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जमीनी हालात : अच्छी बातें कर दिखावा कर रहा तालिबान, दहशतगर्द अब दिखाने लगे असली रंग

Tue, 31 Aug 2021 07:13 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, काबुल
एजेंसी, काबुल Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 31 Aug 2021 07:13 AM IST
सार

  • क्षेत्रीय टीवी पर महिला एंकर को अपना इंटरव्यू देकर तालिबान प्रवक्ता यह दर्शाने की कोशिश कर रहे थे कि वह उदारवादी बन रहे हैं
  • देश से बाहर सुरक्षित निकालने के लिए महिला डॉक्टरों ने लगाई गुहार

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Taliban is showing off by saying good things, bigotry is the same
एमएसएफ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मदद की गुहार लगाती हुई महिला डॉक्टर्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया को तालिबानी आतंकी अपनी अच्छी छवि दिखाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका इस्लामी कट्टरपंथ जस का तस कायम है। इस सबसे बड़ा सुबूत काबुल हवाई अड्डे के बाहर उनका व्यवहार है, जहां वे हिंसा के जरिए नियंत्रण कायम रख रहे हैं।

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देश से बाहर सुरक्षित निकालने के लिए डॉक्टरों ने लगाई गुहार 
यह दावा भी इन विशेषज्ञों ने किया है इस बारे में कहा गया है कि क्षेत्रीय टीवी पर महिला एंकर को अपना इंटरव्यू देकर तालिबान प्रवक्ता है यह दर्शाने की कोशिश कर रहे थे कि वह उदारवादी बन रहे हैं कहने को तो तालिबान में पख्तून कोड चलता है जिसमें महिलाओं पर हमले नहीं किए जाते, लेकिन पाकिस्तानी इस्लामी मदरसों में पढ़े आतंकी इस कोड का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं।
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महिलाएं डरी हुई
सुरक्षा व आतंकी विश्लेषक सज्जन गाहिल के अनुसार उन्होंने अफगानिस्तान की कई महिलाओं से बातचीत की वे तालिबानियों की वजह से डरी हुई हैं सदमे में हैं एक पूरी पीढ़ी की लड़कियां जिन्होंने तालिबानियों के बारे में केवल किताबों में पढ़ा, अब उनके साथ जीवन जीने जा रही है। यह संकेत है 1990 के दशक के आतंक का दौर लौट रहा है।
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आईएसआई अफगानिस्तान पर बढ़ा रही है नियंत्रण 
लेखक सर्गियो रेस्टेली के अनुसार, यह 2 साल पहले दोहा में साइन किए गए समझौते का भी उल्लंघन है, जो दर्शाता है कि आतंकी केवल हिंसक तरीकों की ओर ही लौट रहे हैं। रेस्टेली के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने तालिबानी आतंकियों को खड़ा किया तो उसका लक्ष्य काबुल पर नियंत्रण पाना था। कई रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि आईएसआई ने अपने कुछ सहयोगी एजेंट तालिबानियों में शामिल करवा रखे हैं जिससे वह अफगानिस्तान पर नियंत्रण पाती जा रही है।

कईं मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर (एमएसएफ) संगठन से अनुबंधित डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सोमवार को एमएसएफ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मदद की गुहार लगाई। एमएसएफ को डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स भी कहा जाता है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है उन्होंने कई वर्षों तक विदेशी संस्थाओं के सहयोग से स्वास्थ्य क्षेत्र में काम किया है। अब वे देश छोड़ना चाहते हैं उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समय लेने और उन्हें नहीं भूलने की अपील की। एक डॉक्टर मीरवाइस हैदरी ने कहा, हमने कई वर्षों तक विदेशियों के साथ काम किया है बीमारों और घायलों की देखभाल की है। लेकिन हम अब निराश हैं। हम एमएसएफ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान से बाहर निकालने का अनुरोध करते हैं।

तालिबानी का पहला इंटरव्यू लेने वाली महिला पत्रकार ने छोड़ा देश
तालिबानी आतंकियों के साक्षात्कार कर पहचान बनाने वाली महिला पत्रकार बहेस्ता बर्घाद ने अफगानिस्तान छोड़ दिया है। वे टोलो न्यूज के लिए काम कर रही थी। आतंकियों का कब्जा होने के बाद 17 अगस्त को बहेस्ता ने तालिबान के प्रमुख आतंकी प्रवक्ता मौलवी अब्दुलहक हेमाद का साक्षात्कार लिया था। इसे देश के इतिहास में महिला पत्रकार द्वारा तालिबानी आतंकी का पहला साक्षात्कार माना जाता है।

डर के कारण भागना पड़ा 
सीएनएन से बहेस्ता ने कहा कि उन्हें अपना देश तालिबानी आतंकियों से डर की वजह से छोड़ना पड़ा है। उन्होंने कहा लाखों लोगों की तरह उन्हें भी डर लगता है। हालांकि उन्हें अब भी अपने देश लौटने की उम्मीद है। अगर तालिबान अपने वादों को पूरा करता है और उन्हें सुरक्षा महसूस होती है, तो वे लौटेंगी।

परिवार ने अमेरिका से पूछा, हमारे बच्चों की क्यों ली जान
अमेरिकी ड्रोन हमले में परिवार के छह बच्चों को खो देने के परिजनों के दुख का पारावार नहीं है। हमले में कुल 10 लोग मारे गए थे। जीवित बचे यालदा हाकिम व रामिन यूसुफी ने बताया कि हमले में उनका चचेरा भाई और उसके बच्चे मारे गए हैं।

यूसुफी का कहना है कि उसके परिवार का आईएस से कोई संबंध नहीं है। बिलखते हुए यह परिवार सवाल करता है कि अमेरिका बताएं कि हमले में मारे गए इन मासूम बच्चों का क्या कसूर था। अमेरिका का दावा है कि उसने आईएस आतंकियों की विस्फोटक लदी कार को निशाना बनाया था।


मुरझाई मुस्कानें
काबुल में रविवार को अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए एक ही परिवार के इन 6 बच्चों की तस्वीर हर किसी को द्रवित कर रही है। संभावना से भरे यह मासूम बचपन खिलने से पहले ही अफगानिस्तान में फैली अराजकता की भेंट चढ़ गए। परिवार के साथ निकले यह बच्चे अब कभी घर नहीं लौट पाएंगे।

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