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US Tariff: टैरिफ विवाद भारत के लिए बड़ा मौका विश्व व्यापार में आएगी 3% कमी; शीर्ष UN अर्थशास्त्री ने किया आगाह
Sun, 13 Apr 2025 06:34 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 13 Apr 2025 06:34 AM IST
सार
अमेरिकी सरकार अपनी टैरिफ नीतियों के कारण लगातार चर्चा में बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और दूसरे देशों के साथ हो रहा अमेरिका का विवाद भारत के लिए बड़ा मौका बन सकता है। हालांकि विश्व व्यापार में 3 फीसदी कमी आने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अर्थशास्त्री पामेला कोक-हैमिल्टन ने ट्रंप को टैरिफ को लेकर आगाह किया है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
विश्व निकाय की शीर्ष अर्थशास्त्री पामेला कोक-हैमिल्टन ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार में 3 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसके साथ ही निर्यात के पैटर्न में भी बड़े बदलावों के तहत अमेरिका-चीन के बाजारों से व्यापार सिमटकर भारत, कनाडा और ब्राजील जैसे देशों की ओर हस्तांतरित हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अर्थशास्त्री व अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र (आईटीसी) की कार्यकारी निदेशक पामेला कोक-हैमिल्टन ने जिनेवा में कहा, ये टैरिफ वैश्विक व्यापार में लंबे वक्त तक बदलाव दिखाएंंगे। मसलन, मेक्सिको का निर्यात, जो पहले अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे बाजारों पर निर्भर था, अब कनाडा, ब्राजील और कुछ हद तक भारत की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह, वियतनाम का निर्यात भी अमेरिका और चीन से हटकर मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, यूरोप और कोरिया जैसे बाजारों की ओर जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत जैसे विकासशील देशों के पास यह एक बड़ा मौका हो सकता है।
अमेरिका को होगी बड़ी क्षति, भारत को अवसर
फ्रांसीसी अर्थशास्त्र अनुसंधान संस्थान व सीईपीआईआई के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, 2040 तक इन टैरिफ और जवाबी कदमों से वैश्विक जीडीपी में 0.7% की कमी आ सकती है। मेक्सिको, चीन, थाईलैंड और दक्षिणी अफ्रीका जैसे देशों के साथ-साथ अमेरिका को भी इसकी क्षति उठाना पड़ सकती है। शीर्ष अर्थशास्त्री ने कहा, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अनिश्चितता के समय से कई निपटने के मौके हैं।
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बांग्लादेश को नुकसान होगा
कोक-हैमिल्टन ने कपड़ा उद्योग का उदाहरण देते हुए बताया कि यह उद्योग विकासशील देशों के लिए आर्थिक गतिविधि और रोजगार का बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश आज भी पूरी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है। उसे 37 प्रतिशत का जवाबी टैरिफ झेलना पड़ सकता है। यदि यह टैरिफ लागू हुआ तो 2029 तक बांग्लादेश को अमेरिका में 3.3 अरब डॉलर के निर्यात का नुकसान हो सकता है।
ये भी पढ़ें- कार्नेगी ग्लोबल टेक समिट: टैरिफ पर 90 दिनों की रोक एक अवसर, विशेषज्ञ बोले- US के साथ FTA पर विचार करे भारत
एपल का उत्पादन अमेरिका में किया तो 3 गुना बढ़ाने होंगे दाम, बिक्री घटेगी
ट्रंप प्रशासन अब अनुमान लगा रहा है कि चीन को लक्षित करके लगाए गए टैरिफ के चलते एपल को पहली बार अमेरिका में आईफोन निर्माण के लिए बाध्य होना पड़ेगा। उसने पिछले 18 साल में अधिकांश आईफोन चीन में बनाए हैं। ऐसे में अपने ही देश का उत्पाद उसे 145% टैरिफ के साथ मंगाना होगा। इसमें जटिल आपूर्ति शृंखला भी बाधित होगी। अमेरिका में नए संयंत्र बनाने में कई वर्ष लगेंगे व अरबों डॉलर खर्च होंगे, और फिर एपल को आर्थिक ताकतों के मुकाबले में आईफोन के दाम 3 गुना बढ़ाने होंगे, जिससे बिक्री प्रभावित होगी।
लंबी रणनीति पर काम कर रहा है चीन
टैरिफ पर एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की उपाध्यक्ष वेंडी कटलर ने कहा, चीन इस युद्ध में पीछे हटने वाला नहीं है, बल्कि इससे द्विपक्षीय व्यापार ठप होगा। विशेषज्ञ डैनियल रसेल ने कहा, चीन चीन लंबी रणनीति पर काम कर रहा है। शी मानते हैं कि टैरिफ नीति अमेरिकी बाजार के दबाव में खुद ही कमजोर पड़ जाएगी।
ये भी पढ़ें- ट्रंप का टैरिफ और ब्रिटिश स्टील का संकट: 150 साल के इतिहास की उल्टी गिनती शुरू, उत्पादन खत्म होने के कगार पर
2028 से पहले संभव नहीं
वेडबश सिक्योरिटीज के विश्लेषक डैन इव्स ने कहा, अमेरिका में आईफोन बनाने की अवधारणा एक गैर-शुरुआती है। उन्होंने अनुमान लगाया कि चीन या भारत में बने आईफोन की मौजूदा 1,000 डॉलर की कीमत, इसके अमेरिका में उत्पादन स्थानांतरित होने पर 3,000 डॉलर से अधिक हो जाएगी। ऐसे में यह उत्पादन घरेलू स्तर पर स्थानांतरित करना 2028 से पहले संभव नहीं हो पाएगा।
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संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अर्थशास्त्री व अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र (आईटीसी) की कार्यकारी निदेशक पामेला कोक-हैमिल्टन ने जिनेवा में कहा, ये टैरिफ वैश्विक व्यापार में लंबे वक्त तक बदलाव दिखाएंंगे। मसलन, मेक्सिको का निर्यात, जो पहले अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे बाजारों पर निर्भर था, अब कनाडा, ब्राजील और कुछ हद तक भारत की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह, वियतनाम का निर्यात भी अमेरिका और चीन से हटकर मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, यूरोप और कोरिया जैसे बाजारों की ओर जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत जैसे विकासशील देशों के पास यह एक बड़ा मौका हो सकता है।
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अमेरिका को होगी बड़ी क्षति, भारत को अवसर
फ्रांसीसी अर्थशास्त्र अनुसंधान संस्थान व सीईपीआईआई के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, 2040 तक इन टैरिफ और जवाबी कदमों से वैश्विक जीडीपी में 0.7% की कमी आ सकती है। मेक्सिको, चीन, थाईलैंड और दक्षिणी अफ्रीका जैसे देशों के साथ-साथ अमेरिका को भी इसकी क्षति उठाना पड़ सकती है। शीर्ष अर्थशास्त्री ने कहा, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अनिश्चितता के समय से कई निपटने के मौके हैं।
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बांग्लादेश को नुकसान होगा
कोक-हैमिल्टन ने कपड़ा उद्योग का उदाहरण देते हुए बताया कि यह उद्योग विकासशील देशों के लिए आर्थिक गतिविधि और रोजगार का बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश आज भी पूरी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है। उसे 37 प्रतिशत का जवाबी टैरिफ झेलना पड़ सकता है। यदि यह टैरिफ लागू हुआ तो 2029 तक बांग्लादेश को अमेरिका में 3.3 अरब डॉलर के निर्यात का नुकसान हो सकता है।
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एपल का उत्पादन अमेरिका में किया तो 3 गुना बढ़ाने होंगे दाम, बिक्री घटेगी
ट्रंप प्रशासन अब अनुमान लगा रहा है कि चीन को लक्षित करके लगाए गए टैरिफ के चलते एपल को पहली बार अमेरिका में आईफोन निर्माण के लिए बाध्य होना पड़ेगा। उसने पिछले 18 साल में अधिकांश आईफोन चीन में बनाए हैं। ऐसे में अपने ही देश का उत्पाद उसे 145% टैरिफ के साथ मंगाना होगा। इसमें जटिल आपूर्ति शृंखला भी बाधित होगी। अमेरिका में नए संयंत्र बनाने में कई वर्ष लगेंगे व अरबों डॉलर खर्च होंगे, और फिर एपल को आर्थिक ताकतों के मुकाबले में आईफोन के दाम 3 गुना बढ़ाने होंगे, जिससे बिक्री प्रभावित होगी।
लंबी रणनीति पर काम कर रहा है चीन
टैरिफ पर एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की उपाध्यक्ष वेंडी कटलर ने कहा, चीन इस युद्ध में पीछे हटने वाला नहीं है, बल्कि इससे द्विपक्षीय व्यापार ठप होगा। विशेषज्ञ डैनियल रसेल ने कहा, चीन चीन लंबी रणनीति पर काम कर रहा है। शी मानते हैं कि टैरिफ नीति अमेरिकी बाजार के दबाव में खुद ही कमजोर पड़ जाएगी।
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2028 से पहले संभव नहीं
वेडबश सिक्योरिटीज के विश्लेषक डैन इव्स ने कहा, अमेरिका में आईफोन बनाने की अवधारणा एक गैर-शुरुआती है। उन्होंने अनुमान लगाया कि चीन या भारत में बने आईफोन की मौजूदा 1,000 डॉलर की कीमत, इसके अमेरिका में उत्पादन स्थानांतरित होने पर 3,000 डॉलर से अधिक हो जाएगी। ऐसे में यह उत्पादन घरेलू स्तर पर स्थानांतरित करना 2028 से पहले संभव नहीं हो पाएगा।