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शांति वार्ता रद्द करने पर तालिबान ने दी परिणाम भुगतने की धमकी, उधर अमेरिकी दूतावास पर हमला

Thu, 12 Sep 2019 02:44 AM IST
Nilesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Nilesh Kumar Updated Thu, 12 Sep 2019 02:44 AM IST
सार

  • तालिबान ने धमकाया, वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना को निशाना बनाता रहेगा
  • शांति वार्ता रद्द करने के बाद पहला हमला अमेरिकी दूतावास पर, कोई हताहत नहीं

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Taliban threaten to bear the consequences if cancellation of peace talks, attack on US embassy
फाइल फोटो - फोटो : social media

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तालिबान नेताओं के साथ आठ सितंबर को वाशिंगटन में होने वाली बैठक रद्द करने के फैसले के बाद तालिबान ने पहली बार अमेरिका को बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी है। तालिबान ने स्पष्ट कहा है कि वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना को निशाना बनाता रहेगा।

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इधर, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 11 सितंबर 2001 को हुए हमले की 18वीं बरसी पर अफगानिस्तान में अमेरिकी दूतावास के पास बुधवार तड़के रॉकेट से हमला किया गया।

हालांकि ट्रंप ने मंगलवार को ही अफगानिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाले अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) को बर्खास्त किया है लेकिन तालिबान ने उसे चेतावनी भरा पैगाम भेज दिया है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा,  अफगानिस्तान से अमेरिकी कब्जा हटाने के लिए हमारे पास दो ही रास्ते थे, जिहाद या संघर्ष और दूसरा वार्ता या मध्यता। यदि ट्रंप बातचीत बंद करना चाहते हैं तो हम पहला रास्ता चुनेंगे और जल्द ही वह अपने फैसले पर अफसोस करेंगे।’ 
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वार्ता रद्द होने का बड़ा कारण शांति प्रक्रिया के दौरान अफगानिस्तान में होने वाले तालिबानी हमले रहे। बता दें कि ट्रंप ने न सिर्फ यह कहा कि वे तालिबान के शीर्ष नेतृत्व के साथ वाशिंगटन से बाहर कैंप डेविड में होने वाली गोपनीय बैठक रद्द कर रहे हैं बल्कि उन्होंने यह भी कह दिया कि शांति समझौते को लेकर चल रही वार्ता मर चुकी है।
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यह रही तनाव की वजह

शांति समझौते के तहत अमेरिका अपने 5400 सैनिक अफगानिस्तान से हटाने पर सहमत हो गया था। लेकिन तालिबान ने बीते हफ्ते एक के बाद एक सिलसिलेवार ढंग से तीन बड़े धमाके किए। यही नहीं बल्कि तालिबान ने उत्तरी अफगानिस्तान के दो जिलों को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक दोनों जिले ताजिकिस्तान की सीमा से सटे हैं। इससे दोनों में फिर तनाव बढ़ गया।

Taliban threaten to bear the consequences if cancellation of peace talks, attack on US embassy
11 सितंबर 2001 को आतंकी हमला

अमेरिकी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 11 सितंबर 2001 को हुए हमले की 18वीं बरसी पर अफगानिस्तान में अमेरिकी दूतावास के पास बुधवार तड़के रॉकेट से हमला किया गया। हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है लेकिन धमाके के तुरंत बाद मध्य काबुल में धुआं छा गया और सायरन बजने लगे। किसी भी गुट ने हमले की जिम्मेदारी भी नहीं ली है।

यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तालिबान नेताओं के साथ शांति वार्ता रद्द करने के फैसले के बाद हुई। इसे एक बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। अफगानिस्तान के अधिकारियों ने तत्काल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ‘नाटो’ मिशन ने भी किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है। 

बता दें कि 11 सितम्बर 2001 को अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व में अमेरिका पर भीषण आतकंवादी हमला हुआ था, जिसमें 2,983 लोग मारे गए थे। इसके बाद ही अफगानिस्तान में तालिबान का पतन हुआ था। आज 18 साल बाद भी करीब 14,000 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में तैनात हैं।

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