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Thailand: पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा को एक साल जेल की सजा काटनी होगी, सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश
Tue, 09 Sep 2025 01:01 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 09 Sep 2025 01:01 PM IST
सार
अदालत के मंगलवार के बयान में कहा गया है कि सबूतों से पता चलता है कि जिस रात थाकसिन शिनावात्रा की जेल में हालत बिगड़ी, उस रात जेल के अस्पताल में ही उनकी तबीयत ठीक की जा सकती थी, लेकिन जेल के डॉक्टरों द्वारा जांच किए बिना ही उसे सीधे पुलिस अस्पताल भेज दिया गया, जो प्रक्रियाओं का उल्लंघन था।
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थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा
- फोटो : ANI
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विस्तार
थाईलैंड के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा को भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों में पूर्व में दोषी ठहराए गए मामले में एक साल की जेल की सजा काटनी होगी। सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या 2023 में सजा काटने के दौरान थाकसिन शिनावात्रा को अतिरिक्त लाभ दिया गया। एक न्यायाधीश ने कहा कि थाकसिन की सजा का क्रियान्वयन ठीक से नहीं किया गया था। पुलिस अस्पताल में उनकी हिरासत को जेल की सजा नहीं माना जा सकता।
अदालत ने इन बातों पर जताई नाराजगी
गौरतलब है कि एक दशक से ज़्यादा समय तक स्व-निर्वासन में रहने के बाद थाईलैंड लौटने पर, थाकसिन शिनावात्रा को एक दिन से भी कम समय जेल में बिताना पड़ा। कथित तौर पर चिकित्सा कारणों से शिनावात्रा को बैंकॉक के पुलिस जनरल अस्पताल के एक कमरे में भेज दिया गया था। बाद में थाईलैंड के राजा ने उनकी आठ साल की सजा को एक साल में बदल दिया, और अस्पताल में छह महीने बिताने के बाद उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। अदालत के मंगलवार के बयान में कहा गया है कि सबूतों से पता चलता है कि जिस रात थाकसिन शिनावात्रा की जेल में हालत बिगड़ी, उस रात जेल के अस्पताल में ही उनकी तबीयत ठीक की जा सकती थी, लेकिन जेल के डॉक्टरों द्वारा जांच किए बिना ही उसे सीधे पुलिस अस्पताल भेज दिया गया, जो प्रक्रियाओं का उल्लंघन था।
ये भी पढ़ें- Nepal: सोशल मीडिया से कमाई का जरिया बाधित होने से तो उग्र नहीं हुए युवा, नेपाल में हिंसा की असली वजह क्या?
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अदालत ने कहा- गलत तथ्य बताए गए
इसमें यह भी कहा गया है कि पुलिस अस्पताल में थाकसिन के प्रवास को बढ़ाने के अनुरोध में दावा किया गया था कि थाकसिन की गर्दन की तत्काल सर्जरी की जरूरत है, लेकिन रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनकी उंगली के जोड़ में जकड़न और दाहिने कंधे में टेंडोनाइटिस की सर्जरी हुई थी, जो गंभीर स्थिति नहीं थी। अदालत ने आगे कहा कि थाकसिन की रिहाई से पहले गर्दन की सर्जरी नहीं हुई थी। कार्यवाही के बाद थाकसिन को बैंकॉक रिमांड जेल भेज दिया गया। फैसले के बाद उनकी टीम द्वारा उनके फेसबुक पेज पर साझा किए गए एक संदेश में कहा गया कि उन्होंने अदालत के फैसले को स्वीकार कर लिया है।
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अदालत ने इन बातों पर जताई नाराजगी
गौरतलब है कि एक दशक से ज़्यादा समय तक स्व-निर्वासन में रहने के बाद थाईलैंड लौटने पर, थाकसिन शिनावात्रा को एक दिन से भी कम समय जेल में बिताना पड़ा। कथित तौर पर चिकित्सा कारणों से शिनावात्रा को बैंकॉक के पुलिस जनरल अस्पताल के एक कमरे में भेज दिया गया था। बाद में थाईलैंड के राजा ने उनकी आठ साल की सजा को एक साल में बदल दिया, और अस्पताल में छह महीने बिताने के बाद उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। अदालत के मंगलवार के बयान में कहा गया है कि सबूतों से पता चलता है कि जिस रात थाकसिन शिनावात्रा की जेल में हालत बिगड़ी, उस रात जेल के अस्पताल में ही उनकी तबीयत ठीक की जा सकती थी, लेकिन जेल के डॉक्टरों द्वारा जांच किए बिना ही उसे सीधे पुलिस अस्पताल भेज दिया गया, जो प्रक्रियाओं का उल्लंघन था।
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अदालत ने कहा- गलत तथ्य बताए गए
इसमें यह भी कहा गया है कि पुलिस अस्पताल में थाकसिन के प्रवास को बढ़ाने के अनुरोध में दावा किया गया था कि थाकसिन की गर्दन की तत्काल सर्जरी की जरूरत है, लेकिन रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनकी उंगली के जोड़ में जकड़न और दाहिने कंधे में टेंडोनाइटिस की सर्जरी हुई थी, जो गंभीर स्थिति नहीं थी। अदालत ने आगे कहा कि थाकसिन की रिहाई से पहले गर्दन की सर्जरी नहीं हुई थी। कार्यवाही के बाद थाकसिन को बैंकॉक रिमांड जेल भेज दिया गया। फैसले के बाद उनकी टीम द्वारा उनके फेसबुक पेज पर साझा किए गए एक संदेश में कहा गया कि उन्होंने अदालत के फैसले को स्वीकार कर लिया है।
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