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तोक्यो ओलंपिक्स: पहले सबके मूड पर है गम का साया, बिना दर्शक खिलाड़ियों के मनोबल पर भी पड़ेगा असर
Sat, 10 Jul 2021 04:24 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 10 Jul 2021 04:24 PM IST
सार
जानकारों ने कहा है कि ओलंपिक में भाग लेना किसी एथलीट के लिए उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है। लेकिन इस बार जब वे इस मौके पर पहुंचेंगे, तो उन्हें खाली स्टेडियम में अपना प्रदर्शन दिखाना होगा, इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ सकता है...
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तोक्यो ओलंपिक
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
ओलंपिक खेलों को बिना दर्शकों की मौजूदगी के कराने के फैसले ने इस पूरे आयोजन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये फैसला बीते गुरुवार को उस समय लिया गया, जब खेलों के शुरू होने में दो हफ्तों का ही वक्त रह गया था। तय कार्यक्रम के मुताबिक ओलंपिक खेल 23 जुलाई से शुरू होकर आठ अगस्त तक चलेंगे। लेकिन जिस तरह तोक्यो में कोरोना महामारी के कारण आपातकाल लागू है और यहां जैसा माहौल है, उसके बीच अब सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ये आयोजन किया ही क्यों जा रहा है?
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ओलंपिक खेलों के लिए दुनियाभर से 15 हजार एथलीट और अधिकारी और 70 हजार से अधिक वॉलिंटियर्स यहां पहुंचने वाले हैं। आयोजन ठीक से संपन्न कराने के लिए हजारों की संख्या में दूसरे कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है। अब जानकारों का कहना है कि तोक्यो में नए सिरे से आपातकाल लागू करने और दर्शकों पर रोक लगाने का असर उन सब पर पड़ेगा।
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जानकारों ने कहा है कि ओलंपिक में भाग लेना किसी एथलीट के लिए उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है। लेकिन इस बार जब वे इस मौके पर पहुंचेंगे, तो उन्हें खाली स्टेडियम में अपना प्रदर्शन दिखाना होगा। अपने परिवार के सदस्यों और दर्शकों के प्रोत्साहन से उनका जो मनोबल बढ़ता है, उससे वे वंचित हो जाएंगे। इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
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उधर नए फैसले के बाद अब खेलों का प्रसारण करने वाले टीवी नेटवर्क्स को भी अपने प्लान की रूपरेखा फिर से बनानी पड़ रही है। जानकारों का कहना है कि खाली स्टेडियम के कारण उन्हें अपनी कैमरा पोजिशनिंग नए सिरे से एडजस्ट करनी होगी। उधर अब चूंकि दर्शक स्टेडियमों में नहीं आएंगे, इसलिए वहां प्रबंधन के काम से जुड़े कर्मियों की पहले जितनी जरूरत नहीं रह जाएगी। इसलिए संभावना है कि ओलंपिक्स के लिए जिन हजारों वॉलिंटियर्स और कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी, उनकी संख्या में कटौती की जाए।
तोक्यो ओलंपिक्स की प्रायोजक कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्हें ऐसे मौकों से जो लाभ होने की उम्मीद रहती है, वह इस बार पूरी नहीं होगी। इस तरह उन्होंने जो अपना पैसा लगाया है, वह एक तरह से डूब जाएगा। तोक्यो में आपातकाल लागू होने से यहां आ रहे बाहरी पत्रकारों के लिए भी मुश्किलें खड़ी हुई हैं। कई पत्रकार अब इसको लेकर संदेह में हैं कि क्या उन्हें आजादी से घूमने-फिरने का मौका मिलेगा। सभी पत्रकारों से अपने पूरे कार्यक्रम का ब्योरा अधिकारियों को सौंपने के लिए कहा गया है। इस काम के लिए पत्रकारों को कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
एक नियम यह लागू किया गया है कि यहां आ रहे हर एथलीट की रोज कोरोना संक्रमण संबंधी जांच की जाएगी। अगर कोई पॉजिटिव पाया गया, तो उसे प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया जाएगा। इस तरह बिल्कुल आखिरी वक्त तक किसी खिलाड़ी के टूर्नामेंट से बाहर हो जाने का अंदेशा बना रहेगा। गौरतलब है कि यहां आए तीन विदेशी एथलीट अब तक कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं, जिन्हें फिलहाल आइसोलेशन में रखा गया है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि यहां हालात बिल्कुल 2020 जैसे हैं, जब इन खेलों को टाल दिया गया था। उनका सवाल है कि जब उस समय के माहौल को ओलंपिक्स कराने के लायक नहीं समझा गया, तो अब आयोजक और जापान सरकार ऐसा कराने पर क्यों अड़े हुए हैं?