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जिनेवा में वार्ता: निराशाजनक माहौल में शुरू हो रही है रूस और पश्चिमी देशों की बातचीत

Mon, 10 Jan 2022 06:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 10 Jan 2022 06:53 PM IST
सार

रूस ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिनेवा में शुरू हो रही वार्ताओं के दौरान वह कजाखस्तान के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं करेगा। कजाखस्तान में रूसी नेतृत्व वाले कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (सीएसटीओ) के सैनिकों को भेजने के मुद्दे पर अमेरिका नाराज है। वह ये मसला भी बातचीत की मेज पर लाना चाहता है...

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Talks between Russia and the US-led North Atlantic Treaty Organization NATO will take place on Wednesday
व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

रूस और पश्चिमी देशों के बीच शुरू हो रही बातचीत से ठीक पहले दोनों पक्षों ने अपने रुख सख्त कर लिए। उन्होंने ये साफ कर दिया कि एक दूसरे की कौन-सी मांग मानना उनके लिए संभव नहीं होगा। तय कार्यक्रम के मुताबिक तीन स्तरों पर होने वाली बातचीत की शुरुआत सोमवार से जिनेवा में हो रही है। इस क्रम में सबसे पहले रूस और अमेरिका के बीच सीधी वार्ता होगी। बुधवार को रूस और अमेरिकी नेतृत्व वाले उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के बीच बातचीत होगी। शुक्रवार को यूरोपीय देशों के संगठन ओएससीई (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटी एंड को-ऑपरेशन इन यूरोप) के बीच वार्ता होनी तय है।

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रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह यूक्रेन में अमेरिकी मिसाइलों को न तैनात करने की रूस की मांग पर बातचीत के लिए राजी है। लेकिन वह रूस की इस मांग को नहीं मानेगा कि पूर्व सोवियत यूनियन के किसी नए गणराज्य को नाटो में शामिल न किया जाए। तास के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने उससे कहा- रूस महसूस करता है कि यूक्रेन में मिसाइलों की तैनाती से उसके लिए खतरा पैदा होगा। राष्ट्रपति जो बाइडन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कह चुके हैं कि ऐसी तैनाती करने का अमेरिका का कोई इरादा नहीं है।
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अधिकारी ने कहा- लेकिन रूस को समझना चाहिए कि उसकी कुछ मांगें ऐसी हैं, जिन पर हम कभी सहमत नहीं होंगे। मसलन, यह रूस तय नहीं कर सकता कि कौन देश हमारा सहयोगी बनेगा। ऐसे फैसले पूरी तरह से संबंधित देश और नाटो पर निर्भर करते हैं।

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रूस बोला, संकेत निराशाजनक

इस बीच रूस ने कहा है कि उसे सोमवार से शुरू हो रहीं वार्ताओँ से ‘तेज रफ्तार प्रगति’ की कोई आशा नहीं है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स से कहा- ‘हम यथार्थवादी अपेक्षाएं लेकर चल रहे हैं। हम इतने भोले नहीं हैं कि यह बातचीत से किसी स्पष्ट प्रगति का भरोसा कर लें, तेज गति से प्रगति की बात तो दूर है।’ रयाबकोव ने कहा- इस बात की पूरी संभावना है कि अमेरिका और नाटो हमारी जो जरूरतें हैं, उन्हें समझने की इच्छा ना दिखाएं। उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले पश्चिमी राजधानियों से मिले संकेत निराशाजनक हैं।

कजाखस्तान मुद्दे में शामिल नहीं

राजनयिकों का कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश यह शर्त रखेंगे कि रूस को क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए। संभावना है कि रूस उन शर्तों को सुनने से इनकार कर देगा। रूस की राय है कि ऐसी शर्तों के साथ कोई लाभदायक बातचीत नहीं हो सकती। रूस इस बात की कानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटी मांगने पर अडिग है कि नाटो का पूरब में और अधिक विस्तार नहीं किया जाएगा। अमेरिका ने इस मांग को सिरे से ठुकरा दिया है। इसलिए बातचीत शुरू होने के पहले ही इस प्रक्रिया से किसी ठोस समाधान की उम्मीद टूट गई है।



इस बीच रूस ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिनेवा में शुरू हो रही वार्ताओं के दौरान वह कजाखस्तान के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं करेगा। कजाखस्तान में रूसी नेतृत्व वाले कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (सीएसटीओ) के सैनिकों को भेजने के मुद्दे पर अमेरिका नाराज है। वह ये मसला भी बातचीत की मेज पर लाना चाहता है।

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