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Taliban: तालिबान ने महिला कर्मचारियों पर लगाई पाबंदी, विदेशी सहायता समूहों ने अफगानिस्तान में बंद किया काम

Sun, 25 Dec 2022 05:53 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 25 Dec 2022 05:53 PM IST
सार

तालिबान ने जब से अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, तब से उसने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो काफी हैरान कर देने वाले हैं। इनमें महिलाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले भी कई फैसले शामिल हैं। हाल ही में तालिबान ने अफगान लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा पर बैन लगाने का फरमान जारी किया था। 

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Taliban bans women employees from working in NGOs in Afghanistan
अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति - फोटो : Social media

विस्तार

लड़कियों की विश्वविद्यालय शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के बाद अफगानिस्तान की सरकार ने एक और तालिबानी  फरमान जारी किया है। दरअसल, समाचार एजेंसी एएनआई ने रॉयटर्स के हवाले से बताया कि अफगानिस्तान के तालिबान संचालित प्रशासन ने शनिवार को सभी स्थानीय और विदेशी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को महिला कर्मचारियों को काम पर आने से रोकने का आदेश दिया है। इस बीच, अफगानिस्तान में सहायता अभियान चला रहे तीन गैर-सरकारी संगठनों ने काम बंद करने का एलान किया है। असल में तालिबान ने इन संगठनों के साथ महिलाओं के काम करने पर पाबंदी लगा दी थी। सेव द चिल्ड्रन, द नॉर्वेजियन रिफ्यृजी काउंसिल और केयर नाम के इन संगठनों ने कहा कि वे अफगानिस्तान में युद्ध, अकाल और आर्थिक बदहाली की वजह से जीवन के लिए संघर्ष कर रहे लोगों की मदद कर रहे हैं, लेकिन तालिबान इसमें भी दखल दे रहा है। महिलाओं के बिना वे यहां अभियान नहीं चला सकते।

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जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने इस बाबत स्थानीय और विदेशी गैर-सरकारी संगठनों को पत्र जारी किया है। इससे पहले, हाल ही में तालिबान ने अफगान लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा पर बैन लगाया है।
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विश्वविद्यालय शिक्षा पर बैन के पीछे बताया था ये कारण
तालिबान ने जब से अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, तब से उसने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो काफी हैरान कर देने वाले हैं। इनमें महिलाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले भी कई फैसले शामिल हैं। हाल ही में तालिबान के उच्च शिक्षा प्रमुख ने अफगान लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा पर बैन लगाने का कारण बताया था। विदेशी मीडिया के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि महिलाओं का पुरुषों से मेलजोल रोकने के लिए उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा लेने से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में लागू ऐसे पाठ्यक्रम जो इस्लामी कानून और अफगान गौरव के विपरीत हैं, इस्लामी मूल्यों का उल्लंघन कर रहे थे। उनके कारण भी ये फैसला लिया गया है।


उन्होंने यह भी कहा कि छात्रावासों में महिलाओं की मौजूदगी, बिना पुरुष साथियों के प्रांतों से उनका आना-जाना और हिजाब की नाफरमानी को देखते हुए लड़कियों के लिए विश्वविद्यालयों को बंद करने का फैसला लिया गया। 

इन फैसलों के जरिए लगाई महिलाओं की आजादी पर पाबंदी
अफगानिस्तान में जब तालिबान सत्ता में आई तब से वहां महिलाओं की ना केवल आजादी पर पाबंदी लगी है बल्कि उनके कई मानवाधिकारों को भी छीना गया है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से तालिबानी सरकार ने पार्कों में महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध, स्कूली शिक्षा पर बैन, महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों पर अपना चेहरा ढंकने का आदेश, बिना पुरुष साथियों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध जैसे फरमानों के जरिए उनके मानवाधिकारों का हनन किया है। 

ईयू ने की कड़ी निंदा
यूरोपीय संघ अफगानिस्तान में गैर सरकारी संगठनों के लिए काम करने वाली महिलाओं पर तालिबान प्रतिबंध की 'कड़ी निंदा' करता है

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