी उम्मीदवार ने हरा दिया। जापान के जाने-माने राजनीतिक पत्रकार तेत्सुओ सुजुकी ने कहा है कि ताजा लगे झटके के बाद सत्ताधारी पार्टी में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। किशिदा एलडीपी में 47 सांसदों के एक गुट के नेता रहे हैं। अब मुमकिन है कि उनकी स्थिति कमजोर पड़ जाए और उन्हें गुट के नेता पद से इस्तीफा देना पड़े। सुजुकी के मुताबिक कोचिकाई नाम का ये गुट एलडीपी में पारंपरिक रूप से मौजूद रहा है, इसलिए किशिदा की हार के बावजूद इस गुट को भंग किए जाने की संभावना नहीं है।
जापान में विपक्ष का मनोबल लंबे समय से गिरा रहा है। लेकिन ताजा नतीजों से उसे बल मिलने की संभावना है। सीडीपी के महासचिव तेत्सुरो फुकुयामा ने कहा है कि पिछले सितंबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद सुगा के बारे में फैसला करने का मौका पहली बार मतदाताओं को मिला। इसमें उन्होंने सुगा के खिलाफ गंभीर निर्णय दिया है। फुकुयामा ने कहा कि सीडीपी दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ सहयोग मजबूत करने के लिए संकल्पबद्ध है, ताकि अगले चुनाव में सत्ता बदली जा सके।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी विपक्ष की राह आसान नहीं है। इन उपचुनावों में मतदान प्रतिशत बेहद कम रहा। एक चुनाव क्षेत्र तो सिर्फ 30.5 फीसदी वोटरों ने मतदान किया। आम चुनाव में जब मतदान प्रतिशत बढ़ेगा, तब एलडीपी का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है। इन पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन उपचुनावों में एक खास परिस्थिति में विपक्ष को जीत मिली है। आम चुनाव में विपक्ष अपने आपसी सहयोग से पूरे चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकेगा, इसकी संभावना अभी भी कम है।