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COP 28: मसौदा घोषणापत्र में जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध खात्मे का जिक्र नहीं, वार्ता से पहले दस्तावेज सार्वजनिक
Tue, 12 Dec 2023 04:01 AM IST
जलज मिश्रा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, दुबई
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 12 Dec 2023 04:01 AM IST
सार
सम्मेलन में जारी नए पाठ के अनुसार, सदस्य देश अगले वर्ष ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए अपनी नई योजना की घोषणा करेंगे। प्रयवक्षकों ने बताया कि जीवश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करना अंतिम पाठ में शामिल किया जा सकता था।
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COP- 28.
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अब जब जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक वार्ता के आखिरी कुछ घंटे बचे हैं, वार्ताकारों ने कॉप-28 का मसौदा घोषणापत्र दस्तावेज सार्वजनिक किया है। खास बात यह है कि इन दस्तावेजों में कहीं भी जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से चलन से बाहर करने का जिक्र नहीं है। हालांकि इस मसौदे में सुझाव दिया गया है कि देश जीवाश्म ईंधन के उत्पादन और उपभोग को कम कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र जलवायु कॉन्फ्रेंस के इतिहास में ऐसा सुझाव भी पहली बार दिया जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी मांग है कि पेट्रोल, कोयला जैसे जीवाश्म ईंधन पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह जलवायु को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। कई देशों और यूरोपीय संघ ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से चलन से बाहर करने का समझौता कॉप-28 की सफलता का संकेत देगा।
कॉप-28 के अध्यक्ष यूएई सरकार के मंत्री सुल्तान अल जाबेर ने कहा, हम शुरू से अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर स्पष्ट हैं। यह मसौदा इसी महत्वाकांक्षा को दिखाता है और आगे की दिशा में बड़ा कदम है। अब यह संबंधित पक्षों के हाथ में है और हमारा भरोसा है वे मानवता और धरती के हित में बेहतरीन फैसला करेंगे। एजेंसी
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जलवायु संकट के समाधान के लिए भारत पर टिकीं दुनिया की उम्मीदें
राष्ट्रमंडल महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड का कहना है कि जलवायु संकट का समाधान देने के लिए दुनिया भारत के नेतृत्व और बौद्धिक शक्ति पर उम्मीद लगाए बैठी है। वार्षिक जलवायु सम्मेलन (सीओपी 28) में शामिल होने पहुंची स्कॉटलैंड ने एक साक्षात्कार में कहा कि वे खुशी और उत्साह के साथ यह देख रही हैं कि भारत आगे क्या करने जा रहा है। जीवाश्म ईंधन के उपयोग को खत्म करने की बढ़ती मांग के बीच भारत से उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत पर 140 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी है। राष्ट्रमंडल कहे जाने वाले 56 देशों की लगभग आधी आबादी भारत में रहती है। लिहाजा, उम्मीद है कि भारत स्थिति संभालने और नेतृत्व करने के लिए आगे आएगा। उन्होंने कहा कि भारत से जो प्रतिभा आ रही है, वह हमें इस समस्या को हल करने में सक्षम बना सकती है। एजेंसी
स्कॉटलैंड ने कहा कि भारत उम्मीद का प्रतिनिधित्व करता है। कई आश्चर्यजनक समाधानों के लिए राष्ट्रमंडल देशों भारत के आभारी हैं। उम्मीद भारत आगे भी नेतृत्व बरकरार रखेगा। स्कॉटलैंड ने कहा कि दुनिया को न्यायसंगत बदलाव की जरूरत है, खासतौर पर जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ निष्पक्ष और न्यायसंगत संक्रमण करना होगा। स्कॉटलैंड ने कहा कि भारत ने तकनीक की मदद से लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। पश्चिम की तुलना में बहुत कम राशि खर्च करके चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से तक पहुंचने वाला पहला देश बना है।
फिनलैंड-पनामा उत्पादन से ज्यादा उत्सर्जन घटाएंगे
डेनमार्क के नेतृत्व में फिनलैंड और पानामा ने वादा किया है कि वे अपने उत्पादन से ज्यादा उत्सर्जन घटाएंगे। दुबई में नेगेटिव एमिटर ग्रुप के तौर पर यह घोषणा करते हुए डेनमार्क के पर्यावरण मंत्री मैग्नस ह्युनिके और फिनलैंड के पर्यावरण मंत्री काय मेकैनेन ने कहा, दुनिया को नेट जीरो यानी उत्पादन जितना उत्सर्जन घटाने पर नहीं रुकना चाहिए। बल्कि, नकारात्मक उत्सर्जन की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके देश अभी कार्बन न्यूट्रल नहीं बने हैं, लेकिन इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और 2045 तक यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
पासा पलटने का ये आखिरी मौका
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने कहा कि दुनिया ताबाही के कगार पर है। सीओपी 28 हमारे पास पासा पलटने का आखिरी मौका है। वहीं, सीओपी आयोजक यूएनएफसीसी सचिव सिमॉन स्टील ने कहा कि अब एक पल भी नहीं गंवाया जा सकता है। धरती को बचाना है, तो ऊर्जा संक्रमण के लिए काम शुरू करना होगा।
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जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी मांग है कि पेट्रोल, कोयला जैसे जीवाश्म ईंधन पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह जलवायु को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। कई देशों और यूरोपीय संघ ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से चलन से बाहर करने का समझौता कॉप-28 की सफलता का संकेत देगा।
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कॉप-28 के अध्यक्ष यूएई सरकार के मंत्री सुल्तान अल जाबेर ने कहा, हम शुरू से अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर स्पष्ट हैं। यह मसौदा इसी महत्वाकांक्षा को दिखाता है और आगे की दिशा में बड़ा कदम है। अब यह संबंधित पक्षों के हाथ में है और हमारा भरोसा है वे मानवता और धरती के हित में बेहतरीन फैसला करेंगे। एजेंसी
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जलवायु संकट के समाधान के लिए भारत पर टिकीं दुनिया की उम्मीदें
राष्ट्रमंडल महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड का कहना है कि जलवायु संकट का समाधान देने के लिए दुनिया भारत के नेतृत्व और बौद्धिक शक्ति पर उम्मीद लगाए बैठी है। वार्षिक जलवायु सम्मेलन (सीओपी 28) में शामिल होने पहुंची स्कॉटलैंड ने एक साक्षात्कार में कहा कि वे खुशी और उत्साह के साथ यह देख रही हैं कि भारत आगे क्या करने जा रहा है। जीवाश्म ईंधन के उपयोग को खत्म करने की बढ़ती मांग के बीच भारत से उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत पर 140 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी है। राष्ट्रमंडल कहे जाने वाले 56 देशों की लगभग आधी आबादी भारत में रहती है। लिहाजा, उम्मीद है कि भारत स्थिति संभालने और नेतृत्व करने के लिए आगे आएगा। उन्होंने कहा कि भारत से जो प्रतिभा आ रही है, वह हमें इस समस्या को हल करने में सक्षम बना सकती है। एजेंसी
स्कॉटलैंड ने कहा कि भारत उम्मीद का प्रतिनिधित्व करता है। कई आश्चर्यजनक समाधानों के लिए राष्ट्रमंडल देशों भारत के आभारी हैं। उम्मीद भारत आगे भी नेतृत्व बरकरार रखेगा। स्कॉटलैंड ने कहा कि दुनिया को न्यायसंगत बदलाव की जरूरत है, खासतौर पर जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ निष्पक्ष और न्यायसंगत संक्रमण करना होगा। स्कॉटलैंड ने कहा कि भारत ने तकनीक की मदद से लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। पश्चिम की तुलना में बहुत कम राशि खर्च करके चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से तक पहुंचने वाला पहला देश बना है।
फिनलैंड-पनामा उत्पादन से ज्यादा उत्सर्जन घटाएंगे
डेनमार्क के नेतृत्व में फिनलैंड और पानामा ने वादा किया है कि वे अपने उत्पादन से ज्यादा उत्सर्जन घटाएंगे। दुबई में नेगेटिव एमिटर ग्रुप के तौर पर यह घोषणा करते हुए डेनमार्क के पर्यावरण मंत्री मैग्नस ह्युनिके और फिनलैंड के पर्यावरण मंत्री काय मेकैनेन ने कहा, दुनिया को नेट जीरो यानी उत्पादन जितना उत्सर्जन घटाने पर नहीं रुकना चाहिए। बल्कि, नकारात्मक उत्सर्जन की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके देश अभी कार्बन न्यूट्रल नहीं बने हैं, लेकिन इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और 2045 तक यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
पासा पलटने का ये आखिरी मौका
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने कहा कि दुनिया ताबाही के कगार पर है। सीओपी 28 हमारे पास पासा पलटने का आखिरी मौका है। वहीं, सीओपी आयोजक यूएनएफसीसी सचिव सिमॉन स्टील ने कहा कि अब एक पल भी नहीं गंवाया जा सकता है। धरती को बचाना है, तो ऊर्जा संक्रमण के लिए काम शुरू करना होगा।